
जमशेदपुर: नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय, जमशेदपुर में डॉ. Bhimrao अंबेडकर जयंती के अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा 13 एवं 14 अप्रैल 2026 को एक प्रेरणादायी और सफल दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केवल औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक समावेशन, समानता, न्याय और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता को मजबूत करना था। आज के समय में जब समाज के सामने बराबरी, अधिकार और जिम्मेदारी जैसे सवाल पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं, तब डॉ. Bhimrao अंबेडकर के विचारों को समझना और अपनाना और भी आवश्यक हो जाता है।

विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों और पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। पहले दिन आयोजित प्रतियोगिताओं ने जहां छात्रों की रचनात्मकता और वैचारिक समझ को सामने लाया, वहीं दूसरे दिन आयोजित व्याख्यान सत्र ने बाबासाहेब के विचारों की प्रासंगिकता को नई दृष्टि के साथ प्रस्तुत किया। कुल मिलाकर यह आयोजन ज्ञान, संवाद और प्रेरणा का एक सुंदर संगम बन गया।
डॉ. Bhimrao अंबेडकर जयंती का महत्व
डॉ. Bhimrao अंबेडकर भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकारों में से एक थे। वे केवल एक महान विधिवेत्ता या अर्थशास्त्री नहीं थे, बल्कि सामाजिक न्याय के सबसे बड़े पैरोकार भी थे। उन्होंने समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया।
डॉ. Bhimrao अंबेडकर जयंती हमें यह याद दिलाती है कि समानता केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक जीवन मूल्य है। उनका जीवन हमें शिक्षा, संघर्ष, आत्मसम्मान और अधिकारों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है। यही कारण है कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में Bhimrao अंबेडकर जयंती का आयोजन विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे कार्यक्रम न केवल जानकारी देते हैं, बल्कि सोचने की नई दिशा भी दिखाते हैं।
पहले दिन हुई प्रतियोगिताएं
कार्यक्रम के प्रथम दिन, 13 अप्रैल 2026 को, राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा दो प्रमुख प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया—वाद-विवाद प्रतियोगिता और पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता। इन दोनों प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय सामाजिक न्याय, समानता और संविधान से जुड़े मुद्दों पर आधारित रहा। छात्रों ने अपने विचारों को तार्किक ढंग से प्रस्तुत किया और डॉ. Bhimrao अंबेडकर के विचारों को समकालीन संदर्भों से जोड़कर समझाने का प्रयास किया। यह देखकर स्पष्ट था कि युवा पीढ़ी सामाजिक मुद्दों के प्रति पहले से अधिक जागरूक हो रही है।
वाद-विवाद प्रतियोगिता में बीटेक के छात्र तौहीद खान ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। पायल शीत द्वितीय स्थान पर रहीं, जबकि जीगिशा कुमारी ने तृतीय स्थान हासिल किया। प्रतिभागियों ने विषय की गहराई को समझते हुए अपने तर्क रखे, जिससे यह प्रतियोगिता अत्यंत रोचक बन गई।
इसी दिन आयोजित पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में भी विद्यार्थियों ने अपनी कला और विचारशीलता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में विभा महतो ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि जीगिशा कुमारी ने द्वितीय स्थान हासिल किया। पोस्टरों में सामाजिक समानता, संविधान, शिक्षा और अधिकार जैसे विषयों की झलक देखने को मिली। यह साफ दिखा कि छात्र सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रश्नों को रचनात्मक तरीके से अभिव्यक्त करना भी जानते हैं।
दूसरे दिन का मुख्य व्याख्यान
14 अप्रैल 2026 को कार्यक्रम के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में स्वावलंबी झारखंड मिक्रोवेल्फेयर डेवेलपमेंट सेंटर के प्रबंधक निदेशक मनोज कुमार सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने एक प्रभावशाली और विचारोत्तेजक व्याख्यान प्रस्तुत किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि डॉ. Bhimrao अंबेडकर के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने स्वतंत्रता के समय थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि समानता, न्याय और अधिकारों के प्रति सजग रहना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, युवाओं को बाबासाहेब के विचारों को केवल सुनना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। यह बात खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज के समाज में कई बार अधिकारों की जानकारी होते हुए भी लोग उनका सही उपयोग नहीं कर पाते।
मनोज कुमार सिंह के व्याख्यान ने विद्यार्थियों को न केवल प्रेरित किया, बल्कि उन्हें यह सोचने पर भी मजबूर किया कि सामाजिक बदलाव केवल नारों से नहीं, बल्कि व्यवहारिक जागरूकता से आता है।
कुलाधिपति का संदेश
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. Bhimrao अंबेडकर ने भारतीय समाज को एक नई दिशा दी। उनका जीवन संघर्ष, शिक्षा और सामाजिक न्याय का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में समावेशिता लाने के लिए हमें निरंतर प्रयास करना होगा।
उनके संदेश का भाव यह था कि Bhimrao अंबेडकर के विचार किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक हैं। जब तक समाज के हर व्यक्ति को समान अवसर नहीं मिलते, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं है। यह दृष्टिकोण आज के शैक्षणिक परिवेश में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है।
कुलपति का प्रेरक संबोधन
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि ने अपने संबोधन में कहा कि Bhimrao अंबेडकर जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन का समय भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे संविधान के मूल्यों को समझें और उन्हें व्यवहार में उतारें।
उनके अनुसार, राष्ट्र का समग्र विकास तभी संभव है जब युवा पीढ़ी समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय जैसे संवैधानिक मूल्यों को अपने आचरण में शामिल करे। यह बात इसलिए अहम है क्योंकि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि एक नैतिक और सामाजिक दिशा भी देता है। विद्यार्थियों के लिए यह संदेश विशेष रूप से प्रेरणादायी रहा।
अन्य वक्ताओं की भूमिका
कार्यक्रम को विश्वविद्यालय के कुलसचिव नागेंद्र सिंह और प्रशासनिक विभाग के अधिष्ठाता प्रो. नाजिम खान ने भी संबोधित किया। अपने वक्तव्यों में उन्होंने वर्तमान समय में बाबासाहेब के विचारों और कार्य-पद्धतियों की आवश्यकता को रेखांकित किया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज भी समाज में कई चुनौतियाँ मौजूद हैं, जिनसे निपटने के लिए डॉ. Bhimrao अंबेडकर के आदर्श मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। शिक्षा, बराबरी, अवसर और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे आज भी उतने ही अहम हैं जितने पहले थे। उनके विचारों ने कार्यक्रम को और अधिक गहराई प्रदान की।
विद्यार्थियों की भागीदारी और आयोजन की सफलता
यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के शहीद भगत सिंह ब्लॉक स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी, संकाय सदस्य और विश्वविद्यालय पदाधिकारी मौजूद रहे। विद्यार्थियों की उत्साही भागीदारी ने यह साबित किया कि युवा वर्ग ऐसे आयोजनों को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सीखने के अवसर के रूप में देखता है।
कार्यक्रम के दौरान सभी विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इससे प्रतिभागियों का उत्साह और बढ़ गया। ऐसे सम्मान विद्यार्थियों को भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही यह संदेश भी जाता है कि विश्वविद्यालय प्रतिभा को पहचानता है और उसका सम्मान करता है।
राजनीति विज्ञान विभाग की पहल
राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा किया गया यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि शैक्षणिक संस्थान सामाजिक चेतना के केंद्र भी हो सकते हैं। विभाग ने इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी, बल्कि विद्यार्थियों को उनके विचारों से भी जोड़ा।
आज जब शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनना भी है, तब इस तरह के आयोजन अत्यंत उपयोगी साबित होते हैं। वाद-विवाद, पोस्टर निर्माण और व्याख्यान जैसे कार्यक्रम छात्रों के बौद्धिक और रचनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. Bhimrao अंबेडकर के विचार आज क्यों जरूरी हैं
डॉ. Bhimrao अंबेडकर के विचार आज भी इसलिए प्रासंगिक हैं क्योंकि वे केवल एक युग की जरूरत नहीं थे, बल्कि हर युग के लिए आवश्यक हैं। उनकी सोच हमें यह सिखाती है कि:
- हर व्यक्ति को समान सम्मान मिलना चाहिए।
- शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा साधन है।
- अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन भी जरूरी है।
- वंचित वर्गों के उत्थान के बिना समाज का संतुलित विकास संभव नहीं है।
यह सब बातें आज के युवाओं के लिए खास महत्व रखती हैं। अगर विद्यार्थी इन्हें समझ लें, तो वे न सिर्फ अपने जीवन में आगे बढ़ेंगे, बल्कि समाज को भी बेहतर दिशा देंगे।
नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में आयोजित डॉ. Bhimrao अंबेडकर जयंती पर दो दिवसीय कार्यक्रम वास्तव में एक सफल, सार्थक और प्रेरणादायी आयोजन रहा। इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को डॉ. अंबेडकर के विचारों, संविधान की भावना और सामाजिक न्याय के महत्व से जोड़ा। डॉ. Bhimrao अंबेडकर जयंती जैसे अवसर हमें यह याद दिलाते हैं कि समानता, शिक्षा और न्याय के बिना एक मजबूत राष्ट्र की कल्पना अधूरी है।
ऐसे आयोजन न केवल अतीत को याद करते हैं, बल्कि भविष्य की दिशा भी तय करते हैं। जब विद्यार्थी बाबासाहेब Bhimrao के आदर्शों को समझकर जीवन में अपनाएंगे, तभी एक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव होगा।











