
- वैश्विक महामारियों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बनाने पर जोर
गोरखपुर। मिशन सेव इंडिया के संस्थापक एवं प्रख्यात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आर. एन. सिंह ने भारत सरकार से भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सभी स्थलीय प्रवेश द्वारों (लैंड पोर्ट्स) और सीमा चौकियों पर स्थायी स्वास्थ्य जांच केंद्र स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेजी से फैलने वाली संक्रामक और घातक वायरल बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए देश की सीमाओं पर स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

जारी बयान में डॉ. सिंह ने कहा कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर यात्रियों की स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन केवल एयरपोर्ट आधारित निगरानी प्रणाली को पर्याप्त नहीं माना जा सकता। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण प्रतिदिन हजारों लोग विभिन्न सीमा चौकियों और लैंड पोर्ट्स के माध्यम से दोनों देशों के बीच आवागमन करते हैं। ऐसे में किसी भी संक्रामक रोग के सीमा पार से प्रवेश और उसके प्रसार की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
प्रमुख बिंदु
🔹 भारत-नेपाल सीमा के सभी लैंड पोर्ट्स पर स्थायी स्वास्थ्य जांच चौकियां स्थापित करने की मांग।
🔹 कोविड-19 जैसी महामारियों से सबक लेते हुए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर।
🔹 प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी, आधुनिक उपकरण और आइसोलेशन सुविधाओं की व्यवस्था का सुझाव।
🔹 स्वास्थ्य सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा मानने की अपील।
🔹 केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों से त्वरित कार्रवाई की मांग।
कोविड-19 महामारी से मिली सीख
डॉ. सिंह ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने यह साबित कर दिया है कि किसी भी संक्रामक रोग की रोकथाम के लिए प्रारंभिक स्तर पर निगरानी और स्वास्थ्य जांच व्यवस्था सबसे प्रभावी हथियार होती है। यदि भारत-नेपाल सीमा के प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर स्थायी स्वास्थ्य जांच केंद्र स्थापित किए जाते हैं, तो संभावित संक्रमणों की पहचान शुरुआती चरण में ही की जा सकेगी। इससे संक्रमण के व्यापक प्रसार को रोकने और समय पर उपचार सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस हों जांच चौकियां
उन्होंने सुझाव दिया कि सीमा क्षेत्रों में स्थापित किए जाने वाले स्वास्थ्य जांच केंद्रों में प्रशिक्षित चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मी, आधुनिक जांच उपकरण, आइसोलेशन वार्ड, एम्बुलेंस सेवाएं तथा आपातकालीन चिकित्सा संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित कर एक व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी महामारी या संक्रामक रोग की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
स्वास्थ्य सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ने की जरूरत
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की विशाल जनसंख्या और पड़ोसी देशों के साथ व्यापक संपर्क को देखते हुए स्वास्थ्य सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न अंग माना जाना चाहिए। उनका मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य निगरानी तंत्र को मजबूत करना केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित और जन सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
केंद्र सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील
मिशन सेव इंडिया के संस्थापक ने केंद्र सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा संबंधित एजेंसियों से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने और शीघ्र आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समय रहते प्रभावी स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय लागू कर भारत को भविष्य में संभावित वैश्विक महामारियों और अन्य संक्रामक रोगों के खतरों से सुरक्षित रखा जा सकता है।








