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देश में साइबर अपराध पर सरकार की सख्ती, 8,189 करोड़ रुपये की ठगी रोकी गई

On: February 12, 2026 12:50 PM
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नई दिल्ली: देश में बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए केंद्र सरकार और राज्यों के बीच समन्वित प्रयास तेज किए गए हैं। गृह मंत्रालय ने बताया है कि साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और तकनीकी हस्तक्षेप के जरिए अब तक 8,189 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ठगी से बचाई जा चुकी है। यह जानकारी गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

राज्यों की जिम्मेदारी, केंद्र का सहयोग

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सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार “पुलिस” और “सार्वजनिक व्यवस्था” राज्य के विषय हैं। इसलिए साइबर अपराधों की रोकथाम, जांच और अभियोजन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की है।
हालांकि, केंद्र सरकार इन एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने के लिए कई योजनाओं के तहत तकनीकी सलाह, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

I4C बना मुख्य समन्वय केंद्र

साइबर अपराधों से समन्वित तरीके से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना की है। इसके तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) (cybercrime.gov.in) शुरू किया गया, जहां आम नागरिक ऑनलाइन साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
इस पोर्टल पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अलावा त्वरित शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 भी संचालित किया जा रहा है।

वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए विशेष प्रणाली

साल 2021 में नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS) शुरू की गई, जिसका उद्देश्य ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और रकम की हेराफेरी रोकना है।
I4C के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक इस प्रणाली के माध्यम से 23.61 लाख से अधिक शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए 8,189 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बचाई जा चुकी है।

साल-दर-साल बढ़ रही शिकायतें

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों और रिपोर्ट की गई रकम में तेजी से वृद्धि हुई है:

  • 2021: 2.62 लाख शिकायतें, 551 करोड़ रुपये
  • 2022: 6.94 लाख शिकायतें, 2,290 करोड़ रुपये
  • 2023: 13.10 लाख शिकायतें, 7,465 करोड़ रुपये
  • 2024: 19.18 लाख शिकायतें, 22,848 करोड़ रुपये
  • 2025: 24.02 लाख शिकायतें, 22,495 करोड़ रुपये

सरकार ने कहा कि यह डेटा लगातार अपडेट होता रहता है और जागरूकता बढ़ने से शिकायतों की संख्या में वृद्धि भी देखी जा रही है।

जांच और कार्रवाई राज्यों के जिम्मे

राष्ट्रीय पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को एफआईआर में बदलना, आरोपपत्र दाखिल करना, गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस द्वारा कानून के प्रावधानों के तहत की जाती है।
केंद्र सरकार इन एजेंसियों को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण देकर जांच प्रक्रिया को मजबूत बना रही है।

डिजिटल फोरेंसिक क्षमता का विस्तार

साइबर अपराधों की जांच को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अत्याधुनिक डिजिटल जांच सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं। नई दिल्ली में 2019 में और असम में 2025 में ऐसे केंद्र शुरू किए गए, जो राज्यों की पुलिस को शुरुआती जांच में साइबर फोरेंसिक सहायता प्रदान करते हैं।
31 दिसंबर 2025 तक दिल्ली स्थित केंद्र ने 13,299 से अधिक मामलों में राज्यों की एजेंसियों को तकनीकी मदद दी है।

इसके अलावा, देशभर के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में साइबर फोरेंसिक विभाग कार्यरत हैं। हैदराबाद स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में 37.34 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला भी स्थापित की गई है। देशभर में सात केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं साइबर मामलों की जांच में सहायता दे रही हैं।

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष योजना

गृह मंत्रालय ने “महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम” योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी है। इस राशि से साइबर फोरेंसिक लैब की स्थापना, साइबर सलाहकारों की नियुक्ति और पुलिस, अभियोजकों तथा न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
अब तक 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं और 24,600 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

जागरूकता और तकनीक पर जोर

सरकार का कहना है कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी क्षमता, जागरूकता और त्वरित रिपोर्टिंग सबसे अहम है। नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, फिशिंग या डिजिटल फ्रॉड का शिकार होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

सरकार का मानना है कि केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयास, तकनीकी ढांचे के विस्तार और जागरूकता अभियानों के जरिए देश में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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