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औरत कोई वस्तु नहीं है और न ही वह कोई गुलाम ही है, जिसे कहीं भी, कोई भी मनमर्जी इस्तेमाल करे। न ही उसे मजबूर किया जा सकता है की वह किसके साथ रहे और कहाँ रहें?

On: March 3, 2021 5:45 PM
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THE NEWS FRAME

सा ही एक केस सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया है जिसमें एक व्यक्ति ने याचिका दायर की है कि उसकी पत्नी को फिर से उसके साथ रहने का आदेश दिया जाए।

जी हां दोस्तों यह मामला उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले का है।  

आपको बता दें कि महिला ने यह दावा किया था कि उसे उसके पति ने दहेज के लिए प्रताड़ित किया और  उससे दूर रहने लगा था।  वर्ष 2015 में महिला ने अपने रखरखाव के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। परिवारिक अदालत ने पति को हर महीने 20,000 रुपये का भुगतान महिला को जीवनयापन के लिए देने का आदेश दिया। जिसके बाद उस व्यक्ति ने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।  संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए उसने अदालत में संपर्क कर यह जानने की कोशिश कि, की यदि वह महिला के साथ रहने के लिए तैयार हो जाता हैं तो क्या जीवनयापन के लिए उसे भुगतान करने की आवश्यकता होगी ? 

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मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय का है जिसे अस्वीकार कर दिया गया ।  

इसके बाद व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की, जिसमें वह चाहता है कि कोर्ट यह फैसला दे कि महिला उसके साथ दुबारा से रहने के लिए तैयार हो जाये।

महिला के वकील अनुपम मिश्रा ने अदालत को कहा कि उसके पति का यह खेल केवल भुगतान देने से बचने के लिए है। पति के वकील ने कहा कि अदालत को महिला को अपने पति के पास वापस जाने के लिए कहना चाहिए क्योंकि पारिवारिक अदालत ने उसके पक्ष में फैसला सुनाया था।  

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लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय का आदेश अभी भी लंबित है।

जस्टिस संजय किशन कौल और हेमंत गुप्ता की बेंच ने कहा- ‘आपको क्या लगता है?  क्या एक महिला एक चैटटेल है जो हम इस तरह के आदेश को पारित कर सकते हैं?  क्या एक पत्नी एक चैटटेल है जिसे वह आपके साथ जाने के लिए निर्देशित कर सकती है? आप हमें इसके लिए एक आदेश पारित करने के लिए कह रहे हैं जैसे कि उसे एक जगह पर भेजा जा सकता है । 

आप इस बारे में क्या विचार रखते हैं। क्या एक महिला एक वस्तु है या किसी की जागीर है? जिसे जब मन चाहा रखा और जब मन चाहा दूर कर दिया। अपना जवाब हमें कमेंट में जरूर दे।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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