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DM ने की स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा, स्वास्थ्य सेवा एवं व्यवस्था में सुधार लाने तथा लापरवाही पर कार्रवाई का निर्देश

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On: March 28, 2026 10:09 PM
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स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। पूर्वी सिंहभूम के DM श्री कर्ण सत्यार्थी ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में साफ निर्देश दिए – सेवाएँ पारदर्शी और सुलभ बनें, अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचे। लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, दोषियों पर कार्रवाई होगी।

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यह बैठक स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों को दूर करने का बड़ा प्रयास है। आइए, बैठक के मुख्य बिंदुओं, निर्देशों और महत्व को विस्तार से समझें।

समीक्षा बैठक का स्वरूप और मुख्य एजेंडा

समाहरणालय सभागार में DM की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रोजेक्ट उल्लास, डायलिसिस, आईसीयू, शिशु केयर, कुपोषण, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, ममता वाहन, लिंग अनुपात, गैर-संचारी रोगों जैसी सेवाओं की प्रगति पर गहन चर्चा हुई। श्री सत्यार्थी ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को संवेदनशीलता और तत्परता बरतने का आदेश दिया। संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सेवाएँ सुलभ बनाएँ।

सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल, डॉ. जोगेश्वर प्रसाद, सभी एमओआईसी, एसीएमओ, डीपीएम, बीपीएम सहित स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। यह बैठक जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देने वाली साबित होगी।

DM ने साफ कहा – सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुँचे, इसमें कोई ढिलाई न बरती जाए। पारदर्शिता और जवाबदेही मुख्य मंत्र हैं।

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प्रोजेक्ट उल्लास और मिर्गी रोगियों का इलाज

प्रोजेक्ट उल्लास के तहत मिर्गी रोगियों की पहचान और इलाज पर फोकस। DM ने नियमित कैंप लगाने, प्रचार-प्रसार बढ़ाने के निर्देश दिए। जिले में मिर्गी जैसी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को तुरंत राहत मिलेगी। जागरूकता से अधिक रोगी लाभान्वित होंगे।

  1. कैंप आयोजन: नियमित और प्रभावी।
  2. प्रचार: रेडियो, पंपलेट, आशा कार्यकर्ताओं से।
  3. लक्ष्य: सभी मरीजों का समुचित इलाज।

ऐसी पहलें ग्रामीण क्षेत्रों में क्रांति लाएँगी।

डायलिसिस और आईसीयू सुविधाओं पर सख्ती

सदर अस्पताल में 4 और घाटशिला में 3 डायलिसिस मशीनों की समीक्षा। उपायुक्त ने चेतावनी दी – सुविधा कभी ठप न पड़े। मेंटेनेंस को न्यूनतम रखें, मरीजों को निरंतर सेवा दें। आईसीयू की भी जाँच हुई। किडनी रोगियों के लिए यह जीवन रक्षक है।

शिशु मृत्यु दर चिंताजनक स्थिति

घाटशिला अस्पताल के शिशु केयर यूनिट में पिछले साल 11 नवजातों की मौत गंभीर मुद्दा। DM ने कारणों की जड़ तक जाकर सुधार के आदेश दिए। एमओआईसी और सिविल सर्जन को जिम्मेदारी सौंपी। शिशु स्वास्थ्य जिले की प्राथमिकता है। माताओं का विश्वास बहाल होगा।

बच्चों की जान बचाना प्रशासन का कर्तव्य। ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।

कुपोषण उपचार केंद्रों में बेड ऑक्यूपेंसी बढ़ाएँ

बहरागोड़ा, घाटशिला, मुसाबनी, पोटका, टेल्को केंद्रों में जनवरी-फरवरी में बेड खाली। DM ने संवेदनशील स्टाफ तैनात करने, एमटीसी के फायदे बताने, आंगनबाड़ी-आशा से समन्वय के निर्देश दिए। कुपोषण मुक्त भारत का सपना साकार हो। कोई बच्चा भूखा न रहे।

  1. स्टाफ: प्रशिक्षित और सक्रिय।
  2. काउंसलिंग: माता-पिता को जागरूक करें।
  3. समन्वय: महिला-बाल विकास विभाग से।

ग्रामीण बच्चे स्वस्थ होंगे, भविष्य उज्ज्वल बनेगा।

टीकाकरण और संस्थागत प्रसव पर 100% लक्ष्य

टीकाकरण में शत-प्रतिशत कवरेज जरूरी। घर-घर जाकर सत्यापन, वंचितों को प्रेरित करें। जुगसलाई में प्रगति लाएँ। आंगनबाड़ी पर नियमित उपस्थिति। संस्थागत प्रसव में 63 घरेलू प्रसव चिंता का विषय। बोदाम-डुमरिया में केस स्टडी कर समाधान निकालें।

ममता वाहन प्रत्येक पंचायत में। गुड़ाबांड़ा में तुरंत व्यवस्था। मातृ-शिशु मृत्यु रुकेंगी।

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लिंग अनुपात सुधार सख्त कार्रवाई

पटमदा (864) और घाटशिला (867) में लिंग अनुपात सबसे कम। प्रसव पूर्व लिंग जाँच पर शक। अवैध नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड, झोलाछाप डॉक्टरों पर एसडीओ से जाँच कर कार्रवाई। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को बल मिलेगा। समाज में संतुलन आएगा।

मौसमी बीमारियाँ और अन्य अभियान

डेंगू-मलेरिया रोकथाम में फॉगिंग, जागरूकता। वेक्टर बॉर्न डिजीज प्रोग्राम पर निगरानी। कुष्ठ, टीबी उन्मूलन, एनीमिया मुक्त भारत में दूरस्थ क्षेत्रों पर फोकस। गैर-संचारी रोग स्क्रीनिंग बढ़ाएँ। उदासीन कर्मियों पर कार्रवाई।

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DM के निर्देशों का महत्व

DM श्री कर्ण सत्यार्थी का रुख प्रेरणादायक है। स्वास्थ्य सेवाएँ जनता का अधिकार हैं। पारदर्शिता से भ्रष्टाचार रुकेगा। ग्रामीणों को शहरी सुविधाएँ मिलेंगी। जिला स्वास्थ्य सूचकांक ऊपर जाएगा।

  • संवेदनशीलता: कर्मचारियों में जागे।
  • तत्परता: तुरंत कार्रवाई।
  • जवाबदेही: लापरवाही पर सजा।

झारखंड सरकार के लक्ष्य पूरे होंगे।

चुनौतियाँ और समाधान

स्टाफ की कमी, संसाधन सीमित। लेकिन समन्वय से जीत संभव। एनजीओ, पंचायतों को जोड़ें। डिजिटल मॉनिटरिंग अपनाएँ। जन जागरूकता से सहयोग बढ़े।

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DM दी भविष्य की राह स्वस्थ जिला निर्माण

ये निर्देश नींव रखेंगे। मासिक समीक्षा रखें। सफलता के लिए टीम वर्क जरूरी। DM का विजन जिले को मॉडल बनाएगा। नागपुर से सटे इस जिले में स्वास्थ्य क्रांति आएगी।

DM श्री कर्ण सत्यार्थी की स्वास्थ्य विभाग समीक्षा से सेवाओं में क्रांति आएगी। प्रोजेक्ट उल्लास से मिर्गी रोगी, कुपोषण से बच्चे, टीकाकरण से समाज सुरक्षित होगा। लापरवाही दूर, स्वास्थ्य सुलभ बने। जिला स्वस्थ बने, झारखंड गौरवान्वित!

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