उत्तर प्रदेश: Hathras जिले में लगातार हो रही बारिश अब लोगों के लिए नई मुसीबत बनती जा रही है। जलभराव और खेतों में नमी बढ़ने के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर आबादी वाले इलाकों की ओर आ रहे हैं। इसका असर यह हुआ कि बुधवार की रात जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में 20 लोगों को सांप ने डस लिया, जिसके बाद सभी को इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई गई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है।
हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले पांच दिनों में सर्पदंश से तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है, जबकि कई अन्य मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। लगातार बढ़ते मामलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में डर का माहौल पैदा कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है और सीएचसी-पीएचसी में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
एक ही रात में 20 लोग सर्पदंश का शिकार
जिले में बुधवार रात सर्पदंश के मामलों की बाढ़ सी आ गई। अलग-अलग गांवों और थाना क्षेत्रों से एक के बाद एक मरीज जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचते रहे। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को पूरी रात सर्पदंश पीड़ितों के इलाज में जुटना पड़ा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिजरौली निवासी देवा को खेत से लौटते समय पैर में सांप ने काट लिया। वहीं थाना हाथरस गेट क्षेत्र के नयाबांस निवासी पिंकी देवी, पत्नी रमेश चंद्र, को रात में सोते समय सांप ने डस लिया। इसी तरह हाथरस जंक्शन कोतवाली क्षेत्र के गांव हाजीपुर निवासी जमुना देवी, पत्नी दिनेश कुमार, भी सर्पदंश की शिकार हुईं।
इसके अलावा रम नगला निवासी सौदान पुत्र रामदयाल, कोटा निवासी रानी पुत्री असलम, लहरा निवासी सुशीला पुत्री वीरपाल, जिरौली निवासी हिमानी पुत्री रामचरन, हसायन निवासी विष्णु पुत्र रामहेत, सिखरा निवासी रविंद्र पुत्र हजारीलाल, मगटई निवासी सनी पुत्र भगवान सिंह, चंद्रगढ़ी निवासी विमलेश देवी, रुद्रपुर निवासी महेश, बिसाना निवासी अमित, नगला घना निवासी हुकुम सिंह, बरामई निवासी ओम प्रकाश, सुरंगपुरा निवासी देवकी नंदन सहित कई अन्य लोग भी सर्पदंश का शिकार हुए।
एक ही रात में इतने बड़े पैमाने पर सामने आए मामलों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

जिला अस्पताल में रातभर चला इलाज, कई मरीजों को एंटी-वेनम दिया गया
सर्पदंश के सभी मरीजों को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने तुरंत उपचार शुरू किया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अधिकांश मरीजों को एंटी-वेनम इंजेक्शन देकर इलाज शुरू किया गया। कुछ मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर करना पड़ा।
डॉक्टरों का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है। यदि पीड़ित को जल्दी अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग बार-बार लोगों से अपील कर रहा है कि सांप काटने की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू इलाज के बजाय सीधे अस्पताल जाएं।
बारिश और जलभराव से बढ़ा खतरा, रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहे सांप
चिकित्सकों और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण खेतों, मेड़ों और गड्ढों में पानी भर गया है। इससे सांपों के बिलों में भी पानी भर रहा है और वे बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान तलाश रहे हैं। यही कारण है कि अब सांप खेतों से निकलकर गांवों, घरों, आंगनों और सोने के कमरों तक पहुंच रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्थिति ज्यादा गंभीर बनी हुई है, क्योंकि वहां खेतों के पास घर बने होते हैं और रात के समय अंधेरा भी अधिक रहता है। कई लोग खेतों से लौटते समय, घर के बाहर सोते समय या बिना रोशनी के बाहर निकलते वक्त सर्पदंश का शिकार हो रहे हैं।
पिछले पांच दिनों में तीन मौतें, रोजाना 6 से 8 मरीज पहुंच रहे अस्पताल
हाथरस जिले में सर्पदंश के मामलों की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले पांच दिनों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा जिला अस्पताल में हर दिन छह से आठ सर्पदंश के मरीज पहुंच रहे हैं।
बारिश का मौसम अभी जारी है, ऐसे में आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
ग्रामीण इलाकों में लगातार बढ़ रहे मामलों ने लोगों में दहशत का माहौल बना दिया है। कई गांवों में लोग रात को बाहर निकलने से डर रहे हैं और बच्चों को अकेले खेतों या खाली जगहों पर जाने से रोका जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की अपील सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग का कहना है कि बारिश के मौसम में कुछ छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर सर्पदंश के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
लोगों से कहा गया है कि:
- रात में बाहर निकलते समय टॉर्च जरूर साथ रखें
- जूते-चप्पल पहनकर ही घर से बाहर जाएं
- खेतों, झाड़ियों और लकड़ी के ढेर में बिना देखे हाथ न डालें
- घर और आसपास कीटनाशक या सफाई का ध्यान रखें
- सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें
- बच्चों को अंधेरे में अकेले बाहर न जाने दें
- घर के आसपास पानी जमा न होने दें
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करना बहुत जरूरी है, ताकि वे अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर इलाज में देरी न करें।
सर्पदंश के बाद क्या करें? जान बचाने वाले जरूरी कदम
सांप काटने के बाद घबराहट में लोग अक्सर गलत कदम उठा लेते हैं, जिससे मरीज की हालत और बिगड़ सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, सर्पदंश के बाद सबसे पहले पीड़ित को शांत रखना चाहिए और तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए।
1. मरीज को घबराने न दें
सबसे पहले पीड़ित को भरोसा दिलाएं कि समय पर इलाज मिलने से वह ठीक हो सकता है। घबराहट से दिल की धड़कन तेज होती है और शरीर में जहर तेजी से फैल सकता है।
2. काटे गए हिस्से को स्थिर रखें
यदि सांप ने हाथ या पैर में काटा है तो उस हिस्से को जितना हो सके कम हिलाएं। लकड़ी, गत्ता या किसी सहारे की मदद से उसे सीधा और स्थिर रखें।
3. मरीज को कम से कम चलाएं
सर्पदंश के बाद मरीज को चलने-फिरने से रोकें। यदि संभव हो तो उसे लेटाकर या सहारा देकर अस्पताल पहुंचाएं। ज्यादा चलने से जहर तेजी से फैल सकता है।
4. तुरंत अस्पताल ले जाएं
सर्पदंश के मामले में सबसे जरूरी काम है कि मरीज को बिना समय गंवाए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जाए। डॉक्टर की निगरानी में एंटी-वेनम और अन्य इलाज ही सबसे प्रभावी उपाय है।
5. मरीज को अकेला न छोड़ें
मरीज की हालत पर लगातार नजर रखें। अगर उसे सांस लेने में तकलीफ, चक्कर, उल्टी, बेहोशी या ज्यादा दर्द हो रहा हो तो यह गंभीर संकेत हो सकते हैं।
सर्पदंश के बाद क्या न करें? ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी
सांप काटने के बाद कई बार लोग घरेलू उपाय, झाड़-फूंक या पुराने नुस्खों के भरोसे बैठ जाते हैं। यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
इन गलतियों से बचें
- काटे गए स्थान को ब्लेड या चाकू से न काटें
- जहर चूसने की कोशिश बिल्कुल न करें
- बहुत कसकर रस्सी, कपड़ा या पट्टी न बांधें
- झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या ओझा के पास समय बर्बाद न करें
- बिना डॉक्टर की सलाह के कोई घरेलू दवा न दें
- मरीज को दौड़ने, चलने या ज्यादा हिलने-डुलने न दें
डॉक्टरों का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में अंधविश्वास सबसे बड़ा खतरा है। समय पर अस्पताल पहुंचना ही सबसे सुरक्षित और सही रास्ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी चिंता, प्रशासन को चलाना होगा जागरूकता अभियान
Hathras में जिस तरह एक ही रात में 20 लोग सर्पदंश का शिकार हुए, उसने साफ कर दिया है कि यह केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि जनजागरूकता और ग्रामीण सुरक्षा का भी मामला है। ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग सर्पदंश को सामान्य घटना मानकर शुरू में गंभीरता से नहीं लेते, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।
ऐसे में प्रशासन को गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी, पंचायत प्रतिनिधियों और स्वास्थ्यकर्मियों की मदद से लोगों को बताया जाना चाहिए कि बारिश के मौसम में किस तरह सावधानी बरती जाए और सर्पदंश होने पर क्या कदम उठाए जाएं।
इसके अलावा गांवों में झाड़ियों की सफाई, जलभराव की निकासी और अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

Hathras में लगातार बारिश के बीच सर्पदंश के मामलों में आई अचानक बढ़ोतरी चिंता का विषय है। एक ही रात में 20 लोगों का सांप के डसने से घायल होना और पिछले पांच दिनों में तीन लोगों की मौत यह दिखाती है कि हालात कितने गंभीर हैं। बारिश के मौसम में सांपों का बिलों से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में आना अब आम होता जा रहा है, इसलिए लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
स्वास्थ्य विभाग की चेतावनियों और डॉक्टरों की सलाह को गंभीरता से लेना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी, समय पर अस्पताल पहुंचना और अंधविश्वास से दूरी बनाना सर्पदंश जैसी घटनाओं में जान बचा सकता है। हाथरस की यह घटना केवल एक जिला खबर नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण समाज के लिए चेतावनी है कि बारिश के मौसम में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।


















