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NIT जमशेदपुर में एनआईआरएफ/क्यूएस क्रम निर्धारण एवं वैश्विक उत्कृष्टता पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

On: July 6, 2026 6:24 PM
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जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान NIT जमशेदपुर में सोमवार, 6 जुलाई 2026 को “एनआईआरएफ/क्यूएस क्रम निर्धारण एवं एनआईटी जमशेदपुर की वैश्विक उत्कृष्टता की दिशा” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला संस्थान की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक स्थिति को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य एनआईटी जमशेदपुर के लिए ऐसी स्पष्ट और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना था, जिसके माध्यम से संस्थान को एनआईआरएफ (National Institutional Ranking Framework) और क्यूएस (QS) जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं वैश्विक क्रम निर्धारण मानकों में बेहतर स्थान दिलाया जा सके।

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यह आयोजन केवल एक औपचारिक अकादमिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि संस्थान की भविष्य की रणनीति, शोध गुणवत्ता, नवाचार, उद्योग-सम्बद्धता और अंतरराष्ट्रीय पहचान को नए आयाम देने की दिशा में एक गंभीर और दूरदर्शी पहल के रूप में सामने आया। कार्यशाला में संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारियों, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और बाहरी विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा विभिन्न आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला का उद्देश्य NIT जमशेदपुर की वैश्विक उत्कृष्टता की स्पष्ट रूपरेखा तैयार करना

कार्यशाला का मूल उद्देश्य NIT जमशेदपुर को केवल एक उत्कृष्ट तकनीकी संस्थान के रूप में बनाए रखना नहीं, बल्कि उसे राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ाकर वैश्विक शैक्षणिक परिदृश्य में मजबूत पहचान दिलाना था। आज के प्रतिस्पर्धी उच्च शिक्षा परिदृश्य में संस्थानों की गुणवत्ता का मूल्यांकन केवल शिक्षण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शोध, नवाचार, उद्योग सहयोग, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, बौद्धिक संपदा, सामाजिक प्रभाव और संस्थागत प्रशासन जैसे अनेक मानकों के आधार पर किया जाता है। इसी संदर्भ में यह कार्यशाला बेहद प्रासंगिक रही।

कार्यशाला के माध्यम से यह विचार सामने रखा गया कि यदि किसी संस्थान को एनआईआरएफ और क्यूएस जैसी प्रतिष्ठित रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन करना है, तो उसे विभागीय स्तर से लेकर संस्थागत स्तर तक एक समन्वित, डेटा-आधारित और दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी। इसी सोच के साथ विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने एनआईटी जमशेदपुर के वर्तमान परिदृश्य, संभावनाओं और चुनौतियों पर विचार साझा किए।

अनुसंधान एवं परामर्श के अधिष्ठाता प्रो. सतीश कुमार ने रखा कार्यशाला का उद्देश्य

कार्यशाला की शुरुआत अनुसंधान एवं परामर्श के अधिष्ठाता प्रो. सतीश कुमार के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने अपने संबोधन में कार्यशाला के उद्देश्यों को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए कहा कि एनआईटी जमशेदपुर को अपनी राष्ट्रीय और वैश्विक शैक्षणिक पहचान को और सुदृढ़ करने के लिए शोध, नवाचार और संस्थागत योजना के क्षेत्र में और अधिक सक्रिय तथा संगठित प्रयास करने होंगे।

प्रो. सतीश कुमार ने संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विभिन्न विभागों से गुणवत्तापूर्ण शोध पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में किसी भी तकनीकी संस्थान की प्रगति केवल शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी वास्तविक पहचान उच्च गुणवत्ता वाले शोध, वित्तपोषित परियोजनाओं, पेटेंट एवं बौद्धिक संपदा, परामर्श कार्यों तथा विश्वसनीय आँकड़ों पर आधारित रणनीतिक योजना से बनती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि विभागीय और संस्थागत स्तर पर इन सभी पहलुओं को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया जाए, तो संस्थान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने बताई संस्थान की उपलब्धियां और भविष्य की दिशा

कार्यशाला के दौरान एनआईटी जमशेदपुर के माननीय निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने अपने संबोधन में संस्थान की उपलब्धियों, वर्तमान शैक्षणिक आधार और भविष्य की दिशा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एनआईटी जमशेदपुर के पास एक मजबूत शैक्षणिक ढांचा, अनुभवी एवं समर्पित संकाय, प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं तथा उद्योग जगत से जुड़ने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। इन सभी तत्वों के आधार पर संस्थान आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकता है।

प्रो. गौतम सूत्रधार ने कहा कि वैश्विक उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए केवल परंपरागत शिक्षण पद्धति पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए बहुविषयी शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नवाचार-समर्थित शैक्षणिक परिवेश और उद्योग-सम्बद्ध परियोजनाओं पर गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संस्थान को शोध प्रकाशनों की गुणवत्ता, पेटेंट, स्टार्टअप संस्कृति, सामाजिक प्रभाव और वैश्विक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत करनी होगी। उनके संबोधन ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि एनआईटी जमशेदपुर अब केवल एक क्षेत्रीय या राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी पहचान स्थापित करने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रहा है।

विशेषज्ञों ने शोध गुणवत्ता, सतत विकास और बहुविषयी कार्य पर दिया जोर

कार्यशाला में आमंत्रित विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे और एनआईटी जमशेदपुर के लिए उपयोगी सुझाव साझा किए। प्रो. सुनील कुमार, सीएसआईआर-नीरी, नागपुर ने शोध गुणवत्ता, सतत विकास, पर्यावरणीय शोध और बहुविषयी कार्य के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शोध का मूल्य केवल उसके प्रकाशन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि उसका समाज, पर्यावरण और उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने सतत विकास से जुड़े शोध कार्यों को संस्थागत प्राथमिकताओं में शामिल करने की आवश्यकता बताई। पर्यावरणीय चुनौतियों, ऊर्जा, जल, अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छ तकनीक और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर उच्च स्तरीय बहुविषयी शोध संस्थानों की वैश्विक पहचान को मजबूत कर सकते हैं। प्रो. सुनील कुमार ने इस बात पर बल दिया कि यदि शोध को समाज और उद्योग की वास्तविक समस्याओं से जोड़ा जाए, तो उसका प्रभाव अधिक व्यापक और दीर्घकालिक होगा।

वैश्विक क्रम निर्धारण रणनीति और संस्थागत मूल्यांकन पर मिला मार्गदर्शन

कार्यशाला में डॉ. कुमारस्वामी ने वैश्विक क्रम निर्धारण रणनीति, संस्थागत तुलनात्मक मूल्यांकन, शैक्षणिक प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि किसी भी संस्थान के लिए एनआईआरएफ और क्यूएस जैसी रैंकिंग प्रणालियों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए केवल उपलब्धियां होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन उपलब्धियों का व्यवस्थित अभिलेखन, विश्लेषण और प्रस्तुतीकरण भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि संस्थानों को अपने डेटा प्रबंधन, प्रदर्शन संकेतकों की निगरानी, शोध प्रकाशनों की गुणवत्ता, फैकल्टी-स्टूडेंट अनुपात, अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों एवं संकाय की भागीदारी, उद्योग सहयोग और अकादमिक प्रतिष्ठा जैसे पहलुओं पर निरंतर ध्यान देना होगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संस्थान को अन्य राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ तुलनात्मक अध्ययन करते हुए अपनी रणनीति तैयार करनी चाहिए, ताकि प्रतिस्पर्धा के मानकों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

क्षमता निर्माण, अंतरराष्ट्रीयकरण और नेतृत्व पर हुई चर्चा

कार्यशाला में डॉ. कार्तिक श्रीधर, उपाध्यक्ष, आईकेयर ने संस्थागत क्षमता निर्माण, अंतरराष्ट्रीयकरण और उच्च शिक्षा नेतृत्व से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की वैश्विक पहचान केवल उसके अकादमिक परिणामों से नहीं बनती, बल्कि उसकी संस्थागत संस्कृति, नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक दक्षता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की गुणवत्ता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने सुझाव दिया कि एनआईटी जमशेदपुर को वैश्विक उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी, छात्र एवं संकाय विनिमय कार्यक्रम, संयुक्त शोध परियोजनाएं और वैश्विक अकादमिक मंचों पर सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना चाहिए। इसके साथ ही संस्थान के भीतर नेतृत्व विकास, विभागीय समन्वय और दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर आधारित प्रशासनिक तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।

ग्रामीण विकास, भारतीय ज्ञान प्रणाली और सामाजिक प्रभाव पर भी हुआ मंथन

कार्यशाला में श्री दयानिधि उर्मलिया ने ग्रामीण विकास, भारतीय ज्ञान प्रणाली, सामाजिक विस्तार और सामाजिक प्रभाव जैसे विषयों को संस्थागत मूल्यांकन के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आज उच्च शिक्षा संस्थानों का मूल्यांकन केवल उनके शैक्षणिक परिणामों के आधार पर नहीं किया जाता, बल्कि यह भी देखा जाता है कि वे समाज के साथ किस प्रकार जुड़ रहे हैं और अपने ज्ञान एवं संसाधनों का उपयोग सामाजिक परिवर्तन के लिए किस तरह कर रहे हैं।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संस्थानों को स्थानीय समुदाय, ग्रामीण क्षेत्रों, सामाजिक नवाचार, कौशल विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे क्षेत्रों में भी योगदान देना चाहिए। इससे संस्थान की सामाजिक उपयोगिता बढ़ती है और उसकी पहचान केवल एक शिक्षण केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन के साझेदार के रूप में स्थापित होती है। यह दृष्टिकोण एनआईटी जमशेदपुर जैसे संस्थान के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह औद्योगिक क्षेत्र में स्थित होने के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों के साथ भी सार्थक जुड़ाव बना सकता है।

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विभागीय लक्ष्य निर्धारण और शोध उपलब्धियों के व्यवस्थित अभिलेखन पर बल

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि संस्थान की प्रगति केवल शीर्ष स्तर के संकल्पों से नहीं होगी, बल्कि विभागीय स्तर पर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारण और उपलब्धियों के व्यवस्थित अभिलेखन से ही वास्तविक परिवर्तन संभव होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक विभाग को शोध, प्रकाशन, परियोजनाएं, पेटेंट, उद्योग सहयोग, छात्र उपलब्धियां और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी जैसे क्षेत्रों में वार्षिक एवं दीर्घकालिक लक्ष्य तय करने चाहिए।

इसके साथ ही यह भी कहा गया कि संस्थान की सभी शोध उपलब्धियों, परामर्श कार्यों, सामाजिक विस्तार गतिविधियों और शैक्षणिक पहलों का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाए। यह डेटा न केवल रैंकिंग और मूल्यांकन में सहायक होगा, बल्कि भविष्य की नीतियों और संसाधन आवंटन के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा। विशेषज्ञों ने इसे सामूहिक संस्थागत प्रयास का आधार बताया और कहा कि वैश्विक उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सभी विभागों और इकाइयों को साझा लक्ष्य के साथ काम करना होगा।

कार्यशाला से मिले सुझाव संस्थान की भविष्य की रणनीति का बनेंगे हिस्सा

कार्यशाला के समापन अवसर पर NIT जमशेदपुर के माननीय निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने सभी विशेषज्ञों, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में प्राप्त सुझाव केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें संस्थान की भविष्य की रणनीति में शामिल किया जाएगा। उन्होंने यह विश्वास जताया कि इस प्रकार के अकादमिक मंथन और रणनीतिक विमर्श से संस्थान को अपनी दिशा स्पष्ट करने और लक्ष्यों को व्यवस्थित रूप से प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. तितास कुमार मुखोपाध्याय ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यशाला की सफलता में योगदान देने वाले सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शिक्षकों, प्रतिभागियों और आयोजन टीम के प्रति आभार प्रकट किया।

NIT जमशेदपुर के लिए मील का पत्थर साबित हुई कार्यशाला

यह एक दिवसीय कार्यशाला NIT जमशेदपुर के लिए केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्थान की भविष्य की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। इस कार्यशाला ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि संस्थान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को सुदृढ़ करना है, तो शोध, नवाचार, परामर्श, डेटा-आधारित योजना, सामाजिक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक समग्र रणनीति के तहत आगे बढ़ाना होगा।

NIT जमशेदपुर द्वारा आयोजित यह पहल इस बात का संकेत है कि संस्थान अब अपने शैक्षणिक और शोध उत्कृष्टता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए गंभीरता से प्रयासरत है। यदि कार्यशाला में सुझाए गए बिंदुओं पर योजनाबद्ध तरीके से अमल किया गया, तो आने वाले समय में एनआईटी जमशेदपुर राष्ट्रीय रैंकिंग में और अधिक मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के साथ-साथ वैश्विक शैक्षणिक मानचित्र पर भी अपनी प्रभावशाली पहचान स्थापित कर सकता है।

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