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1 जून से शुरू होगा देशव्यापी “खेत बचाओ अभियान”, किसानों को मिलेगी मौसम, मिट्टी और बाजार आधारित सलाह

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On: May 31, 2026 11:09 AM
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नई दिल्ली: देशभर के किसानों को संतुलित खेती, बेहतर उत्पादन और कम लागत की दिशा में जागरूक करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार 1 जून से 30 जून तक “खेत बचाओ अभियान” चलाने जा रही है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने इस अभियान को खेत, किसान और गांव को जोड़ने वाला एक व्यापक राष्ट्रीय जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया है।

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दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्रीय मंत्री ने अभियान की तैयारियों का जायजा लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को संतुलित एवं वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम न बनकर जनभागीदारी आधारित आंदोलन के रूप में विकसित होना चाहिए।

उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर रहेगा विशेष जोर

कृषि मंत्रालय के अनुसार अभियान का प्रमुख लक्ष्य रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को कम करना और किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर खाद के सही इस्तेमाल के लिए प्रेरित करना है। इसके तहत किसानों को जैविक खेती, हरी खाद, जैव-उत्पादों और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) जैसी तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

विशेषज्ञ किसानों को बताएंगे कि किस प्रकार कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है तथा मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

मौसम की चुनौती से निपटने में मिलेगी मदद

अभियान के दौरान किसानों को मौसम संबंधी संभावित चुनौतियों के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। उन्हें यह सलाह दी जाएगी कि बदलते मौसम के अनुसार कौन-सी फसलें उपयुक्त रहेंगी, किन क्षेत्रों में फसल विविधीकरण अपनाना लाभकारी होगा और जल संकट या अन्य जोखिमों की स्थिति में कौन से विकल्प बेहतर हो सकते हैं।

सरकार का लक्ष्य किसानों को केवल सामान्य जानकारी देना नहीं, बल्कि क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों के अनुसार व्यावहारिक और उपयोगी सलाह उपलब्ध कराना है।

पंचायत स्तर तक पहुंचेगा अभियान

केंद्र सरकार ने अभियान को गांव और पंचायत स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की योजना बनाई है। इसके तहत कृषि मशीनरी के वितरण, विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने जैसी गतिविधियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।

पंचायतों, कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तथा राज्य सरकारों के सहयोग से कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा।

जनप्रतिनिधियों की भी होगी भागीदारी

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अभियान को केवल विभागीय गतिविधि तक सीमित नहीं रखा जाएगा। राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा ताकि किसानों तक संदेश अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

सरकार का मानना है कि जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी से यह अभियान एक बड़े जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर सकता है।

1600 से अधिक टीमें करेंगी काम

अभियान के सफल संचालन के लिए देशभर में 1600 से अधिक टीमों का गठन किया गया है। अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए 500 विशेष टीमें बनाई गई हैं, जिनमें कृषि वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारी और विभिन्न अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।

इसके अतिरिक्त आईसीएआर और कृषि विज्ञान केंद्रों की 1150 से अधिक बहुविषयक टीमें भी किसानों के बीच जाकर जागरूकता कार्यक्रम संचालित करेंगी।

योजनाओं का लाभ भी पहुंचेगा किसानों तक

अभियान के दौरान किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), पीएम-किसान योजना, दलहन एवं तिलहन मिशन, ऑयल पाम मिशन, कॉटन मिशन, मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन और जल संरक्षण जैसे कार्यक्रमों की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाएगी।

सरकार का प्रयास है कि खेती से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और सेवाओं को एकीकृत रूप से किसानों तक पहुंचाया जाए, जिससे उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके।

खेती में नई सोच विकसित करने का प्रयास

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संदेश किसानों तक कितनी प्रभावी और व्यवहारिक रूप से पहुंचता है। संतुलित उर्वरक उपयोग, मौसम आधारित कृषि सलाह, पंचायत स्तर पर सक्रियता और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के माध्यम से खेती की नई संस्कृति विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

📌 मुख्य बिंदु

✅ 1 जून से 30 जून तक देशभर में चलेगा “खेत बचाओ अभियान”
✅ संतुलित एवं वैज्ञानिक उर्वरक उपयोग पर रहेगा फोकस
✅ मौसम, मिट्टी और बाजार के अनुसार किसानों को मिलेगी सलाह
✅ 1600 से अधिक टीमें गांव-गांव जाकर करेंगी जागरूकता
✅ पंचायत, केवीके, आईसीएआर और राज्य सरकारें मिलकर चलाएंगी अभियान
✅ किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसान सहित कई योजनाओं का मिलेगा लाभ
✅ अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी

“खेत बचाओ अभियान” केवल उर्वरक प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सरकारी योजनाओं से जोड़कर कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाना है। यदि यह अभियान प्रभावी ढंग से लागू होता है तो इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है।

1 जून से 30 जून तक देशभर में चलेगा “खेत बचाओ अभियान”

इस अभियान की मुख्य बातें (Key Highlights):

  1. कम खाद, सही खाद, सही सलाह: अभियान का मुख्य फोकस संतुलित उर्वरक उपयोग पर होगा। किसानों को मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर सही मात्रा में खाद डालने, हरी खाद (Green Manure), जैविक और जैव-उत्पादों (Organic & Bio-products) के उपयोग को बढ़ाने के लिए जागरूक किया जाएगा।
  2. मौसम और मिट्टी के अनुसार सीधी सलाह: मौसम की चुनौतियों को देखते हुए किसानों को व्यावहारिक सलाह दी जाएगी कि उन्हें कौन सी फसलें लेनी चाहिए, फसल विविधीकरण (Crop Diversification) कहाँ अपनाना चाहिए और कम पानी या जोखिम की स्थिति में क्या विकल्प चुनने चाहिए।
  3. व्यापक जनआंदोलन का रूप: श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि इसे एक राष्ट्रीय जनआंदोलन बनाया जाएगा। इसके लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया जाएगा।
  4. 1600 से अधिक विशेष टीमें गठित: अभियान को जमीन पर उतारने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), ICAR संस्थानों और कृषि विभाग के वैज्ञानिकों को मिलाकर 1650 से अधिक टीमें बनाई गई हैं। इनमें से 500 टीमें विशेष रूप से उन 100 जिलों पर ध्यान केंद्रित करेंगी जहाँ उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग होता है।
  5. योजनाओं का सीधा लाभ: अभियान के दौरान केवल सलाह ही नहीं दी जाएगी, बल्कि पंचायत स्तर पर कृषि मशीनों का वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), पीएम-किसान (PM-KISAN) से छूटे हुए लाभार्थियों को जोड़ना, और दलहन-तिलहन, ऑयल पाम व कॉटन मिशन जैसी योजनाओं का लाभ सीधे खेतों तक पहुँचाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री का संदेश:

“अभियान की दिशा पूरी तरह साफ है — खेत बचे, लागत संभले, मिट्टी सुधरे, किसान जागरूक बने और गांव के स्तर पर कृषि प्रबंधन की एक नई संस्कृति विकसित हो।”

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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