रांची | पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत आज रांची स्थित राज्य सैनिक कल्याण निदेशालय में “वीर परिवार सहायता योजना” को लेकर एक राज्य स्तरीय बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में पूर्वी सिंहभूम जिला समेत राज्य के अन्य हिस्सों से आए पूर्व सैनिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
योजना का उद्देश्य: पूर्व सैनिक परिवारों को कानूनी सहायता
बैठक की अध्यक्षता राज्य सैनिक कल्याण निदेशक ब्रिगेडियर निरंजन कुमार ने की। इस दौरान उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की NALSA वीर परिवार सहायता योजना 2025 को 26 जुलाई 2025 (कारगिल विजय दिवस) के दिन देशभर में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों को न्यायिक एवं कानूनी मामलों में मदद प्रदान करना है। इसके लिए राष्ट्रीय (NALSA), राज्य (JHALSA) और जिला स्तर (DALSA) पर पूर्व सैनिक प्रतिनिधियों की नियुक्ति की जाएगी।
कानूनी जानकारी रखने वाले पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता
बैठक में बताया गया कि जो पूर्व सैनिक कानून की पढ़ाई (LLB) कर चुके हैं या इस क्षेत्र में दक्ष हैं, उन्हें इस योजना में प्राथमिकता दी जाएगी। उन्हें पूर्व सैनिक परिवारों को नि:शुल्क कानूनी सलाह देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
पूर्वी सिंहभूम से सक्रिय भागीदारी
पूर्वी सिंहभूम से वेटरन सुशील कुमार सिंह, डॉ. कमल शुक्ला, हंसराज सिंह और मिथिलेश सिंह (मानगो) इस बैठक में प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए। बैठक में सूबेदार मेजर योगेंद्र प्रसाद, एमपी सिन्हा, अनिरुद्ध सिंह, मनोज कुमार, विष्णु महतो, विष्णु साहू और अन्य वरिष्ठ पूर्व सैनिकों की भी भागीदारी रही।
नामांकन की अपील
जो भी पूर्व सैनिक इस योजना में कानूनी सेवा देने के इच्छुक हैं, वे अपने नाम पूर्व नौसैनिक सुशील कुमार सिंह (मो. 7004092028) या पूर्व वायुसेना कर्मी डॉ. कमल शुक्ला (मो. 7992306919) को भेज सकते हैं।
कारगिल विजय दिवस को लेकर विशेष आग्रह
26 जुलाई को प्रस्तावित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कार्यक्रम को लेकर निदेशक महोदय ने राज्य के सभी पूर्व सैनिक प्रतिनिधियों से इसमें शामिल होने की अपील की है, ताकि यह योजना जनजन तक पहुंचे और इसका लाभ अधिक से अधिक वीर परिवारों को मिल सके।
“वीर परिवार सहायता योजना” पूर्व सैनिकों के लिए सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि सम्मान और समर्थन की प्रतीक बन सकती है। यह पहल न केवल सैन्य परिवारों को न्याय दिलाने में सहायक होगी, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत भी बनेगी।









