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Sreenath विश्वविद्यालय में पॉश एक्ट और कार्यस्थल नैतिकता पर कार्यशाला का आयोजन

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On: April 29, 2026 9:06 PM
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जमशेदपुर: Sreenath विश्वविद्यालय में पॉश अधिनियम 2013 और कार्यस्थल नैतिकता विषय पर आयोजित कार्यशाला ने छात्रो, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए एक नई जागरूकता ला दी है। 28 अप्रैल 2026 को यह आयोजन Sreenath विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (महिला प्रकोष्ठ) द्वारा किया गया, जिसमें आदित्यपुर नगर निगम की उप नगर आयुक्त सुश्री पारुल सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुईं। यह कार्यक्रम पॉश अधिनियम 2013 की जानकारी, यौन उत्पीड़न रोकथाम और शिकायत प्रक्रिया को समझाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। यह न केवल एक कानूनी जानकारी दिन था, बल्कि कार्यस्थल नैतिकता को बढ़ावा देने का एक ठोस कदम था। आइए, इस घटना की पूरी कहानी और इसके महत्व को विस्तार से समझें।

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कार्यशाला का उद्देश्य और संदर्भ

इस पॉश अधिनियम और कार्यस्थल नैतिकता पर कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य था – Sreenath विश्वविद्यालय के सभी स्टेकहोल्डर्स (छात्र, शिक्षक, प्रशासनिक कर्मचारी) को कार्यस्थल सुरक्षा, कानूनी प्रावधानों और नैतिक आचरण के प्रति जागरूक करना। पॉश अधिनियम 2013 (यौन उत्पीड़न से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम) भारत में कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न के विभिन्न रूपों को निर्धारित करता है और एक आईआईसी (आंतरिक शिकायत समिति) के माध्यम से शिकायत दर्ज करने का तंत्र बनाता है। इस अधिनियम के तहत प्रत्येक नियोक्ता को 10 या अधिक कर्मचारियों वाली इकाई में एक आईआईसी गठित करना अनिवार्य है।

कार्यक्रम के दौरान विषयवार चर्चा हुई:

  • पॉश अधिनियम 2013 की बेसिक्स: परिभाषा, लागू दायरा, उत्पीड़न के प्रकार (मौखिक, शारीरिक, ऑनलाइन आदि)।
  • कार्यस्थल नैतिकता: पेशेवर व्यवहार, यौन उत्पीड़न से जुड़ीज़ि म्मेदारियां और अधिकार-कर्तव्य।
  • शिकायत प्रक्रिया: आईआईसी के माध्यम से कैसे शिकायत दर्ज करें, जांच कब तक होती है, और निवारण के विकल्प।
  • नैतिक आचरण: सम्मान, निष्पक्षता और सुरक्षित वातावरण जैसे मुद्दे।

यह कार्यशाला Sreenath विश्वविद्यालय के भीतर एक समावेशी और निष्पक्ष कार्यस्थल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी, जहां यह सुनिश्चित हो कि कोई भी व्यक्ति यौन उत्पीड़न या लापरवाह नैतिकता के शिकार न हो।

मुख्य वक्ता पारुल सिंह की भूमिका

आदित्यपुर नगर निगम की उप नगर आयुक्त सुश्री पारुल सिंह ने इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में गरिमामय उपस्थिति दी। उनका नाम पहले ही झारखंड में ईमानदार सेवाओं के लिए 2025 ग्लोबल रिकग्निशन अवॉर्ड से जुड़ा है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि वे नैतिक और निष्पक्ष नेतृत्व के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने अपने उद्बोधन में वास्तविक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से पॉश अधिनियम की जटिलताओं को सरल भाषा में समझाया।

पारुल सिंह के द्वारा चर्चित मुख्य बिंदु

  • यौन उत्पीड़न के रूप: उन्होंने बताया कि यह सिर्फ शारीरिक छुआ-छूत तक सीमित नहीं है, बल्कि अश्लील टिप्पणियां, अनचाहे फोन कॉल, ऑनलाइन हैरासमेंट आदि भी शामिल हैं।
  • कानूनी उपाय: शिकायत दर्ज करने पर 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य है, और उल्लंघनकर्ता को निलंबन या छांटनी जैसी सजा हो सकती है।
  • सुरक्षित कार्यस्थल: उन्होंने जोर दिया कि एक सम्मानजनक और समान वातावरण न केवल कानून की जरूरत है, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।

प्रतिभागियों ने उनके शांत और तार्किक शैली को “उपयोगी और ज्ञानवर्धक” कहा, जिससे उनके विचारों की प्रभावशीलता बढ़ी।

Sreenath कार्यशाला की प्रक्रिया और प्रतिक्रिया

कार्यशाला के दौरान लगभग 300 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें शिक्षक, प्रशासनिक कर्मचारी और स्नातक-स्नातकोत्तर छात्र शामिल थे। प्रत्येक खंड में विस्तृत प्रस्तुति के बाद एक प्रश्न-उत्तर सत्र हुआ, जहां प्रतिभागियों ने अपनी जिज्ञासाएं रखीं। उदाहरण के लिए:

  • यदि शिकायत करने से नौकरी जाने का डर हो तो क्या करें?
  • आईआईसी के निर्णय के खिलाफ अपील कैसे करें?

आयोजकों ने बताया कि पॉश अधिनियम के प्रति बेहतर समझ विकसित हुई है और शिकायत प्रणाली के प्रति जागरूकता बढ़ी है। कार्यक्रम के अंत में Sreenath विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सुखदेव महतो ने पारुल सिंह को सम्मानित करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। कुलपति प्रोफेसर डॉ. एस.एन. सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों और शिक्षकों के लिए बेहद जरूरी हैं, क्योंकि कानून की बुनियादी जानकारी आज के दौर में हर व्यक्ति की जरूरत है।

प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला को सफल और अगली बार नियमित रूप से आयोजित करने का सुझाव दिया। यह दिखाता है कि ऐसे जागरूक आयोजन सुरक्षित, समावेशी और नैतिक कार्यस्थल बनाने में मजबूती देते हैं। अगर आप भी शिक्षण संस्थानों या कार्यालयों में हैं, तो इस प्रकार की कार्यशाला जरूर लागू करें।

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