– ईरान-इज़राइल-अमेरिका विवाद का असर, बाजार में अनिश्चितता
Oil Crisis | New Delhi
मध्य पूर्व में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें अभी 156 डॉलर प्रति बैरल तक नहीं पहुंची हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने आने वाले समय में बड़े उछाल की आशंका जरूर बढ़ा दी है।
फरवरी 2026 से शुरू हुए इस भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग 83 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। यह पिछले स्तर से करीब 20 डॉलर की बढ़ोतरी को दर्शाता है।
भारत में राहत, लेकिन खतरा बरकरार
भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। आम लोगों को अभी तक सीधा असर नहीं दिख रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संकट लंबा चलता है, तो कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट (मार्च 2026)
| शहर/राज्य | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | 94.77 | 87.67 |
| मुंबई | 103.50 | 90.03 |
| कोलकाता | 105.41 | 92.02 |
| चेन्नई | 100.93 | 92.48 |
| आंध्र प्रदेश | 109.68 | 97.49 |
| बिहार (पटना) | ~105 | ~92 |
| झारखंड (रांची/जमशेदपुर) | ~98–100 | ~91–93 |
नोट: स्थानीय टैक्स के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर संभव है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे संकट में सबसे अहम भूमिका होर्मुज जलडमरूमध्य की है। दुनिया का बड़ा हिस्सा यहीं से तेल सप्लाई करता है। अगर यहां कोई रुकावट आती है, तो तेल की कीमतें अचानक तेज़ी से बढ़ सकती हैं।
हालांकि हाल ही में अमेरिका-ईरान वार्ता की खबरों से कीमतों में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई है, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।
भारत पर असर: हर 1 डॉलर बढ़ोतरी भारी
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हर 1 डॉलर की वृद्धि देश पर करीब 16,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डालती है।
अगर यह बढ़ोतरी जारी रहती है, तो—
- पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे
- ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी
- खाने-पीने की चीजें महंगी होंगी
- महंगाई दर में उछाल आएगा
LPG सिलेंडर पर क्या असर?
घरेलू गैस की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं—
- घरेलू सिलेंडर (14.2 किग्रा): ₹800–1000
- कमर्शियल सिलेंडर (19 किग्रा): ₹1700–1800
हालांकि तेल संकट का सीधा असर LPG पर कम होता है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से महंगाई बढ़ सकती है।
सरकार की तैयारी और रणनीति
भारत सरकार के पास करीब 50 दिनों का तेल भंडार (रिजर्व स्टॉक) मौजूद है, जिससे तत्काल संकट को संभाला जा सकता है। साथ ही भारत रूस और वेनेजुएला जैसे देशों से सस्ता तेल आयात बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहा है, ताकि आम लोगों पर असर कम हो।
आगे क्या होगा?
OPEC+ देशों ने फिलहाल उत्पादन स्थिर रखा है, जिससे बाजार को थोड़ी राहत मिली है। लेकिन अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
अभी राहत, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत
फिलहाल भारत में पेट्रोल और गैस की कीमतें स्थिर हैं, जो आम लोगों के लिए राहत की बात है। लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए यह राहत ज्यादा समय तक रहेगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है।











