
झारखंड के Jamshedpur स्थित कोलहान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल MGM Hospital में एक बार फिर मरीज की आत्महत्या की घटना सामने आई है, जिससे अस्पताल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। शुक्रवार शाम करीब पांच बजे ईएनटी विभाग में भर्ती 39 वर्षीय कैदी अशोक कुमार महतो ने अस्पताल की सातवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और पूरे शहर में इस मामले की चर्चा शुरू हो गई।

जानकारी के अनुसार, अशोक कुमार महतो को 19 अप्रैल की सुबह जेल में गला काटकर आत्महत्या के प्रयास के बाद MGM अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसका तत्काल ऑपरेशन किया था। ऑपरेशन के बाद उसकी शारीरिक स्थिति में सुधार तो हुआ, लेकिन मानसिक स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाई थी। डॉक्टरों द्वारा उसकी निगरानी मनोचिकित्सकों की टीम के साथ की जा रही थी, क्योंकि वह मानसिक रूप से काफी परेशान बताया जा रहा था। इसी बीच उसकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित RIMS रेफर कर दिया था।
शुक्रवार शाम को जब उसे रिम्स भेजने की तैयारी चल रही थी, तब जेल प्रशासन की ओर से एंबुलेंस और अतिरिक्त पुलिस टीम अस्पताल पहुंची थी। कैदी को पहले से निगरानी कर रही पुलिस टीम से नई टीम को सौंपने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान अशोक कुमार महतो अचानक अपने बेड नंबर 725 से उठा और पास की खिड़की पर चढ़ गया। जब तक वहां मौजूद पुलिसकर्मी और अस्पताल स्टाफ उसकी ओर दौड़कर उसे पकड़ पाते, उसने सातवीं मंजिल से छलांग लगा दी।
इस दर्दनाक घटना के समय उसके पिता, सेवानिवृत्त शिक्षक विजय कुमार महतो, कुछ ही दूरी पर मौजूद थे और अपने बेटे को अपनी आंखों के सामने गिरते देख पूरी तरह सदमे में आ गए डॉक्टरों के अनुसार, मरीज का इलाज सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्तर पर भी चल रहा था, लेकिन वह गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहा था। बताया जा रहा है कि अशोक कुमार महतो अपनी पत्नी और बेटी की हत्या के मामले में जेल में बंद था, जिससे उसकी मानसिक स्थिति और अधिक बिगड़ गई थी।
यह भी सामने आया है कि MGM अस्पताल में यह आत्महत्या की तीसरी घटना है, जबकि इससे पहले दो अन्य मरीजों ने भी आत्महत्या का प्रयास किया था, हालांकि उन्हें समय रहते बचा लिया गया था लगातार हो रही इन घटनाओं ने अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद एक कैदी का इस तरह से खिड़की तक पहुंच जाना और आत्महत्या कर लेना कई स्तरों पर लापरवाही को दर्शाता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अस्पताल में सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य निगरानी को मजबूत किया जाएगा।













