जमशेदपुर | 18 मार्च 2026
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने झारखंड विधानसभा में उनके गैर-सरकारी विधेयक “झारखंड भू विरासत (जीवाश्म) विधेयक 2026” को सदन में पुरःस्थापित नहीं किए जाने पर गहरी निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के अंतिम दिन तक उन्हें उम्मीद थी कि यह विधेयक सदन के पटल पर रखा जाएगा, लेकिन बुधवार को सत्र के समापन तक ऐसा नहीं हो सका।
सरयू राय ने कहा कि यह विषय राज्य की महत्वपूर्ण प्राकृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है और इसके संरक्षण के लिए कानून बनना जरूरी है।
विधानसभाध्यक्ष को लिखे दो पत्र
इस मामले को लेकर विधायक सरयू राय ने विधानसभाध्यक्ष को दो अलग-अलग पत्र भी लिखे थे।
- पहला पत्र 20 जनवरी 2026 को लिखा गया था।
- दूसरा पत्र 13 मार्च 2026 को भेजा गया था।
पहले पत्र में उन्होंने अपने गैर-सरकारी विधेयक “झारखंड भू विरासत (जीवाश्म) विधेयक 2026” को सदन में पुरःस्थापित करने की सूचना दी थी और इसे सदन के पटल पर रखने का अनुरोध किया था।
वहीं 13 मार्च को लिखे गए पत्र में उन्होंने संसदीय प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि “कौल एंड शकधर की संसदीय पद्धति और प्रक्रिया” पुस्तक के ‘विधान’ खंड में गैर-सरकारी विधेयक को पुरःस्थापित करने की प्रक्रिया का स्पष्ट विवरण दिया गया है।
उन्होंने लिखा कि संसदीय परंपरा के अनुसार इस विषय में अब तक निर्णय हो जाना चाहिए था, लेकिन डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस संबंध में आसन की ओर से कोई ठोस सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
पंचम (बजट) सत्र में अनुमति की थी अपेक्षा
13 मार्च को लिखे पत्र में सरयू राय ने यह भी कहा था कि उनकी अपेक्षा है कि उनके इस गैर-सरकारी विधेयक को षष्ठम झारखंड विधानसभा के पंचम (बजट) सत्र में पुरःस्थापित करने की अनुमति दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि सदन के सदस्य के रूप में ऐसी अपेक्षा करना उनका अधिकार है और संसदीय पद्धति व प्रक्रिया के अनुसार इस अधिकार का संरक्षण विधानसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाना चाहिए। हालांकि इस संदर्भ में निर्णय में हो रही देरी को उन्होंने अप्रत्याशित और निराशाजनक बताया।
जीवाश्म संरक्षण के लिए कानून की मांग
सरयू राय ने अपने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया था कि झारखंड के कई जिलों में दुर्लभ श्रेणी के जीवाश्म पाए जा रहे हैं, जो राज्य की महत्वपूर्ण भू-विरासत हैं।
विशेष रूप से राजमहल की पहाड़ियों में कई स्थानों पर बड़ी मात्रा में जीवाश्म मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा साहेबगंज जिले में राज्य सरकार द्वारा एक जीवाश्म पार्क भी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इन दुर्लभ जीवाश्मों पर मानव जनित गतिविधियों के कारण खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए राज्य में कोई स्पष्ट कानून नहीं है, जबकि इसके लिए ठोस कानूनी प्रावधान बनाना बेहद आवश्यक है।
सरयू राय का मानना है कि झारखंड की भू-विरासत और जीवाश्मों का संरक्षण केवल वैज्ञानिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यटन और शोध के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इस विषय पर विधेयक लाकर स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाना समय की आवश्यकता है।उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और राज्य की इस अनमोल प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।













