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अंबाला में रिश्वतखोरी का पर्दाफाश, वन्य जीव इंस्पेक्टर और ड्राइवर 30 हजार रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

On: February 27, 2026 3:39 PM
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अंबाला से एक बार फिर सरकारी महकमे में फैली रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। इस बार एंटी करप्शन ब्यूरो ने वन विभाग के एक अधिकारी और उसके ड्राइवर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। दोनों आरोपी एक किसान से कार्रवाई से बचाने के बदले पैसे मांग रहे थे।

एंटी करप्शन ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई

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हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने वन्य जीव इंस्पेक्टर राकेश और उसके ड्राइवर भरत को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए अंबाला सिटी स्थित वन विभाग कार्यालय से गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद पूरी योजना के तहत की गई।

शिकायतकर्ता ने खोली पोल

पूरा मामला सपेहड़ा गांव के भीलपुरा निवासी संदीप कुमार की शिकायत से सामने आया। संदीप का गांव में सुअर पालन का फार्म है। फार्म में सुअरों की खुराक के लिए कच्चा मांस रखा जाता है, जो सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है संदीप का आरोप है कि वन्य जीव इंस्पेक्टर राकेश और ड्राइवर भरत उसके फार्म पर पहुंचे और वहां कच्चा मांस मिलने की बात कहकर उसे डराने लगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी और केस दर्ज कर दिया जाएगा।

कार्रवाई से बचाने के बदले मांगी रिश्वत

संदीप के अनुसार, दोनों आरोपियों ने केस दर्ज न करने और मामले को “रफा-दफा” करने के बदले पहले 50 हजार रुपये की मांग की। संदीप ने जब इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई तो बाद में सौदा 40 हजार रुपये में तय हुआ।

पहले ले चुके थे 10 हजार रुपये

जांच में सामने आया कि आरोपी पहले ही एक किस्त ले चुके थे। बुधवार को संदीप को वन विभाग कार्यालय बुलाया गया, जहां उससे 10 हजार रुपये ले लिए गए। इसके बाद शेष 30 हजार रुपये के लिए गुरुवार को दोबारा बुलाया गया यहीं से एंटी करप्शन ब्यूरो ने जाल बिछाया।

जाल में फंसे आरोपी

गुरुवार दोपहर एसीबी की टीम पहले से ही अलर्ट मोड में थी। शिकायतकर्ता संदीप को आगे किया गया और उसे तय रकम के साथ कार्यालय भेजा गया। कार्यालय में सबसे पहले ड्राइवर भरत ने 30 हजार रुपये लिए।

कुछ देर बाद जैसे ही भरत ने वह रकम वन्य जीव इंस्पेक्टर राकेश को सौंपी, टीम ने तुरंत दबिश देकर दोनों को पकड़ लिया।

केमिकल टेस्ट में हुआ खुलासा

एसीबी टीम ने मौके पर ही नोटों पर लगे केमिकल की जांच की। जब दोनों आरोपियों के हाथ धुलवाए गए तो उनके हाथों का रंग बदल गया, जिससे यह साफ हो गया कि उन्होंने रिश्वत की रकम को छुआ है यह सबूत मिलते ही दोनों आरोपियों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

कोर्ट में पेश, न्यायिक हिरासत

गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने दोनों आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एसीबी अधिकारियों ने बताया कि दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है।

एसीबी इंस्पेक्टर ने क्या कहा

एसीबी इंस्पेक्टर संदीप ने बताया कि शिकायतकर्ता का सुअर फार्म पूरी तरह वैध है। फार्म में सुअरों के लिए कच्चे मांस का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे लेकर आरोपियों ने गलत तरीके से दबाव बनाया उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी अगर अपनी पद का दुरुपयोग कर आम लोगों को डराते हैं और रिश्वत मांगते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एक हफ्ते में दूसरी बड़ी कार्रवाई

यह मामला एसीबी की एक हफ्ते के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 24 फरवरी को एसीबी ने अंबाला में ही 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एक आंगनबाड़ी सुपरवाइजर को गिरफ्तार किया था।

उस मामले में भी शिकायतकर्ता से काम कराने के बदले पैसे मांगे गए थे।

लगातार सामने आ रहे रिश्वत के मामले

अंबाला और आसपास के इलाकों में हाल के दिनों में रिश्वत से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। कभी बैंक से जुड़ा मामला, तो कभी शिक्षा या सामाजिक विभाग से जुड़ी शिकायतें मिल रही हैं इन मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर आम जनता को छोटे-छोटे कामों के लिए भी क्यों रिश्वत देनी पड़ रही है।

लोगों में गुस्सा, लेकिन उम्मीद भी

इस कार्रवाई के बाद आम लोगों में नाराज़गी के साथ-साथ राहत भी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि अगर एंटी करप्शन ब्यूरो इसी तरह सक्रिय रहे, तो भ्रष्टाचार पर लगाम लग सकती स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार लोग डर या मजबूरी में शिकायत नहीं कर पाते, लेकिन संदीप कुमार ने हिम्मत दिखाकर सही कदम उठाया।

एसीबी की अपील

एंटी करप्शन ब्यूरो ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगता है, तो उसकी सूचना तुरंत एसीबी को दें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और हर शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती है

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