नई दिल्ली । देश में Medical education और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच एमबीबीएस और स्नातकोत्तर (पीजी) चिकित्सा सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, देश में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात सुधरकर 1:778 हो गया है।
एनएमसी के आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में 1,09,115 एमबीबीएस सीटें थीं, जो 2025-26 में बढ़कर 1,28,976 हो गई हैं। इसी प्रकार, स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों की संख्या 31,185 से बढ़कर 86,360 हो गई है, जो लगभग तीन गुना वृद्धि को दर्शाती है।
भारतीय चिकित्सा रजिस्टर (आईएमआर) के अनुसार, देश में वर्तमान में 15,35,155 एलोपैथिक चिकित्सक पंजीकृत हैं, जबकि आयुष चिकित्सा पद्धति के 7,51,768 चिकित्सक भी पंजीकृत हैं। यदि दोनों प्रणालियों में पंजीकृत चिकित्सकों की 80 प्रतिशत उपलब्धता मानी जाए, तो भारत में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात 1:778 आंका गया है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार का संकेत देता है।
यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी। सरकार का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य देश में प्रशिक्षित डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना, स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना और ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बेहतर बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल शिक्षा में यह विस्तार भविष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


















