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पूर्वी Singhbhum में मलेरिया नियंत्रण को लेकर प्रशासन सख्त निजी अस्पतालों के साथ उपायुक्त ने बनाई संयुक्त रणनीति

On: July 13, 2026 6:32 PM
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जमशेदपुर: पूर्वी Singhbhum जिले में मलेरिया की रोकथाम और प्रभावी नियंत्रण को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियों को और मजबूत कर दिया है। इसी क्रम में समाहरणालय सभागार में उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में जिले के निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम प्रबंधन के साथ एक महत्वपूर्ण कार्यशाला सह बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मलेरिया के मामलों की समय पर पहचान, सूचना, उपचार एवं निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना था।

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कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि, सिविल सर्जन तथा शहर के विभिन्न निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम के संचालक उपस्थित रहे। इस दौरान जिले में मलेरिया की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए।

मलेरिया नियंत्रण में निजी अस्पतालों की भूमिका होगी अहम

बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त राजीव रंजन ने कहा कि मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण तभी संभव है, जब सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थान मिलकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में मरीज निजी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचते हैं, इसलिए इन संस्थानों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

उन्होंने सभी निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम प्रबंधन को निर्देश दिया कि यदि किसी मरीज में मलेरिया की पुष्टि होती है तो उसकी जानकारी 24 घंटे के भीतर सिविल सर्जन कार्यालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। साथ ही मरीज का उपचार भी उसी समय सीमा के भीतर प्रारंभ किया जाए, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

बुखार के हर संदिग्ध मरीज की होगी प्राथमिकता के आधार पर जांच

उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पोटका, डुमरिया, मुसाबनी, घाटशिला, धालभूमगढ़ एवं अन्य मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले बुखार के मरीजों की विशेष रूप से जांच की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी मरीज में मलेरिया की पुष्टि होती है तो स्वास्थ्य विभाग तत्काल सक्रिय होकर उसके आसपास के घरों में रहने वाले लोगों की भी जांच करेगा। इसके लिए रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) के माध्यम से शीघ्र जांच कर समय पर उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी संदिग्ध मामले को हल्के में नहीं लिया जाए, क्योंकि समय पर पहचान और उपचार ही मलेरिया नियंत्रण की सबसे प्रभावी रणनीति है।

24 घंटे, 72 घंटे और 7 दिन की कार्ययोजना तैयार

कार्यशाला में मलेरिया नियंत्रण के लिए एक स्पष्ट समयबद्ध कार्ययोजना भी प्रस्तुत की गई।

इस योजना के अनुसार—

  • 24 घंटे के भीतर मलेरिया की पुष्टि होने पर संबंधित मरीज की सूचना सिविल सर्जन कार्यालय को भेजी जाएगी तथा उपचार प्रारंभ किया जाएगा।
  • 72 घंटे के भीतर मरीज के आसपास रहने वाले अन्य संभावित संक्रमित लोगों की पहचान कर उनकी जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।
  • 7 दिनों के भीतर प्रभावित गांवों एवं क्षेत्रों में सक्रिय सर्वेक्षण, संपर्क में आए लोगों की जांच तथा इंडोर रेजिडुअल स्प्रे (IRS) जैसे नियंत्रण उपाय लागू किए जाएंगे।

प्रशासन का मानना है कि इस समयबद्ध रणनीति से संक्रमण की श्रृंखला को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सकेगा।

डब्ल्यूएचओ ने झारखंड को लेकर जताई चिंता

कार्यशाला में मौजूद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि ने कहा कि झारखंड के कई जिले अभी भी मलेरिया की दृष्टि से अत्यधिक स्थानिक (Highly Endemic) श्रेणी में आते हैं।

उन्होंने बताया कि ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य संस्थानों को अधिक सतर्क और संवेदनशील होकर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को गंभीरता से लेते हुए प्रत्येक संदिग्ध मरीज की जांच, रिपोर्टिंग और उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

डब्ल्यूएचओ ने प्रशासन द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना की सराहना करते हुए सभी संस्थानों से उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की अपील की।

सिविल सर्जन ने निजी अस्पतालों से मांगा सहयोग

सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कार्यशाला में उपस्थित निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम संचालकों से अपील करते हुए कहा कि मलेरिया नियंत्रण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए निजी स्वास्थ्य संस्थानों का सक्रिय सहयोग भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक संदिग्ध मरीज की समय पर जांच, मलेरिया की पुष्टि होने पर तत्काल सूचना तथा निर्धारित उपचार प्रोटोकॉल का पालन किया जाए। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी अस्पताल प्रशासन के साथ मिलकर इस अभियान को सफल बनाएंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि जिले के ग्रामीण एवं वन क्षेत्रों में मलेरिया का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है। विशेष रूप से पोटका, डुमरिया, मुसाबनी, घाटशिला और धालभूमगढ़ जैसे क्षेत्रों में निगरानी और सर्वेक्षण को और अधिक मजबूत किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग इन क्षेत्रों में नियमित जांच शिविर, जागरूकता अभियान, मच्छरदानी वितरण तथा आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों की टीम लगातार निगरानी करती रहेगी।

प्रशासन का लक्ष्य—मलेरिया मुक्त पूर्वी सिंहभूम

उपायुक्त राजीव रंजन ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि मलेरिया के संक्रमण को पूरी तरह नियंत्रित करना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, निजी अस्पताल, विश्व स्वास्थ्य संगठन और आम नागरिकों की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संस्थानों के समन्वित प्रयासों से पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी और भविष्य में जिले को मलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी।

जनता के लिए जरूरी सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, ठंड लगना, अत्यधिक पसीना आना या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जांच कराएं। स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है।

इसके अलावा लोगों से घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, पानी जमा नहीं होने देने, मच्छरदानी का उपयोग करने तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों में सहयोग करने की भी अपील की गई।

पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा मलेरिया नियंत्रण के लिए निजी अस्पतालों एवं सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के साथ संयुक्त रणनीति बनाना एक महत्वपूर्ण कदम है। समयबद्ध जांच, सूचना, उपचार और निगरानी व्यवस्था से न केवल मरीजों को शीघ्र उपचार मिलेगा, बल्कि संक्रमण के प्रसार को भी प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा। यदि प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, निजी अस्पताल और आम नागरिक मिलकर इस अभियान को सफल बनाते हैं, तो पूर्वी सिंहभूम मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में एक आदर्श जिला बन सकता है।

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