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क्या आप बाजार से खरीद कर खाते हैं – च्यवनप्राश? हाँ, तो आज ही घर पर बनाये देशी च्यवनप्राश।

On: December 6, 2025 9:15 PM
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आयुर्वेद और सेहत: च्यवनप्राश आज लगभग हर घर में जाने‑पहचाने आयुर्वेदिक टॉनिक की तरह इस्तेमाल किया जाता है। यह एक हर्बल लेह्य (जैम जैसा) प्रोडक्ट है, जिसका मुख्य घटक आंवला होता है और इसे रसायन यानी शरीर को भीतर से मजबूत, ऊर्जावान और दीर्घायु बनाने वाला योग माना जाता है।

च्यवनप्राश क्या है?

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आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार च्यवनप्राश ऋषि च्यवन के नाम पर बना एक क्लासिकल फॉर्मूला है, जिसमें दर्जनों जड़ी‑बूटियाँ, घी, तिल का तेल, शहद और चीनी या गुड़ को विशेष प्रक्रिया से मिलाकर गाढ़ा लेह्य तैयार किया जाता है। इसे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता, पाचन, बल, ओज, त्वचा और मानसिक क्षमता सबको एक साथ सपोर्ट करने वाला समग्र टॉनिक माना गया है।

च्यवनप्राश के प्रमुख फायदे

  1. इम्यूनिटी और बार‑बार होने वाले इंफेक्शन में लाभ
    नियमित च्यवनप्राश सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर मानी जाती है, जिससे सर्दी‑जुकाम, गले की खराश, खांसी और मौसम बदलने पर होने वाले सामान्य संक्रमण की आवृत्ति कम हो सकती है। आंवला, गिलोय, पिप्पली और अन्य जड़ी‑बूटियाँ मिलकर एंटीऑक्सीडेंट और इम्यून‑मॉड्यूलेटरी असर देती हैं।
  2. फेफड़ों और श्वसन तंत्र को मजबूती
    च्यवनप्राश को फेफड़ों का पोषक भी माना जाता है। यह कफ को नियंत्रित करने, सांस की नली को साफ रखने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में सहायक बताया गया है, इसलिए पारंपरिक रूप से अस्थमा, एलर्जी प्रवृत्ति और बार‑बार होने वाली खांसी‑सांस की तकलीफ में सपोर्टिव रसायन के रूप में दिया जाता रहा है।
  3. एंटी‑एजिंग और ताकत बढ़ाने वाला रसायन
    इसे रसायन वर्ग में रखा गया है, जिसका उद्देश्य कोशिकाओं की मरम्मत, ऊतकों को पोषण और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करना है। लंबे समय तक नियंत्रित मात्रा में सेवन से शारीरिक थकान कम हो सकती है, स्टैमिना और मांसपेशियों की टोन में सुधार माना जाता है और बुज़ुर्गों में कमजोरी, वजन घटने जैसी शिकायतों में भी लाभकारी बताया जाता है।
  4. पाचन, भूख और मेटाबॉलिज़्म पर असर
    घी, मसाले और जड़ी‑बूटियों के मेल से यह अग्नि (डाइजेस्टिव फायर) को संतुलित कर सकता है। इससे भूख लगना सामान्य हो सकती है, गैस, अपच, कब्ज जैसी दिक्कतें कम हो सकती हैं और भोजन से मिलने वाला पोषण अच्छे से अवशोषित होने लगता है। कमजोर पाचन वाले, बार‑बार बीमार पड़ने वाले बच्चों में इसे बहुत समय से टॉनिक की तरह उपयोग किया जाता रहा है।
  5. मानसिक शक्ति, याददाश्त और तनाव
    कई फॉर्मूलेशन में अश्वगंधा, शतावरी, गुणुची जैसी मेड्या (ब्रेन‑टॉनिक) जड़ी‑बूटियाँ शामिल होती हैं, जो दिमाग और नर्वस सिस्टम को पोषण देती हैं। इससे मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी जैसी समस्याओं में सहायक प्रभाव माना गया है और छात्रों तथा अधिक मानसिक श्रम करने वालों के लिए भी इसे उपयोगी समझा जाता है।
  6. त्वचा, बाल और रक्त शुद्धि
    आंवला और अन्य एंटीऑक्सीडेंट हर्ब्स के कारण च्यवनप्राश रक्त शुद्धि और त्वचा के लिए भी लाभकारी बताया जाता है। इससे त्वचा की रंगत, ग्लो, ड्राईनेस में सुधार और बालों की मजबूती व समय से पहले सफेद होने की प्रवृत्ति पर सकारात्मक असर की पारंपरिक मान्यता है।
  7. हड्डियाँ, दाँत और प्रजनन तंत्र
    आंवला विटामिन C से भरपूर होता है, जो कैल्शियम के बेहतर अवशोषण में मददगार होता है; इस कारण अप्रत्यक्ष रूप से हड्डियों और दाँतों के लिए सहायक माना जाता है। इसके अलावा यह शुक्रधातु और स्त्री‑पुरुष दोनों के प्रजनन तंत्र को पोषण देने वाला योग माना गया है, इसलिए यौन कमजोरी, बांझपन आदि स्थितियों में सहायक रसायन के रूप में भी वर्णित मिलता है।

नोट: डायबिटीज़, गंभीर BP, किडनी‑लिवर की पुरानी बीमारी या कोई रेगुलर दवाई चल रही हो तो च्यवनप्राश की मात्रा और उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेकर ही तय करें।

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च्यवनप्राश की मुख्य सामग्री

क्लासिकल आयुर्वेदिक नुस्खों में च्यवनप्राश में 25 से लेकर 80 तक विभिन्न जड़ी‑बूटियों का वर्णन आता है, लेकिन कुछ बेसिक इंग्रेडिएंट लगभग हर प्रामाणिक फॉर्मूलेशन में समान होते हैं:

  • आंवला (आमलकी) – यह च्यवनप्राश का हृदय है, जो विटामिन C और पॉवरफुल एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है।
  • दशमूल समूह – दस जड़ों का समूह जैसे बिल्व, अग्निमंथ, श्योनाक, पाटला, गम्भारी आदि; ये वात‑कफ संतुलित करने और सूजन कम करने के लिए उपयोग होते हैं।
  • बलवर्धक/रसायन जड़ी‑बूटियाँ – अश्वगंधा, शतावरी, विदारीकंद, शालपर्णी, पृथकपर्णी, गुणुची (गिलोय) आदि, जो ताकत, मांसपेशियों, हड्डियों और प्रजनन तंत्र को पोषण देती हैं।
  • मसाले और सुगंध द्रव्य – पिप्पली, दालचीनी, छोटी इलायची, तेजपत्ता, नागकेसर, केसर आदि, जो स्वाद, सुगंध, पाचन में सुधार और कफ संतुलन के लिए मिलाए जाते हैं।
  • माध्यम (कैरियर) – देसी घी, तिल का तेल, शहद, और चीनी या गुड़; ये जड़ी‑बूटियों के सक्रिय गुणों को घोलकर शरीर के सूक्ष्म चैनलों तक पहुँचाने में मदद करते हैं और च्यवनप्राश को लेह्य की गाढ़ी, स्मूद कंसिस्टेंसी देते हैं।

क्लासिकल स्तर पर तैयार किए गए 10 ग्राम च्यवनप्राश में मुख्य रूप से आंवला का सत्व, हर्बल काढ़ा गाढ़ा होकर मिला हुआ, घी‑तिल तेल, मसाले और थोड़ा‑सा शहद सम्मिलित होता है।

च्यवनप्राश कैसे बनता है? (परंपरागत प्रक्रिया)

अगर फार्मेसी या बड़े स्तर की बात करें, तो इसका निर्माण एक व्यवस्थित फार्मास्युटिकल प्रोसेस जैसा होता है, जिसे सरल भाषा में इस तरह समझ सकते हैं:

  1. हर्बल काढ़ा (क्वाथ) बनाना
    सबसे पहले दशमूल और अन्य काढ़ा‑द्रव्य जड़ी‑बूटियों का मोटा चूर्ण लिया जाता है। इसे पानी में आमतौर पर 1:16 अनुपात से उबालकर 1/4 भाग रहने तक पकाया जाता है। कई पारंपरिक विधियों में आंवलों को कपड़े में बाँधकर इसी उबलते काढ़े में लटकाया जाता है, ताकि काढ़े का रस आंवले में अच्छी तरह समा जाए और आंवला भी धीमी आंच पर पक जाए।
  2. आंवला तैयार करना
    जब काढ़ा तैयार हो जाए तो उसमें से उबले हुए आंवले निकालकर उनके बीज अलग किए जाते हैं। अब आंवले के गूदे को देसी घी (कभी‑कभी थोड़े से तिल के तेल के साथ) में भूनते हैं, जब तक वह नरम, मेश्ड और हल्का‑सा सुनहरा न हो जाए। यही आंवला पल्प आगे चलकर च्यवनप्राश का बेस बनता है।
  3. चीनी/गुड़ का सिरप बनाना
    दूसरी तरफ तैयार हर्बल काढ़े में गरम अवस्था में ही चीनी या गुड़ डालकर घोला जाता है, फिर इसे छानकर साफ सिरप प्राप्त किया जाता है। इस शर्करा‑क्वाथ मिश्रण को मध्यम आंच पर पकाया जाता है, जब तक यह कुछ गाढ़ा, चिपचिपा न हो जाए और तार‑जैसा कंसिस्टेंसी न लेने लगे।
  4. आंवला पेस्ट मिलाना और पकाना
    अब घी में भुना हुआ आंवला पेस्ट इस गाढ़े सिरप में मिलाया जाता है। लगातार चलाते हुए धीमी‑मध्यम आंच पर पकाया जाता है, ताकि मिश्रण तल में चिपके नहीं और समान रूप से गाढ़ा हो। लेह्य की सही अवस्था वह मानी जाती है, जब चम्मच चलाने पर बीच में हल्का‑सा रास्ता बनकर टिके, या मिश्रण को थोड़ा ठंडा करके उंगलियों के बीच लेने पर हल्का‑सा तार बने।
  5. मसालों और शहद का मिश्रण
    आंच बंद कर दी जाती है और जब यह मिश्रण गुनगुना रह जाए (बहुत गरम न हो), तब महीन पिसे हुए मसाले‑द्रव्य जैसे पिप्पली, दालचीनी, इलायची, नागकेसर, केसर आदि मिलाए जाते हैं। अंत में शहद डाला जाता है, क्योंकि शहद को अधिक तापमान पर पकाना आयुर्वेद में मना किया गया है। अच्छी तरह मिला लेने के बाद इसे पूरी तरह ठंडा होने पर स्वच्छ, सूखे, एयर‑टाइट कंटेनर में भर दिया जाता है। तैयार प्रोडक्ट गहरे भूरे‑काले रंग का, सुगंधित, खट्टा‑मीठा, गाढ़ा जैम जैसा होता है।

घर पर साधारण रूप से बनाते समय लोग उपलब्धता के अनुसार जड़ी‑बूटियों की संख्या कम कर देते हैं और बेसिक चीजें जैसे आंवला, घी, गुड़ या चीनी, थोड़े मसाले और शहद से सिंप्लिफाइड च्यवनप्राश तैयार कर लेते हैं। पर यदि इसे चिकित्सीय उपयोग के लिए, क्लिनिक में देने लायक बनाना हो तो शास्त्रीय मात्रा‑अनुपात, क्वालिटी कंट्रोल और स्वच्छता का स्तर बहुत सख्ती से फॉलो करना ज़रूरी है।

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सेवन का सही तरीका

  • सामान्य तौर पर वयस्कों के लिए 1–2 चम्मच दिन में एक या दो बार, और बच्चों के लिए लगभग आधी मात्रा का उल्लेख मिलता है; लेकिन सटीक डोज उम्र, प्रकृति, मौसम और स्वास्थ्य‑स्थिति के अनुसार वैद्य ही तय करे तो बेहतर है।
  • इसे प्रायः सुबह खाली पेट या नाश्ते के साथ लिया जाता है, या फिर गुनगुने दूध/पानी के साथ दिया जाता है। ठंड के मौसम में इसका असर और भी सुखद माना जाता है, क्योंकि यह भीतर से गर्माहट व ताकत देता है।
  • जिनको डायबिटीज़ है उन्हें शुगर‑फ्री या कम शक्कर वाले वैरिएंट की भी सलाह दी जाती है, वह भी डॉक्टर की राय के बाद, क्योंकि पारंपरिक च्यवनप्राश में चीनी/गुड़ मात्रा में होते हैं।

आप यदि इस पर आर्टिकल लिखना चाहें तो ऊपर की जानकारी को हेडिंग‑सबहेडिंग के साथ थोड़ा और स्टोरी‑स्टाइल इंट्रो, निष्कर्ष और उपयोगकर्ता अनुभव (टेस्टिमोनियल, वैद्य की राय आदि) जोड़कर आसानी से 800–1200 शब्द का SEO‑फ्रेंडली ब्लॉग बना सकते हैं।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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