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Oil Crisis की आहट: वैश्विक तनाव से बढ़ी चिंता, भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर

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On: March 20, 2026 5:35 PM
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ईरान-इज़राइल-अमेरिका विवाद का असर, बाजार में अनिश्चितता

Oil Crisis | New Delhi

मध्य पूर्व में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें अभी 156 डॉलर प्रति बैरल तक नहीं पहुंची हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने आने वाले समय में बड़े उछाल की आशंका जरूर बढ़ा दी है।

फरवरी 2026 से शुरू हुए इस भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग 83 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। यह पिछले स्तर से करीब 20 डॉलर की बढ़ोतरी को दर्शाता है।

भारत में राहत, लेकिन खतरा बरकरार

भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। आम लोगों को अभी तक सीधा असर नहीं दिख रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संकट लंबा चलता है, तो कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।

देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट (मार्च 2026)

शहर/राज्यपेट्रोल (₹/लीटर)डीजल (₹/लीटर)
नई दिल्ली94.7787.67
मुंबई103.5090.03
कोलकाता105.4192.02
चेन्नई100.9392.48
आंध्र प्रदेश109.6897.49
बिहार (पटना)~105~92
झारखंड (रांची/जमशेदपुर)~98–100~91–93

नोट: स्थानीय टैक्स के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर संभव है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा जोखिम

विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे संकट में सबसे अहम भूमिका होर्मुज जलडमरूमध्य की है। दुनिया का बड़ा हिस्सा यहीं से तेल सप्लाई करता है। अगर यहां कोई रुकावट आती है, तो तेल की कीमतें अचानक तेज़ी से बढ़ सकती हैं।

हालांकि हाल ही में अमेरिका-ईरान वार्ता की खबरों से कीमतों में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई है, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।

भारत पर असर: हर 1 डॉलर बढ़ोतरी भारी

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हर 1 डॉलर की वृद्धि देश पर करीब 16,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डालती है।

अगर यह बढ़ोतरी जारी रहती है, तो—

  • पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे
  • ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी
  • खाने-पीने की चीजें महंगी होंगी
  • महंगाई दर में उछाल आएगा

LPG सिलेंडर पर क्या असर?

घरेलू गैस की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं—

  • घरेलू सिलेंडर (14.2 किग्रा): ₹800–1000
  • कमर्शियल सिलेंडर (19 किग्रा): ₹1700–1800

हालांकि तेल संकट का सीधा असर LPG पर कम होता है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से महंगाई बढ़ सकती है।

सरकार की तैयारी और रणनीति

भारत सरकार के पास करीब 50 दिनों का तेल भंडार (रिजर्व स्टॉक) मौजूद है, जिससे तत्काल संकट को संभाला जा सकता है। साथ ही भारत रूस और वेनेजुएला जैसे देशों से सस्ता तेल आयात बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहा है, ताकि आम लोगों पर असर कम हो।

आगे क्या होगा?

OPEC+ देशों ने फिलहाल उत्पादन स्थिर रखा है, जिससे बाजार को थोड़ी राहत मिली है। लेकिन अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

अभी राहत, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत

फिलहाल भारत में पेट्रोल और गैस की कीमतें स्थिर हैं, जो आम लोगों के लिए राहत की बात है। लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए यह राहत ज्यादा समय तक रहेगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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