
जमशेदपुर से एक बेहतरीन खबर! 23 मार्च 2026 को बेल्डीह क्लब में DRYBEN 2026 का उद्घाटन धूमधाम से हुआ। यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ड्राई बेनिफिशिएशन पर केंद्रित है, जिसे टाटा स्टील ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (IIM) जमशेदपुर चैप्टर के साथ मिलकर आयोजित किया है। उद्योग नेता, विद्वान, शोधकर्ता और तकनीक प्रदाता भारत व विदेश से जुटे। आज हम DRYBEN 2026 की पूरी जानकारी, तकनीकों, स्पीकर्स और महत्व पर विस्तार से बात करेंगे। अगर आप माइनिंग, मिनरल्स या कोल सेक्टर में रुचि रखते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए खास है।

DRYBEN 2026 क्या है? सम्मेलन का उद्देश्य समझिए
DRYBEN 2026 यानी International Conference on Dry Beneficiation। यह खनिजों और कोयले के क्षेत्र में ड्राई बेनिफिशिएशन तकनीकों पर फोकस करता है। पानी की कमी के दौर में ड्राई तरीके से अयस्क शुद्धिकरण महत्वपूर्ण हो गया है। टाटा स्टील ने IIM जमशेदपुर के सहयोग से यह प्लेटफॉर्म बनाया, जहां चर्चा, ज्ञान साझा और नई तकनीकों का विकास होगा।
सम्मेलन में 240 से ज्यादा प्रतिभागी शामिल हैं – इंजीनियर, वैज्ञानिक, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स। उद्घाटन में मुख्य अतिथि थे:
- संदीप कुमार, वीपी रॉ मटेरियल्स, टाटा स्टील
- दीपांकर दासगुप्ता, ईआईसी आईबीएमडी, टाटा स्टील
- अतनु रंजन पाल, सीटीओ प्रोसेस टाटा स्टील व IIM जमशेदपुर चैप्टर चेयरमैन
- वीरेंद्र सिंह, कन्वीनर, DRYBEN 2026
यह आयोजन सस्टेनेबल माइनिंग को बढ़ावा देगा। DRYBEN 2026 जैसे इवेंट्स से भारत की मिनरल इंडस्ट्री मजबूत होगी।

पहले दिन की मुख्य गतिविधियां प्लेनरी और टेक्निकल सेशंस
पहले दिन प्लेनरी सेशन से शुरूआत हुई। यहां एक्सपर्ट्स ने ड्राई बेनिफिशिएशन की चुनौतियों पर बात की। दो टेक्निकल सेशंस में कवर हुए:
- सॉर्टिंग टेक्नोलॉजीज
- कमिन्यूशन (क्रशिंग प्रोसेस)
- ड्राई ग्रेविटी कंसंट्रेशन
एक स्ट्रैटेजिक पैनल डिस्कशन भी हुआ, जहां ड्राई बेनिफिशिएशन की भविष्य की संभावनाओं पर बहस हुई। प्रतिभागियों ने केस स्टडीज शेयर कीं, जैसे टाटा स्टील के प्लांट्स में लागू तकनीकें। DRYBEN 2026 ने नेटवर्किंग का शानदार मौका दिया।
ड्राई बेनिफिशिएशन क्या है? सरल भाषा में समझिए
ड्राई बेनिफिशिएशन में पानी इस्तेमाल किए बिना अयस्क को शुद्ध किया जाता है। पारंपरिक तरीके पानी पर निर्भर हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। ड्राई तरीके:
- इलेक्ट्रोस्टैटिक सेपरेशन
- मैग्नेटिक सेपरेशन
- एयर जिग्स और टेबल्स
यह तकनीक पानी बचाती है, लागत कम करती है। कोयला और आयरन ओर के लिए बेस्ट। भारत जैसे देशों में क्रांति लाएगी।

दूसरे दिन का शेड्यूल एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेशंस
दूसरा दिन और रोमांचक होगा। चार फोकस्ड सेशंस:
- ड्राई ग्रेविटी सेपरेशन में प्रगति
- इलेक्ट्रोस्टैटिक और मैग्नेटिक सेपरेशन
- सहायक तकनीकें – डस्ट एक्सट्रैक्शन, न्यूमैटिक कन्वेयिंग, ड्रायिंग टेक्नोलॉजीज
यहां पेपर्स पेश होंगे, लाइव डेमो और वर्कशॉप्स। DRYBEN 2026 से नई पार्टनरशिप्स बनेंगी। टाटा स्टील जैसे PSUs के लिए गेम चेंजर।
DRYBEN 2026 का महत्व इंडस्ट्री और पर्यावरण के लिए
जमशेदपुर टाटा स्टील का हब है। यह सम्मेलन स्थानीय अर्थव्यवस्था को बूस्ट देगा। ड्राई बेनिफिशिएशन से:
- पानी की बचत (भारत में 70% माइनिंग वाटर पर निर्भर)
- कम वेस्ट, ज्यादा रिकवरी
- सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) से जुड़ाव
विदेशी एक्सपर्ट्स से नॉलेज ट्रांसफर होगा। भविष्य में टाटा स्टील के प्लांट्स में लागू होगा। DRYBEN 2026 मिनरल्स सेक्टर की दिशा बदलेगा।

टाटा स्टील की भूमिका और अन्य पार्टनर्स
टाटा स्टील लीडर है। उनके IBMD (इंटीग्रेटेड बेनिफिशिएशन एंड मिनरल डेवलपमेंट) डिवीजन ने आयोजन किया। IIM ने एकेडमिक सपोर्ट दिया। स्पॉन्सर्स में टेक प्रोवाइडर्स शामिल।
ड्राई बेनिफिशिएशन की चुनौतियां और समाधान
चुनौतियां:
- हाई एनर्जी कंजम्प्शन
- फाइन पार्टिकल्स हैंडलिंग
- स्केल-अप इश्यूज
समाधान: AI-बेस्ड सॉर्टिंग, हाई-इंटेंसिटी मैग्नेट्स। DRYBEN 2026 में ये टॉपिक्स डिस्कस होंगे। भारत को ऑस्ट्रेलिया, चीन से सीखना होगा।
DRYBEN 2026 से नई क्रांति की शुरुआत
दोस्तों, DRYBEN 2026 का सफल उद्घाटन जमशेदपुर के लिए गर्व का विषय है। ड्राई बेनिफिशिएशन जैसी तकनीकें माइनिंग को हरा-भरा बनाएंगी। टाटा स्टील का योगदान सराहनीय। उम्मीद है, इससे भारत आत्मनिर्भर बनेगा। ज्यादा डिटेल्स के लिए चेक करें।
जमशेदपुर में DRYBEN 2026 का सफल उद्घाटन शहर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गया है। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ड्राई बेनिफिशिएशन तकनीक पर केंद्रित है, जो माइनिंग सेक्टर में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखती है। पारंपरिक खनन प्रक्रियाओं में जहां पानी का अत्यधिक उपयोग होता है, वहीं ड्राई बेनिफिशिएशन तकनीक कम पानी या बिना पानी के खनिजों की प्रोसेसिंग को संभव बनाती है। इससे न केवल जल संरक्षण होगा, बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
इस सम्मेलन में देश-विदेश के कई विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए हैं, जो नई तकनीकों, चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस आयोजन के माध्यम से भारत अपनी तकनीकी क्षमता और नवाचार को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत कर रहा है। जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में इस तरह का आयोजन होना, क्षेत्र के विकास और पहचान को भी मजबूत करता है।









