Government Polytechnic Kharsawan: राजकीय पॉलीटेक्निक खरसावां के प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार पर सौ से अधिक छात्रों ने गंभीर आरोप लगाए।
इस मामले पर विधायक दशरथ गागराई ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर आरोप यह भी लगाया की
- प्राचार्य द्वारा छात्रों का भयादोहन किया जा रहा है और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
- आरोप यह भी लगाया की छात्रों को छात्रावास से निकालकर किराये पर रहने के लिए मजबूर किया गया,
- यूपीआई के माध्यम से जबरन पैसे वसूले गए।
- साथ ही, आंतरिक परीक्षा में अंकों का भय दिखाकर छात्रों को डराने-धमकाने की शिकायत भी की गई।

Government Polytechnic Kharsawan: विधायक दशरथ गागराई ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
राजकीय पॉलीटेक्निक खरसावां के प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार पर लगे आरोपों को लेकर शुक्रवार को विधायक दशरथ गागराई ने रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। विधायक गागराई ने ज्ञापन में लिखा कि प्राचार्य द्वारा छात्रों का भयादोहन किया जा रहा है और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
आरोप है कि कई छात्रों को छात्रावास से निकालकर किराये पर रहने के लिए मजबूर किया गया और यूपीआई के माध्यम से जबरन पैसे वसूले गए। साथ ही, आंतरिक परीक्षा में अंकों का भय दिखाकर छात्रों को डराने-धमकाने की शिकायत भी की गई है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि संस्थान के व्याख्याताओं को सात माह का मानदेय अब तक नहीं मिला है, जिससे वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। व्याख्याताओं ने प्राचार्य पर तानाशाही रवैया अपनाने, घंटी आवंटन में भेदभाव करने और अपने चहेतों को अधिक घंटी देने का आरोप लगाया है।

हालांकि, प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि
छात्रों से सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क सरकारी बैंक खाते में लिए जाते है और इसका रसीद उन्हें दिया जाता है। संस्थान में अनुशासन एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करने हेतु हर संभव प्रयास किया जा रहा है। छात्रों को परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, न कि डराया जाता है।
प्राचार्य ने आगे कहा कि
संविदा व्याख्याताओं के मानदेय का भुगतान माह जून 2025 तक किया गया है तथा आवश्यकता आधारित व्याख्याता द्वारा विपत्र जमा नहीं करने के कारण इस वित्तीय वर्ष में भुगतान लंबित है, विपत्र जमा करने के लिए उन्हें पत्र भी निर्गत किए गए है।
प्राचार्य द्वारा यह भी जानकारी दी गई कि VIVA के समय छात्रों से जो attendance लिए गए थे, उन्हें शरारतपूर्ण तरीके से छात्रों के आरोप पत्र के साथ लगा कर सभी जगह भेजे गए है।
छात्रों के बेहतर वर्ग कार्य एवं प्रयोगशाला सुचारू रूप से हो इस हेतु काफी गंभीर है।
प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार ने इन सभी आरोपों का खंडन किया और कहा
राजकीय पोलिटेकनिक, खरसावाँ के संबंध में विगत दिनों से प्रिंट एवं ईलेक्ट्रॉनिक मिडिया में भ्रामक एवं असत्य समाचार आ रहे हैं।

Government Polytechnic Kharsawan: मुख्य रूप से निम्न आरोप वस्तुस्थिति के साथ निम्नवत् है।
- प्राचार्य पर छात्रावास से जबरन छात्रों को निकाले जाने का आरोप लगाया जा रहा है। –
वर्तमान प्राचार्य अगस्त 2024 से आये हैं जबकि छात्रावास अप्रैल-मई 2024 अथार्त पूर्व से ही खाली है। छात्रावास की स्थिति जर्जर है एवं Renovation के पूर्व उसमें छात्रों को रखना उनके जीवन के साथ खेलवाड़ होगा।
- परीक्षाफल समसय नहीं प्रकाशन करने का आरोप संस्थान में पंचम सेमेस्टर का परीक्षाफल आंतरिक संशोधन के लिए आया जिस पर संशोधन हेतु पत्र दिनांक 30.06.2025 तक दिया जाना था, उसे JUT को उपलब्ध करा दिया गया। परीक्षा नियंत्रक द्वारा परीक्षाफल घोषित किये जाने संबंधी पत्र संस्थान को दिनांक 11.07.2025 को प्राप्त हुआ, जिसे छात्रों के बीच ससमय उपलब्ध करा दिया गया।
- छात्रों का आंतरिक परिक्षाओं में कम अंक दिये जाने का दवाब बनाकर प्राचार्य द्वारा भयादोहन का आरोप
सभी आंतरिक परिक्षाऐं संबंधित विषय के शिक्षक स्वंय लेते है एवं शिक्षक उन्हें उनके उत्तरपुस्तिकाओं में लिखे उत्तरों के अनुरूप मार्क्स दिये जाते हैं। ऐसे में प्राचार्य के ऊपर भयादोहन का आरोप गलत है।
- छात्रों से UPI के माध्यम से जबरन वसुली का आरोप
संस्थान के बैंक खाते से संबंधित कोई अभी तक UPI संचालन की सुविधा नहीं है। छात्रों को संस्थान के लिए देय निर्धारित शूल्क उनके द्वारा सीधे संस्थान के सरकारी खाते में जमा करने का निर्देश है एवं उन्हें जमा राशि का संस्थान द्वारा रसीद निर्गत किया जाता है। ऐसे में छात्रों से UPI के माध्यम से प्राचार्य पर जबरन वसुली का आरोप गलत है।
- संस्थान में कार्यरत संविदा एवं अन्य आवश्यकता आधारित व्याख्याताओं का विगत सात माह से वेतन / पारिश्रमिक लबित रखने का प्राचार्य पर आरोप
संविदा व्याख्याताओं का वेतन भुगतान माह जून 2025 तक हो चुका है एवं आवश्यकता आधारित व्याख्याताओं का इस वित्तीय वर्ष में उन्होंने अपना पारिश्रमिक विपत्र प्रस्तुत नहीं किया है जैसे ही उनका विपत्र प्राप्त होगा उनका भुगतान कर दिया जायेगा।

- संस्थान के प्राचार्य के चहेते व्याख्याताओं को मनमाने वर्गकार्य आवंटित करने का आरोप
संस्थान में कार्यरत सभी व्याख्याता अपने-अपने शाखा या संकाय से संबंद्ध है। ऐसे में किसी एक शाखा या संकाय के व्याख्याताओं को दूसरे शाखा या संकाय का वर्ग कार्य आवंटित नहीं हो सकता। अभिंयत्रण के तीनों शाखाओं के व्याख्याताओं को कम-से-कम 18 व्याख्यान प्रति सप्ताह (शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक) प्राप्त हो इसका विशेष ध्यान दिया जाता है। अतिरिक्त वर्ग कार्य लेने के उपरान्त भी उन्हें अतिरिक्त वर्ग कार्य का अतिरिक्त भुगतान संभव नहीं है। प्रत्येक माह विभाग द्वारा 56,100/- रू० मात्र तक का भुगतान की व्यवस्था है।
- संस्थान में कम्प्यूटर अभिंयत्रण में कोई भी शिक्षक नहीं है का आरोप कम्प्यूटर अभिंयत्रण में शिक्षकों के पदस्थापन के लिए विभाग को कई बार पत्र प्रेषित किया गया है।
- छात्रों को ऑन लाईन महँगे कोर्सस करने का प्राचार्य द्वारा छात्रों पर दवाब बनाने का आरोप
ए०आई०सी०टी०ई०, नई दिल्ली जो तकनीकी संस्थानों के लिए मानक निर्धारित करती है स्वंय NPTEL, SWYAM से ऑन-लाईन कोर्सस करने को प्रेरित करता है। छात्रों के बेहतर नियोजन के लिए Value addition के लिए Coursera या UDEMY या समकक्ष ऑन लाईन सस्ते कोर्सस करने के लिए प्राचार्य एवं अन्य प्रेरित करते है।
- छात्रों को आंतरिक परीक्षा के लिए जो पूर्व में पन्ने उपलब्ध कराये जाते थे उन्हें अब नहीं उपलब्ध कराया जाता है का आरोप-
पूर्व में भी छात्र अपने दो Assignment को अपने ही कॉपियों में या फाईल बनाकर जमा करते थे जिसमें उन्हें एकत्रित कर रखना कठीन कार्य था। वर्त्तमान में एक छात्र अपने एक ही कॉपी में उस विषय के सभी चारों आंतरिक परिक्षाऐं देते हैं जिनका सामयिक मुल्यांकन हो उन्हें अगले परीक्षा के पूर्व प्राप्त हो जाता है। यह व्यवस्था अन्य संस्थानों में भी अपनायी जा रही है।
संस्थान का NBA Accreditation विभागीय निर्देश के आलोक में कराया जाना है एवं इसके लिए भी यह आवश्यक है।
- प्राचार्य द्वारा सरकारी आवास में रहते हैं एवं मकान भाड़ा लेने का आरोप संस्थान में कोई प्राचार्य आवास नहीं है। प्राचार्य एक रूप के बैच्लर हॉस्टल में रहते हैं एवं मकान भाड़ा भी प्राप्त नहीं करते हैं।
- संस्थान में कार्यरत संविदा व्याख्याताओं पर प्राचार्य द्वारा तानाशाही रवैया अपनाया जाता है का आरोप
यह पूर्णतः निराधार है। प्राचार्य द्वारा समय-समय पर उन्हें आवंटित सभी वर्ग कार्य एवं अन्य दायित्वों का निर्वाहन करने हेतु जो कार्यालय आदेश निर्गत होते है उनका ससमय पालन हो, यह चाहते हैं। संभवतः लगभग प्रत्येक कार्यों के लिए कार्यालय आदेश के उपरान्त स्मार पत्र भी जारी करने पड़ते हैं। इसके बाद भी कार्य समांपदान के प्रति तत्परता का अभाव देखा जाता है। उनसे बार-बार किये जा रहे आग्रह को वे तानाशाही का संज्ञा देते है।
- मिडिया द्वारा प्राचार्य को यह संज्ञान में लाया गया कि छात्रों द्वारा आरोप पत्र जो उपायुक्त एवं अन्य जगह भेजे गये हैं उसमें तीनों शाखा के छात्रों का शाखावार हस्ताक्षर है। दिनांक 02.07.2025 को सम्पन्न भाईभा परीक्षा के दौरान छात्रों से जो शाखावार उपस्थिति के लिए हस्ताक्षर कराये गये है उन्हें सरारत पूर्ण तरीके से छात्रों के आरोप पत्र के साथ लगाकर सभी जगह भेजे गये है। इसकी जाँच की जायेगी।
- प्राचार्य से वार्ता के क्रम में यह जानकारी प्राप्त हुई कि छात्रों वेहतर वर्ग कार्य एवं प्रयोगशाला सुचारू रूप हो इस हेतु प्राचार्य काफी गभीर है। इसके लिए शिक्षकों को कई दिशा निर्देश दिये गये है। सभंवतः एसे निर्देश कुछ शिक्षकों के लिए समस्या बना हुआ है।
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