अहिल्यानगर: Maharashtra के अहिल्यानगर जिले से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है। जिले के कर्जत तहसील के जलालपुर गांव की रहने वाली एक छात्रा ने कथित तौर पर NEET परीक्षा में अपेक्षा से कम अंक आने के बाद आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मृतक छात्रा की पहचान अंकिता सांगले के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, वह मेडिकल क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती थी और लंबे समय से NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थी।
166 अंक आने के बाद मानसिक तनाव में थी छात्रा
परिवार के अनुसार, NEET की दोबारा आयोजित परीक्षा में अंकिता को 166 अंक प्राप्त हुए थे। वह अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं थी और लगातार मानसिक तनाव में रह रही थी।
परिजनों का कहना है कि अंकिता को उम्मीद थी कि इस बार उसके बेहतर अंक आएंगे, लेकिन परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। इसके बाद वह काफी निराश रहने लगी थी।
घर में फांसी लगाकर दी जान
बताया जा रहा है कि रविवार शाम करीब 4:30 बजे अंकिता अपने अध्ययन कक्ष में पढ़ाई कर रही थी। परिवार के सदस्यों ने जब काफी देर तक कमरे से कोई आवाज या हलचल नहीं सुनी तो उन्होंने दरवाजा खोला।
कमरे के अंदर का दृश्य देखकर परिवार के होश उड़ गए। अंकिता फंदे से लटकी हुई मिली। इसके बाद परिजनों ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
घटना की जानकारी मिलते ही कर्जत पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुलिस ने प्रारंभिक रूप से आकस्मिक मृत्यु (Accidental Death Report – ADR) दर्ज की है और मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान पुलिस सभी पहलुओं पर ध्यान दे रही है।
सुसाइड नोट में NEET परीक्षा का जिक्र
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें छात्रा ने NEET परीक्षा और अपने मानसिक तनाव का उल्लेख किया है।
हालांकि, पुलिस ने अभी तक सुसाइड नोट की पूरी सामग्री सार्वजनिक नहीं की है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे क्या-क्या कारण रहे।
परिजनों ने मानसिक दबाव को बताया वजह
अंकिता के परिवार का कहना है कि वह पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर थी और डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी।
परिजनों के अनुसार, कम अंक आने के बाद वह लगातार तनाव में रहने लगी थी। उन्होंने बताया कि परीक्षा परिणाम ने उसके आत्मविश्वास को बुरी तरह प्रभावित किया था और इसी मानसिक दबाव के कारण उसने यह कदम उठाया।
सांसद नीलेश लंके पहुंचे पीड़ित परिवार के घर
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय सांसद नीलेश लंके पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की।
उन्होंने छात्रा की मौत पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके।
सरकार से कार्रवाई की मांग
सांसद नीलेश लंके ने इस घटना को गंभीर बताते हुए सरकार से मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या जिम्मेदारी सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहला मामला नहीं है जब किसी प्रतियोगी परीक्षा के दबाव के कारण किसी छात्र की मौत की खबर सामने आई हो।
मई 2026 में भी एक ऐसी घटना सामने आई थी, जिसमें NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की आत्महत्या की खबर आई थी। उस समय परिजनों ने बताया था कि परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की अनिश्चितता के कारण वह लंबे समय से मानसिक तनाव में थी।

इन घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विशेषज्ञों की राय परीक्षा जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव कई छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। ऐसे समय में परिवार, शिक्षक और समाज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई छात्र लगातार उदास, निराश या तनावग्रस्त दिखाई दे, तो उसे डांटने या दबाव बढ़ाने के बजाय उसकी बात सुननी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना समय की जरूरत
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के अंक किसी छात्र की पूरी क्षमता का मापदंड नहीं होते। सफलता के अनेक रास्ते होते हैं और असफलता जीवन का अंत नहीं है।
माता-पिता को भी बच्चों से केवल परिणाम की अपेक्षा करने के बजाय उनके प्रयासों की सराहना करनी चाहिए। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे तनाव से बेहतर तरीके से निपट पाते हैं।
Maharashtra के अहिल्यानगर में हुई यह दुखद घटना प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज के सामने गंभीर प्रश्न खड़े करती है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि परीक्षा के परिणाम जीवन का अंतिम निर्णय नहीं होते और कठिन समय में परिवार, शिक्षकों तथा समाज का भावनात्मक सहयोग विद्यार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।














