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अन्ना Amrita फाउंडेशन के सेंट्रल किचन का डीसी ने किया निरीक्षण गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

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On: June 17, 2026 7:43 PM
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चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने बुधवार को चाईबासा स्थित अन्ना Amrita फाउंडेशन के सेंट्रल किचन का निरीक्षण कर मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और वितरण व्यवस्था का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भोजन निर्माण प्रक्रिया से लेकर विद्यालयों तक भोजन पहुंचाने की पूरी प्रणाली की समीक्षा करते हुए अधिकारियों और फाउंडेशन प्रबंधन को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।

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इस अवसर पर प्रशिक्षु आईएएस ईरा जोरवाल, जिला शिक्षा अधीक्षक प्रवीण कुमार, अन्ना अमृता फाउंडेशन के पदाधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

भोजन निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता की गहन समीक्षा

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने सेंट्रल किचन में तैयार किए जा रहे मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, भोजन तैयार करने की प्रक्रिया, भंडारण व्यवस्था, रसोई की साफ-सफाई तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का अवलोकन किया।

उपायुक्त ने कहा कि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि भोजन निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

तिथि भोज में खीर परोसने का दिया निर्देश

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त मनीष कुमार ने विद्यालयों में आयोजित होने वाले तिथि भोज कार्यक्रमों को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तिथि भोज के अवसर पर बच्चों के लिए खीर की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए, ताकि उन्हें पौष्टिक एवं स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध हो सके।

उन्होंने कहा कि बच्चों के भोजन में विविधता लाना आवश्यक है, जिससे उनकी पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति बेहतर ढंग से हो सके।

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मिक्स दाल-सब्जी की व्यवस्था बंद करने का निर्देश

उपायुक्त ने भोजन की गुणवत्ता और स्वाद को बेहतर बनाने के उद्देश्य से मिक्स दाल-सब्जी परोसने की व्यवस्था बंद करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इसके स्थान पर अधिक स्वादिष्ट, पौष्टिक और संतुलित भोजन तैयार किया जाए, जिससे बच्चों को बेहतर पोषण मिल सके और वे भोजन को रुचि के साथ ग्रहण करें।

उन्होंने कहा कि मध्यान्ह भोजन केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्यक्रम है।

सभी वितरण वाहनों में जीपीएस ट्रैकर लगाने के निर्देश

भोजन वितरण व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने सेंट्रल किचन से विद्यालयों तक भोजन पहुंचाने वाले सभी वाहनों में जीपीएस ट्रैकर लगाने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि जीपीएस प्रणाली लागू होने से वाहनों की वास्तविक समय में निगरानी संभव होगी और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि निर्धारित समय पर सभी विद्यालयों तक गर्म एवं ताजा भोजन पहुंचे। इससे वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

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कर्मियों से बातचीत कर जानी कार्य परिस्थितियां

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने सेंट्रल किचन में कार्यरत कर्मचारियों से भी संवाद किया। उन्होंने कर्मचारियों से वेतन भुगतान, कार्य अवधि, उपलब्ध सुविधाओं और कार्यस्थल की परिस्थितियों की जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने कर्मचारियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि हजारों बच्चों तक प्रतिदिन गुणवत्तापूर्ण भोजन पहुंचाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उपायुक्त ने कर्मचारियों के सुझावों को भी गंभीरता से सुना और आवश्यक सुधार की दिशा में पहल करने का भरोसा दिया।

स्वच्छता व्यवस्था की सराहना

सेंट्रल किचन परिसर का निरीक्षण करते हुए उपायुक्त ने वहां की साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ-साथ स्वच्छता भी उतनी ही आवश्यक है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि किचन परिसर की स्वच्छता एवं खाद्य सुरक्षा मानकों को निरंतर बनाए रखा जाए ताकि बच्चों के स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

चार प्रखंडों के विद्यालयों में पहुंच रहा मध्यान्ह भोजन

उपायुक्त ने जानकारी दी कि वर्तमान में अन्ना अमृता फाउंडेशन के माध्यम से जिले के चार प्रखंडों के विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस व्यवस्था के माध्यम से प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास करता रहेगा।

बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि मध्यान्ह भोजन योजना बच्चों के शारीरिक विकास, पोषण स्तर और शैक्षणिक प्रगति से सीधे जुड़ी हुई है। यदि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन मिलेगा तो उनका स्वास्थ्य बेहतर होगा और वे पढ़ाई में भी अधिक रुचि लेंगे।

उन्होंने निर्देश दिया कि भोजन निर्माण से लेकर विद्यालयों तक वितरण की प्रत्येक प्रक्रिया में गुणवत्ता, स्वच्छता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए।

चाईबासा स्थित अन्ना Amrita फाउंडेशन के सेंट्रल किचन के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त मनीष कुमार ने स्पष्ट संदेश दिया कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, स्वाद और समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए दिए गए निर्देश मध्यान्ह भोजन योजना को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। प्रशासन की यह पहल निश्चित रूप से जिले के स्कूली बच्चों को बेहतर पोषण और स्वस्थ भविष्य प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।

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