नई दिल्ली: ऑल इंडिया जॉइंट एक्स-एन कमेटी ऑफ टीचर्स ऑर्गनाइजेशन के बैनर तले ऑल इंडिया आइडियल टीचर्स एसोसिएशन (AITA) ने गुरुवार को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया। इस प्रदर्शन में देश के कई राज्यों से हजारों की संख्या में शिक्षक और शिक्षा से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। ठंड और लंबी यात्रा की चुनौतियों के बावजूद शिक्षकों के उत्साह और एकजुटता ने इस आंदोलन को खासा प्रभावशाली बना दिया।
धरना-प्रदर्शन में तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, राजस्थान, झारखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और बिहार सहित अनेक राज्यों से शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि पहुंचे। सुबह से ही जंतर-मंतर पर शिक्षकों की भीड़ जुटने लगी और विभिन्न बैनरों व नारों के साथ उन्होंने अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देशभर के शिक्षकों की समस्याओं और अधिकारों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अब तक उनकी कई जायज़ मांगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।
AITA और अन्य शिक्षक संगठनों के नेताओं ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक राष्ट्र के निर्माता होते हैं और आने वाली पीढ़ी का भविष्य उनके हाथों में होता है। इसलिए शिक्षकों के हितों की अनदेखी करना देश के भविष्य के साथ समझौता करने जैसा है। नेताओं ने कहा कि शिक्षक न केवल शिक्षा देते हैं, बल्कि समाज में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और टीम भावना का भी निर्माण करते हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षकों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए।
इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए देशभर के विभिन्न शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई। आयोजकों के अनुसार पिछले एक महीने से इस कार्यक्रम की तैयारी चल रही थी। AITA के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल रहीम, मुख्तार कोतवाल, सैयद अहमद और अन्य पदाधिकारियों ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए लगातार बैठकों और समन्वय का कार्य किया। वहीं AITA के केंद्रीय सचिव एवं इश्यू एड्रेसिंग सेल के कार्यकारी अध्यक्ष खालिद इक़बाल ने पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व किया और शिक्षकों की मांगों को सरकार तक पहुंचाने की बात कही।
खालिद इक़बाल ने अपने संबोधन में कहा कि AITA लंबे समय से शिक्षकों के अधिकारों और समस्याओं को लेकर सरकार के सामने अपनी बात रखता आ रहा है। उन्होंने कहा, “इतनी कड़ाके की ठंड में दूर-दराज़ से लंबा सफर तय कर यहाँ पहुँचे सभी साथियों को मैं दिल से सलाम करता हूँ। यह एकजुटता दिखाती है कि शिक्षक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और उन्हें पाने के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं।” उन्होंने आशा जताई कि सरकार जल्द ही शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक कदम उठाएगी।
धरना-प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश से सजादुल्लाह, रिज़वान अहमद, मोहम्मद सलीम, नोबल हसन, नज़ीर सहित कई शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। मंच से वक्ताओं ने शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं, सुविधाओं और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया तथा सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान अनुशासन और शांति बनाए रखी गई और पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया गया।
इस कार्यक्रम को कई जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन मिला। राज्यसभा और लोकसभा के कुछ सांसदों, विधायकों (MLA) और विधान परिषद सदस्यों (MLC) सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने धरना स्थल पर पहुंचकर शिक्षकों के आंदोलन को समर्थन दिया और उनकी मांगों को जायज़ बताया। नेताओं ने आश्वासन दिया कि वे शिक्षकों की समस्याओं को संबंधित मंचों पर उठाएंगे।
दिनभर चले इस प्रदर्शन ने शिक्षकों की एकजुटता और उनकी मांगों की गंभीरता को उजागर किया। आयोजकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो आगे भी आंदोलन जारी रखा जाएगा। अंत में AITA के पदाधिकारियों ने सभी राज्यों से आए शिक्षकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन ने शिक्षकों की आवाज को एक मजबूत मंच प्रदान किया है और भविष्य में भी यह संघर्ष जारी रहेगा।










