सरायकेला-खरसावां: झारखंड में साइबर अपराध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने शिवनारायणपुर स्थित एक किराए के मकान से तीन युवकों को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी लोगों को ऑनलाइन गेमिंग और आकर्षक कमाई का झांसा देकर साइबर ठगी का शिकार बनाते थे।
बैंक कर्मचारी बनकर लिया था किराए का कमरा
पुलिस के अनुसार, हिरासत में लिए गए युवकों की पहचान गुलशन कुमार, सुमित कुमार और ताहिर खान के रूप में हुई है। तीनों मूल रूप से बिहार के रहने वाले बताए जा रहे हैं। आरोपियों ने करीब एक वर्ष पहले गम्हरिया के शिवनारायणपुर में शशि सिंह नामक व्यक्ति के मकान में किराए पर कमरा लिया था। मकान मालिक को उन्होंने खुद को बैंक कर्मचारी बताया था, जिससे किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ।
हालांकि, समय बीतने के साथ मकान में लगातार अलग-अलग युवकों का आना-जाना शुरू हो गया। स्थानीय लोगों को भी उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगने लगी थीं। इसके बाद पुलिस को इस संबंध में गुप्त सूचना मिली।
गुप्त सूचना पर पुलिस की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलने के बाद आदित्यपुर थाना पुलिस ने देर रात मौके पर छापेमारी की। बताया जा रहा है कि जिस कमरे में आरोपी मौजूद थे, वह अंदर से बंद था। पुलिस ने दरवाजे का ताला तोड़कर कमरे में प्रवेश किया और तीनों युवकों को हिरासत में ले लिया।
तलाशी के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में वाई-फाई राउटर, मोबाइल फोन, विभिन्न कंपनियों के सिम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल साइबर ठगी के नेटवर्क को संचालित करने में किया जा रहा था।
ऑनलाइन गेमिंग का झांसा देकर बनाते थे शिकार
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी लोगों को ऑनलाइन गेमिंग, निवेश और अधिक मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से उनसे बैंकिंग और डिजिटल भुगतान संबंधी जानकारी हासिल कर आर्थिक ठगी की जाती थी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि यह गिरोह केवल झारखंड में सक्रिय था या इसका नेटवर्क अन्य राज्यों तक भी फैला हुआ है।
अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हिरासत में लिए गए आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड और डिजिटल डाटा की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अब तक कितने लोगों को इस गिरोह ने अपना शिकार बनाया और साइबर ठगी से कितनी राशि हासिल की।
साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। संभावना जताई जा रही है कि पूछताछ के बाद कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।
साइबर अपराध के बढ़ते खतरे पर चिंता
बीते कुछ वर्षों में ऑनलाइन गेमिंग, निवेश, लोन, नौकरी और केवाईसी अपडेट के नाम पर साइबर ठगी के मामलों में तेजी आई है। अपराधी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को झांसे में लेते हैं और कुछ ही मिनटों में उनकी मेहनत की कमाई उनके खातों से निकाल लेते हैं। ऐसे में पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
साइबर ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां
- किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें।
- ऑनलाइन गेमिंग या निवेश के नाम पर जल्दी पैसा कमाने के लालच में न आएं।
- अपना ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक पासवर्ड, सीवीवी या एटीएम विवरण किसी के साथ साझा न करें।
- केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही उपयोग करें।
- किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक की तुरंत पुष्टि करें।
- बैंक या सरकारी संस्था कभी भी फोन पर आपकी गोपनीय जानकारी नहीं मांगती।
- साइबर ठगी का शिकार होने पर बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
- यदि आपके आसपास किसी मकान में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दें, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दें।
जनहित संदेश
“साइबर अपराधी आपकी एक छोटी सी लापरवाही का फायदा उठाकर आपकी जीवनभर की कमाई चंद मिनटों में गायब कर सकते हैं। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। किसी भी अनजान लिंक, कॉल या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें। आपकी जागरूकता ही साइबर ठगी के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।”












