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भारत ने रचा इतिहास! इसरो ने सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया देश का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03, उपराष्ट्रपति व प्रधानमंत्री ने दी बधाई

On: November 2, 2025 9:19 PM
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Great achievement by ISRO: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ने एक बार फिर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को देश के सबसे भारी और अत्याधुनिक संचार उपग्रह सीएमएस-03 (GSAT-7R) का सफल प्रक्षेपण किया। यह प्रक्षेपण भारत के शक्तिशाली LVM3-M5 रॉकेट के माध्यम से किया गया, जिसने उपग्रह को भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में स्थापित किया।

उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन का बयान

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने इसरो और भारतीय नौसेना को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि —

“भारत के शक्तिशाली एलवीएम3-एम5 रॉकेट ने एक बार फिर आकाश की ओर उड़ान भरी और भारतीय नौसेना के सबसे भारी व सबसे उन्नत संचार उपग्रह जीसैट-7आर (सीएमएस-03) को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया है। यह उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में अंतरिक्ष-आधारित संचार और समुद्री डोमेन जागरूकता को मजबूत करेगा।”

उन्होंने आगे कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक गौरवपूर्ण मील का पत्थर है और भारतीय वैज्ञानिकों व इंजीनियरों के समर्पण का परिणाम है।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी दी बधाई

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स (X) पर एक पोस्ट में कहा—

“हमारा अंतरिक्ष क्षेत्र हमें निरंतर गौरवान्वित कर रहा है! भारत के सबसे भारी संचार उपग्रह सीएमएस-03 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो को बधाई। हमारे वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि उत्कृष्टता और नवाचार का प्रतीक है। उनकी सफलताएं राष्ट्रीय प्रगति को आगे बढ़ा रही हैं और अनगिनत लोगों को सशक्त बना रही हैं।”

क्या है सीएमएस-03 (GSAT-7R) ?

  • यह उपग्रह भारतीय नौसेना के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री संचार नेटवर्क को सुदृढ़ करना है।
  • यह उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की निगरानी और संचार क्षमताओं को बढ़ाएगा।
  • सीएमएस-03 पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित है, जो भारत की रक्षा और अंतरिक्ष स्वायत्तता को नई ऊंचाई देगा।

CMS-03 (GSAT-7R)

सीएमएस-03 (Communication Satellite-03) जिसे तकनीकी रूप से GSAT-7R कहा जाता है, भारत का अब तक का सबसे भारी और सबसे उन्नत सैन्य संचार उपग्रह है। यह उपग्रह विशेष रूप से भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए डिजाइन किया गया है ताकि समुद्र में तैनात युद्धपोतों, पनडुब्बियों, वायुयानों और जमीनी ठिकानों के बीच सुरक्षित और तेज़ संचार नेटवर्क स्थापित किया जा सके।

मुख्य तकनीकी विशेषताएं

विशेषताविवरण
नामGSAT-7R (या CMS-03)
लॉन्च रॉकेटLVM3-M5 (GSLV Mark-3 का उन्नत संस्करण)
निर्माण संस्थाभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
कक्षा (Orbit)भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (Geosynchronous Transfer Orbit – GTO)
वजनलगभग 4 टन से अधिक (भारत का अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह)
लॉन्च स्थलसतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा
कवरेज क्षेत्रपूरे हिंद महासागर क्षेत्र सहित भारत की समुद्री सीमाएं

भारतीय नौसेना के लिए इसका महत्व

  1. समुद्री संचार (Maritime Communication): सीएमएस-03 नौसेना के युद्धपोतों, पनडुब्बियों और हवाई निगरानी विमानों को रियल-टाइम और एन्क्रिप्टेड संचार सुविधा प्रदान करेगा। यानी समुद्र में तैनात बेड़े अब बिना रुकावट एक-दूसरे से संपर्क बनाए रख सकेंगे।
  2. नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर (Network Centric Warfare): यह उपग्रह नौसेना की पूरी कम्युनिकेशन प्रणाली को एक एकीकृत नेटवर्क में जोड़ता है। इससे किसी भी आपात स्थिति में तेज़ी से कमांड ट्रांसफर और एक्शन संभव होगा।
  3. समुद्री निगरानी और डोमेन अवेयरनेस: हिंद महासागर क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध गतिविधि, जहाज या पनडुब्बी की निगरानी में यह उपग्रह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  4. राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती: यह भारत को चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की गतिविधियों पर भी समुद्री स्तर पर नज़र रखने में मदद करेगा।

कैसे करता है काम

  • यह उपग्रह पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर ऊंचाई पर अपनी कक्षा में घूमता है।
  • इसमें उच्च-क्षमता वाले ट्रांसपोंडर लगे हैं जो रेडियो सिग्नल को अंतरिक्ष से पृथ्वी पर और पृथ्वी से अंतरिक्ष में भेजते हैं।
  • नौसेना के जहाजों और बेस स्टेशनों में लगे सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम इन सिग्नलों को ग्रहण करते हैं।
  • यह संचार एन्क्रिप्टेड होता है, ताकि कोई बाहरी देश या संस्था इसे हैक न कर सके।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मील का पत्थर

  • यह उपग्रह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित है।
  • इसका निर्माण भारत के “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियानों को मजबूत करता है।
  • यह भारत को वैश्विक रक्षा संचार नेटवर्क में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाता है।

GSAT श्रृंखला का इतिहास

उपग्रहवर्षमुख्य उपयोग
GSAT-7 (रुक्मिणी)2013भारतीय नौसेना के लिए
GSAT-7A2018भारतीय वायुसेना और थलसेना के लिए
GSAT-7R / CMS-032025नौसेना के उन्नत और विस्तृत संचार नेटवर्क के लिए

इस तरह GSAT-7R पिछले उपग्रहों का अपग्रेडेड वर्जन है, जिसमें बेहतर डेटा क्षमता, सिग्नल रेंज, और सुरक्षा तंत्र जोड़ा गया है।

सीएमएस-03 (GSAT-7R) न केवल भारतीय नौसेना की संचार और सुरक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाएगा, बल्कि भारत को समुद्री क्षेत्र में एक रणनीतिक बढ़त भी दिलाएगा। यह भारत की वैज्ञानिक दक्षता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रक्षा-सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है।

इसरो के इस सफल प्रक्षेपण ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि भारत न केवल अंतरिक्ष विज्ञान में आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

यह उपलब्धि “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” की भावना को नई ऊर्जा प्रदान करती है। इसरो और भारतीय नौसेना को हार्दिक बधाई — भारत का अंतरिक्ष अब और भी ऊंचा उड़ान भर रहा है!

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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