मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों : आकाश के शेर, जिन्होंने जान देकर इतिहास लिखा

Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427
On: December 14, 2025 9:38 PM
Follow Us:
The News Frame 5
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

B 1

“हम भारत के भरत खेलते, शेरों की संतान से,
कोई देश नहीं दुनिया में बढ़कर हिन्दुस्तान से,
इस मिट्टी में पैदा होना बड़े गर्व की बात है,
साहस और वीरता अपने पुरखों की सौगात है l”

A 2

इतिहास के पन्नों से: भारत के सैन्य इतिहास में कई वीर योद्धाओं के नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित हैं, लेकिन भारतीय वायुसेना के पहले परमवीर चक्र विजेता फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों का साहस और बलिदान अद्वितीय है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में श्रीनगर एयरफील्ड की रक्षा करते हुए उन्होंने जिस अदम्य वीरता का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत बन चुका है। दुश्मन के मुकाबले बेहद सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने आकाश में वही किया जो भू-रक्षा पर मेजर शैतान सिंह या कैप्टन विक्रम बत्रा जैसे वीरों ने किया था—देश के सम्मान के लिए निस्संशय होकर प्राण समर्पित करना।

4 जून 1967 को उन्हें वायु सेना में कमीशन मिला था। अपने खुशमिजाज व सहयोग स्वभाव से ‘भैया’ कहलाने वाले सेखों अपनी 18 नेट स्क्वाड्रन में काफी लोकप्रिय थे। अक्टूबर 1968 में इस स्क्वाड्रन में आए और यहां इन्होंने नेट विमान उड़ाने का गहन अभ्यास किया।

श्रीनगर पर अचानक हमला और सेखों की तत्परता

14 दिसंबर 1971 की सुबह श्रीनगर एयरबेस पर सामान्य दिनों जैसा ही कार्य चल रहा था। किसी को अंदेशा नहीं था कि अगले कुछ ही मिनटों में आसमान का रंग बदलने वाला है। पाकिस्तानी वायुसेना के छह घातक F-86 सैबर जेट अचानक घाटी की ओर बढ़ रहे थे, उनके निशाने पर भारतीय वायुसेना का यह महत्वपूर्ण हवाई अड्डा था। उस समय एयरबेस पर लड़ाकू विमानों की संख्या सीमित थी और मौके पर मौजूद पायलटों की जिम्मेदारी बहुत बड़ी थी।

इसी दौरान सेखों, जो कि ग्नैट लड़ाकू विमान के पायलट थे, ने बिना एक पल गँवाए अपने जेट की ओर दौड़ लगाई। एयरफील्ड पहले ही गोलाबारी की चपेट में था, फिर भी उन्होंने किसी भय के बिना विमान को उड़ान भराई। यह उड़ान ही उनके असाधारण साहस की पहली मिसाल थी—क्योंकि जिस क्षण वे रनवे पर थे, उसी क्षण दुश्मन के सैबर जेट मशीनगन की बौछारें बरसा रहे थे।

आकाश में बराबरी की भिड़ंत

एक ही लड़ाकू विमान से छह दुश्मन विमानों का सामना—यह परिस्थिति ही अपने आप में असंभव-सी लगती है। परन्तु सेखों के लिए यह देश की रक्षा का क्षण था। हवा में पहुंचते ही उन्होंने बिजली-सी तेजी से दुश्मन के दो सैबर जेटों को निशाने पर लिया।

आपके द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, सेखों की गोलीबारी इतनी सटीक थी कि दुश्मन के एक सैबर जेट के ध्वस्त होने की भीषण आवाज आसमान में गूँज उठी। इसके बाद उन्होंने दूसरा जेट भी मार गिराया, जो बड़े धमाके के साथ जमीन पर गिरा। यह सबकुछ कुछ ही मिनटों में हुआ, पर इससे श्रीनगर एयरबेस सुरक्षित रह सका और दुश्मन की योजना पूरी तरह चरमरा गई।

अंतिम संदेश और वीरगति

हालाँकि मुकाबला अभी समाप्त नहीं हुआ था। आसमान में धुआँ, विस्फोट और गोलाबारी का उग्र दृश्य था। ऐसे समय में सेखों ने वायरलेस पर अपने साथी धुम्मन को संदेश दिया—
“शायद मेरा नेट भी निशाने पर आ गया है, धुम्मन, अब तुम मोर्चा सम्भालो।”

यह वाक्य दरअसल उनका अंतिम संदेश था—कर्तव्य, वीरता और त्याग की अद्भुत त्रिवेणी। कुछ ही क्षण बाद उनका विमान दुश्मन की गोलीबारी का शिकार हो गया और वे वीरगति को प्राप्त हुए। उन्होंने जान की परवाह किए बिना अंतिम क्षण तक भारत के आकाश की रक्षा की।

बलिदान जिसने भारतीय वायुसेना को नई ऊँचाई दी

फ्लाइंग ऑफिसर सेखों का बलिदान सिर्फ एक युद्धक सफलता नहीं था; यह भारतीय वायुसेना के मनोबल और युद्ध भावना की नई परिभाषा था। सीमित संसाधनों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच दुश्मन को परास्त करने का उनका साहस पूरी दुनिया ने देखा।

उनकी इस असाधारण शौर्यगाथा के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान किया। वे भारतीय वायुसेना के पहले अधिकारी बने जिन्हें युद्धभूमि पर अद्वितीय पराक्रम के लिए यह सर्वोच्च वीरता पदक दिया गया।

आज भी प्रेरणा का अमिट स्रोत

फ्लाइंग ऑफिसर सेखों की कहानी सिर्फ सैन्य अभियानों की कथा नहीं है, बल्कि यह कर्तव्यनिष्ठा, राष्ट्रप्रेम और त्याग का आदर्श उदाहरण है। आज जब भारतीय वायुसेना आधुनिक उपकरणों और तकनीक से लैस है, तब भी सेखों जैसे वीरों की वीरगाथाएँ पायलटों में वही उत्साह और आत्मविश्वास जगाती हैं जैसा 1971 में दिखाई दिया था।

उनकी स्मृति में जयपुर में एक स्टैच्यू स्थापित है और श्रीनगर एयरबेस पर भी उनका नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। हर वर्ष 14 दिसंबर को वायुसेना उनके बलिदान को नमन करती है और युवा कैडेटों को उनकी वीरता की कथा सुनाई जाती है।

वरुण कुमार
संस्थापक: अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद जमशेदपुर
ईमेल: varun1469@gmail.com

WhatsApp Image 2026 05 11 At 11.09.39 AM
Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

और पढ़ें

Untitled Design 62

रक्षा मंत्री ने सीतापुर में 250 मेगावाट सौर Energy परियोजना को दी मंजूरी रक्षा भूमि पर बनेगी देश की पहली सोलर-बीईएसएस परियोजना

Untitled Design 60

सैपलिंग संवाद-2026 का अहमदाबाद में शुभारंभ Food प्रसंस्करण के जरिए रोजगार और सतत विकास पर जोर

Untitled Design 58

धरती आबा भगवान Birsa मुंडा जनजातीय अस्मिता स्वाभिमान और स्वतंत्रता चेतना के अमर प्रतीक

Untitled Design 57

World Ocean Day पर पुनीत सागर अभियान 2026 के तहत एनसीसी कैडेट्स ने चलाया नदी सफाई अभियान दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Untitled Design 55

Martyr बेटे को मिला कीर्ति चक्र राष्ट्रपति से लिपटकर रो पड़ीं मां भावुक पल में टूटा प्रोटोकॉल

Untitled Design 54

Surrender नक्सलियों के पुनर्वास एवं लाभ-सुविधा सुनिश्चित करने को लेकर उपायुक्त और एसपी ने की समीक्षा बैठक

Leave a Comment

Link copied