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तुम्हारे ख़त में नया एक सलाम किसका थ दबिस्तान-ए-जमशेदपुर में याद किए गए महान शायर दाग़ Dehlvi

On: May 26, 2026 5:27 PM
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जमशेदपुर: में महान उर्दू शायर और उस्ताद मिर्ज़ा दाग़ Dehlvi की जयंती के अवसर पर अदारा ‘दबिस्तान-ए-जमशेदपुर’ की ओर से एक खूबसूरत शेरी निशस्त का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सोमवार शाम जवाहर नगर स्थित संस्था के कार्यालय में आयोजित हुआ, जहां शहर के कई नामचीन शायरों और अदबी हस्तियों ने शिरकत की।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के संरक्षक गौहर अज़ीज़ ने की। इस मौके पर उर्दू अदब, ग़ज़ल और शायरी के चाहने वालों की बड़ी संख्या मौजूद रही। पूरी महफिल देर रात तक शेर-ओ-शायरी और अदबी माहौल से गुलजार रही।

दाग़ Dehlvi उर्दू शायरी का बड़ा नाम गौहर अज़ीज़

महफिल को संबोधित करते हुए गौहर अज़ीज़ ने कहा कि दाग़ Dehlvi उर्दू शायरी की दुनिया का ऐसा नाम हैं, जिन पर पूरी उर्दू ज़बान को नाज़ है। उन्होंने कहा कि दाग़ देहलवी ने अपनी शायरी के जरिए मोहब्बत, तहज़ीब और लफ्ज़ों की नजाकत को नई पहचान दी।

उन्होंने आगे कहा कि आज के दौर के तमाम शायर किसी न किसी रूप में दाग़ देहलवी की शायरी की परंपरा से जुड़े हुए हैं। उनके अशआर आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं और नई पीढ़ी को उर्दू अदब की खूबसूरती से जोड़ते हैं।

तुम्हारे खत में नया एक सलाम किसका था से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत दाग़ देहलवी की मशहूर ग़ज़ल

“तुम्हारे ख़त में नया एक सलाम किसका था”

से हुई। इसे शायर सफीउल्लाह सफी ने अपनी मधुर आवाज़ में पेश किया। ग़ज़ल की प्रस्तुति के साथ ही पूरी महफिल अदबी रंग में रंग गई और शेर-ओ-शायरी का सिलसिला शुरू हुआ।

ग़ज़ल सुनते ही श्रोताओं ने जमकर दाद दी और महफिल में वाह-वाह की गूंज सुनाई दी।

शायरों ने पेश कीं अपनी चुनिंदा ग़ज़लें

शेरी निशस्त में शहर के कई प्रमुख शायरों ने अपनी चुनिंदा ग़ज़लें और अशआर पेश किए। शायरों की शानदार प्रस्तुतियों ने महफिल को यादगार बना दिया।

इस अवसर पर जिन शायरों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं, उनमें

  • गौहर अज़ीज़
  • वलीउल्लाह वली
  • सद्दाम गनी
  • फ़रहान ख़ान फ़रहान
  • सफ़ीउल्लाह सफ़ी
  • सकलैन मुश्ताक
  • शोएब अख़्तर
  • सफ़दर हारून
  • हसरत निज़ामी
  • सरफ़राज़ शाद
  • सैफ़ अली सैफ़

शामिल रहे।

सभी शायरों ने अपने अलग-अलग अंदाज़ और लहजे में ग़ज़लें पेश कर श्रोताओं का दिल जीत लिया।

उर्दू अदब को बढ़ावा देने की पहल

दबिस्तान-ए-जमशेदपुर द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ एक शेरी महफिल नहीं, बल्कि उर्दू अदब और साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की एक महत्वपूर्ण पहल भी रही।

कार्यक्रम में मौजूद साहित्य प्रेमियों ने कहा कि ऐसे आयोजन शहर के सांस्कृतिक माहौल को मजबूत करते हैं और युवाओं को उर्दू शायरी से जोड़ने का काम करते हैं।

देर रात तक चला अदबी कार्यक्रम

शेर-ओ-शायरी से सजी यह महफिल देर रात तक चलती रही। श्रोताओं ने हर शायर की प्रस्तुति का भरपूर आनंद लिया और लगातार तालियों व दाद से उनका हौसला बढ़ाया।

कार्यक्रम का समापन फ़रहान ख़ान फ़रहान के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी शायरों, मेहमानों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक आयोजनों को जारी रखने की बात कही।

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