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Lenscart का बिंदी-तिलक विवाद धार्मिक संवेदनशीलता और ब्रांड इमेज पर बड़ा असर

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On: April 20, 2026 8:51 PM
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Lenscart controversy: देश की बड़ी आईवियर ​कंपनी में से एक Lenscart को बिंदी, तिलक से जुड़ा विवाद काफी महंगा पड़ गया। सोमवार को कंपनी के शेयर में बड़ी गिरावट आई है, जिससे इसकी मार्केट वैल्यूएशन में करीब 4,500 करोड़ रुपए की कमी आ गई।
विवाद की वजह कंपनी की एक पुरानी इंटरनल ग्रूमिंग पॉलिसी बनी, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस पॉलिसी में कथित तौर पर कर्मचारियों को बिंदी, तिलक जैसे कुछ धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोकने की बात कही गई थी। इसके बाद ऑनलाइन विरोध तेज हो गया और कंपनी के बहिष्कार की मांग भी उठने लगी।
हिजाब को अनुमति, बिंदी-तिलक पर रोक लगा

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धार्मिक भेदभाव में फंसी Lenscart पीयूष बंसल ने दी सफाईशेयर में गिरावट

BSE पर कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 5% तक गिरकर 508.70 रुपए के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई और यह 533.70 रुपए के आसपास बंद हुआ।
गिरावट के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन घटकर लगभग 88,331 करोड़ रुपए रह गई, जो पहले करीब 92,872 करोड़ रुपए थी यानी एक ही सत्र में करीब 4,540 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बाद में आंशिक सुधार के साथ वैल्यूएशन में कुछ बढ़त भी दर्ज की गई।

कंपनि ने दी थी सफाई
इस विवाद पर कंपनी के फाउंडर Peyush Bansal ने सफाई देते हुए कहा कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है और मौजूदा पॉलिसी को नहीं दर्शाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी में किसी भी धार्मिक पहनावे या प्रतीकों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और इस गलतफहमी के लिए माफी भी मांगी। इसपर 1000 शब्दों में एक लेख तैयार करें

Lenscart का बिंदी-तिलक विवाद धार्मिक संवेदनशीलता और ब्रांड इमेज पर बड़ा असर

भारत की प्रमुख आईवियर कंपनी Lenscart इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। कंपनी की कथित पुरानी ग्रूमिंग पॉलिसी, जिसमें बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक का जिक्र था, सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इससे न सिर्फ ऑनलाइन बहिष्कार की मांग उठी, बल्कि सोमवार को कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट भी दर्ज की गई। BSE पर कारोबार के दौरान शेयर 5% तक लुढ़ककर 508.70 रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जिससे कंपनी की मार्केट वैल्यूएशन में करीब 4,500 करोड़ रुपये की कमी आ गई। हालांकि, बाद में कुछ रिकवरी हुई और शेयर 533.70 रुपये के आसपास बंद हुआ। यह घटना न केवल Lenscart के लिए सबक है, बल्कि कॉर्पोरेट जगत को धार्मिक संवेदनशीलता की अहमियत सिखाती है।

विवाद की शुरुआत वायरल पॉलिसी ने मचाया हंगामा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक पुराना इंटरनल डॉक्यूमेंट वायरल हुआ, जिसमें Lenscart की ग्रूमिंग पॉलिसी का जिक्र था। इस पॉलिसी में कर्मचारियों को कार्यस्थल पर बिंदी, तिलक, मंगलसूत्र या अन्य धार्मिक प्रतीकों से परहेज करने की सलाह दी गई थी। इसके विपरीत, हिजाब या बुर्का जैसे मुस्लिम पहनावे को अनुमति बताई गई। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे हिंदू धार्मिक भावनाओं का अपमान करार दिया। ट्विटर (अब X) और इंस्टाग्राम पर #BoycottLenskart ट्रेंड करने लगा। कई यूजर्स ने पोस्ट शेयर करते हुए कहा, “हिजाब को ठीक, बिंदी को गलत? यह धार्मिक भेदभाव है।”

विवाद तेजी से फैला क्योंकि भारत में धार्मिक प्रतीक हिंदू संस्कृति का अभिन्न हिस्सा माने जाते हैं। बिंदी को शुभता और तिलक को आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है। रामायण-महाभारत से लेकर आधुनिक बॉलीवुड तक, ये प्रतीक भारतीय नारीत्व और परंपरा के प्रतीक हैं। Lenscart जैसी कंपनी, जो मुख्य रूप से भारतीय बाजार पर निर्भर है, के लिए यह गलती महंगी साबित हुई। वायरल डॉक्यूमेंट में साफ लिखा था कि “धार्मिक प्रतीकों से बचें, ताकि प्रोफेशनल लुक बने।” लेकिन हिजाब पर छूट ने इसे असमान करार दिया गया।

शेयर मार्केट पर तगड़ा झटका: 4,500 करोड़ का नुकसान

सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को BSE पर Lenscart के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। सुबह के सत्र में ही शेयर 5% गिरकर 508.70 रुपये पर ट्रेड हुआ। कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन पहले 92,872 करोड़ रुपये थी, जो घटकर 88,331 करोड़ रुपये रह गई। यानी एक ही दिन में 4,540 करोड़ रुपये का नुकसान। एनएसई पर भी इसी तरह की गिरावट दर्ज हुई। निवेशकों को डर था कि बॉयकॉट कैंपेन से कंपनी की सेल्स प्रभावित होगी।

Lenscart , जो 2022 में IPO के जरिए लिस्ट हुई, ने तेजी से ग्रोथ की है। इसके 2,000 से ज्यादा स्टोर्स हैं और ऑनलाइन सेल्स में दबदबा है। लेकिन यह विवाद ब्रांड वैल्यू को चोट पहुंचा सकता है। एनालिस्ट्स का कहना है कि छोटे विवाद भी लंबे समय तक असर छोड़ते हैं, खासकर जब सोशल मीडिया इंस्टेंट जजमेंट देता है। दोपहर बाद कुछ रिकवरी हुई, लेकिन वैल्यूएशन में अभी भी 4,000 करोड़ से ज्यादा की कमी बनी रही। यह घटना दिखाती है कि डिजिटल युग में कॉर्पोरेट पॉलिसी कितनी जल्दी वायरल हो सकती है।

Peyush Bansal की सफाई: पुरानी पॉलिसी का हवाला

विवाद बढ़ते ही Lenscart के फाउंडर और CEO पियूष बंसल ने सोशल मीडिया पर सफाई दी। उन्होंने कहा, “वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है और हमारी मौजूदा पॉलिसी को नहीं दर्शाता। Lenscart में किसी भी धर्म के पहनावे या प्रतीकों पर कोई रोक नहीं है। हमारी पॉलिसी समावेशी है और सभी कर्मचारियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने की आजादी है।” बंसल ने गलतफहमी के लिए माफी मांगी और कहा कि कंपनी भारत की विविधता का सम्मान करती है।

उनके इस बयान पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ यूजर्स ने इसे स्वीकार किया, लेकिन कई ने सवाल उठाए कि पुरानी पॉलिसी क्यों बनी? क्या यह वेस्टर्न कल्चर की नकल थी? बंसल ने आगे कहा, “हमारे 20,000 से ज्यादा कर्मचारी हैं, और हम उनकी भावनाओं का ख्याल रखते हैं।” यह सफाई शेयर रिकवरी में मददगार साबित हुई, लेकिन ब्रांड ट्रस्ट को बहाल करने में समय लगेगा।

धार्मिक भेदभाव का आरोप: हिजाब vs बिंदी बहस

विवाद का केंद्र बिंदु ग्रूमिंग पॉलिसी की कथित असमानता था। पॉलिसी में हिजाब को “कल्चरल अटायर” मानकर अनुमति दी गई, जबकि बिंदी-तिलक को “धार्मिक” बताकर रोका गया। आलोचकों ने इसे “सेलेक्टिव सेकुलरिज्म” कहा। भारत में हिजाब विवाद (कर्नाटक हाईकोर्ट केस) अभी ताजा है, जहां मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पर बहस हुई। Lenscart का यह स्टैंड हिंदू समुदाय को चुभ गया।

कई संगठनों ने इसे धार्मिक भेदभाव का मामला बताते हुए उपभोक्ता संरक्षण आयोग में शिकायत की। सोशल मीडिया पर मीम्स वायरल हुए, जहां Lenscart के चश्मे को “अंधे चश्मे” कहा गया। यह घटना व्यापक बहस छेड़ती है: क्या कंपनियां ग्रूमिंग पॉलिसी बनाते समय सांस्कृतिक संवेदनशीलता भूल जाती हैं? ग्लोबल ब्रांड्स जैसे Google, Amazon भारत में अनुकूल पॉलिसी अपनाते हैं, लेकिन Lenscart जैसी होमग्रोन कंपनी पर ज्यादा उम्मीदें हैं।

कॉर्पोरेट जगत के लिए सबक: डिजिटल युग में सावधानी बरतें

यह विवाद कॉर्पोरेट इंडिया के लिए चेतावनी है। आजकल पुराने ईमेल या डॉक्यूमेंट भी वायरल हो सकते हैं। Lenscart ने पहले भी विवाद झेले हैं, जैसे प्राइसिंग पर सवाल। लेकिन यह धार्मिक मुद्दा सबसे संवेदनशील है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियों को DEI (Diversity, Equity, Inclusion) पॉलिसी को भारतीय संदर्भ में ढालना चाहिए।

पिछले साल Mamaearth का “हल्दी” एड विवाद याद है, जहां ब्रांड ने सफाई दी। इसी तरह Zomato के मीट एड पर बहिष्कार हुआ। Lenskart को अब कैंपेन चलाकर ट्रस्ट बहाल करना होगा। एनालिस्ट्स अनुमान लगा रहे हैं कि अगर बॉयकॉट बढ़ा, तो क्वार्टरली सेल्स 10-15% गिर सकती है। कंपनी को सोशल मीडिया मॉनिटरिंग मजबूत करनी होगी।

प्रभाव और भविष्य ब्रांड रिकवरी की राह

शेयरों में रिकवरी हुई, लेकिन लॉन्ग टर्म इफेक्ट्स दिखेंगे। Lenskart की ग्रोथ स्टोरी शानदार रही है – 2025 में रेवेन्यू 5,000 करोड़ पार। लेकिन यह विवाद IPO निवेशकों के भरोसे को हिला सकता है। उपभोक्ता अब ब्रांड्स से सांस्कृतिक संवेदनशीलता की उम्मीद करते हैं।

कंपनी अगर ठोस कदम उठाए, जैसे पॉलिसी पब्लिश करना या डाइवर्सिटी कैंपेन, तो नुकसान कम हो सकता है। पियूष बंसल की छवि उद्यमी के रूप में मजबूत है (Shark Tank फेम), जो मदद करेगी। कुल मिलाकर, यह घटना दिखाती है कि भारत में बिजनेस सिर्फ प्रॉफिट का खेल नहीं, बल्कि भावनाओं का भी।

इन आरोपों एवं विवाद पर पीयूष बंसल की प्रतिक्रिया

लेंसकार्ट के फाउंडर और सीईओ पीयूष बंसल ने बिंदी‑तिलक विवाद पर सोशल मीडिया (प्लेटफॉर्म X) पर एक स्पष्ट सफाई देते हुए तीन बातें प्रमुख रूप से कहीं:

  1. वायरल दस्तावेज दो बातें: “पुराना और गलत”
    बंसल ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ग्रूमिंग/स्टाइल‑गाइड दस्तावेज पुराना है और यह लेंसकार्ट की मौजूदा HR या ग्रूमिंग पॉलिसी का हिस्सा नहीं है।
    उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक पुराना ट्रेनिंग नोट/डॉक्यूमेंट है, जिसे गलत लॉजिक और गलत संदर्भ में शेयर किया जा रहा है, और इसे कंपनी की अप‑टू‑डेट नीति समझना भ्रामक है।
  2. बिंदी–तिलक वाली लाइन मानी गई “गलती”
    बंसल ने स्वीकार किया कि इस ट्रेनिंग नोट में “बिंदी और तिलक से बचें” जैसी लाइनें लिखी गई थीं, जो कभी नहीं होनी चाहिए थीं और यह एक चूक या गलती थी।
    उन्होंने बताया कि लेंसकार्ट ने इस गलती को 17 फरवरी 2026 को ही सुधा लिया था, जिसका मतलब यह है कि यह निर्देश विवाद शुरू होने से काफी पहले हटा दिया गया था।
  3. जिम्मेदारी खुद ली और माफी मांगी
    पीयूष बंसल ने संस्थापक और सीईओ होने के नाते इस चूक की पूरी जिम्मेदारी खुद ली और कहा कि एक ऐसा डॉक्यूमेंट इस तरह से बन और रह गया, यह उनकी निगरानी की खामी थी।
    उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के भ्रम और लोगों की चिंता के लिए लेंसकार्ट और उनकी ओर से माफी मांगी जाती है।
  4. मौजूदा नीति के बारे में स्पष्टीकरण
    बंसल ने स्पष्ट किया कि लेंसकार्ट की वर्तमान नीति में किसी भी धार्मिक प्रतीक—जैसे बिंदी, तिलक, कलावा, सिंदूर या अन्य चिह्न—पर कोई रोक नहीं है, और कर्मचारियों को अपने धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक पहनने की पूरी आजादी है।
    उन्होंने यह भी कहा कि अब आगे ऐसी गाइड या ट्रेनिंग सामग्री तैयार करने से पहले इसकी कड़ी जांच और समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसे भ्रम बनने का श्रृंखला टूट सके।

Lenscart का बिंदी-तिलक विवाद कॉर्पोरेट को सिखाता – संस्कृति सम्मानें। पियूष बंसल की सफाई सकारात्मक, लेकिन सबक लें। ब्रांड्स भारतीय भावनाओं का ख्याल रखें। विवाद समाप्त, लेकिन याद रहेगा।

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