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भारत में वृद्धजन: जनसंख्या, चुनौतियां और सरकारी पहल

On: October 28, 2025 9:40 PM
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भारत में वृद्धजन: जनसंख्या, चुनौतियां और सरकारी पहल

Elderly in India : भारत आज जिस गति से जनसांख्यिकीय परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, वह आने वाले समय में समाज, अर्थव्यवस्था और नीति-निर्माण पर गहरा प्रभाव डालने वाला है। देश में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2036 तक भारत में वरिष्ठ नागरिकों की आबादी लगभग 23 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है, जो कुल जनसंख्या का लगभग 15% हिस्सा होगी। इसका अर्थ है कि हर सात में से एक भारतीय वरिष्ठ नागरिक होगा।

जनसांख्यिकीय परिदृश्य

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भारत के कई हिस्सों में वृद्धजन जनसंख्या का वितरण असमान है। दक्षिणी राज्य जैसे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश, तथा हिमाचल प्रदेश और पंजाब जैसे पहाड़ी राज्य, पहले से ही अधिक उम्रदराज़ जनसंख्या वाले क्षेत्र बन चुके हैं।

  • केरल में वृद्धजनों की आबादी 2011 के 13% से बढ़कर 2036 तक 23% होने की संभावना है।
  • जबकि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह अनुपात 7% से बढ़कर 12% हो जाएगा।

यह क्षेत्रीय असमानता भारत के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में नए प्रकार की चुनौतियाँ पैदा कर रही है — जैसे ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, वृद्ध-अनुकूल आवास और परिवहन की जरूरत, और देखभालकर्ता (caregivers) की भारी मांग।

THE NEWS FRAME

वृद्धजनों के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ

भारत में वृद्धजन केवल स्वास्थ्य संबंधी नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक असुरक्षाओं का भी सामना करते हैं।
मुख्य चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. स्वास्थ्य:
    • बढ़ती उम्र से संबंधित बीमारियाँ (मधुमेह, हृदय रोग, अल्जाइमर, डिमेंशिया)।
    • ग्रामीण इलाकों में उचित चिकित्सा सुविधा और जेरिएट्रिक वार्ड की कमी।
    • मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान न देना।
  2. आर्थिक असुरक्षा:
    • सीमित पेंशन योजनाएँ और सामाजिक सुरक्षा।
    • बढ़ती चिकित्सा लागत और महंगाई का दबाव।
  3. सामाजिक अलगाव:
    • संयुक्त परिवारों का विघटन, प्रवासन और शहरीकरण के कारण अकेलापन।
    • उपेक्षा और मानसिक तनाव।
  4. डिजिटल विभाजन:
    • तकनीकी साक्षरता की कमी के कारण ऑनलाइन सेवाओं तक पहुँच में बाधा।
  5. बुनियादी ढाँचा:
    • वृद्ध-अनुकूल सार्वजनिक स्थानों, रैंप, रेलिंग और परिवहन की कमी।

सरकार की प्रमुख पहलें

1. अटल पेंशन योजना (APY)

2015 में शुरू की गई इस योजना के तहत 18–40 वर्ष आयु वर्ग के नागरिक 60 वर्ष की आयु पर ₹1,000 से ₹5,000 मासिक पेंशन के पात्र बनते हैं।
2025 तक 8.27 करोड़ सदस्य और ₹49,000 करोड़ से अधिक की परिसंपत्ति प्रबंधन (AUM)।

2. अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY)

वरिष्ठ नागरिकों के सशक्तिकरण के लिए यह समग्र योजना है, जिसके तहत कई उप-कार्यक्रम चल रहे हैं —

  • (i) वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (IPSrC):
    देशभर में 696 वृद्धाश्रम कार्यरत हैं जो गरीब वरिष्ठ नागरिकों को आवास, भोजन और चिकित्सा सुविधा प्रदान करते हैं।
  • (ii) राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY):
    बीपीएल वृद्धजनों को वॉकर, श्रवण यंत्र, व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग आदि मुफ्त प्रदान किए जाते हैं।
  • (iii) हेल्पलाइन 14567:
    वरिष्ठ नागरिकों के लिए Elder Line सेवा — परामर्श, सुरक्षा और सहायता हेतु 24×7 उपलब्ध।
  • (iv) SAGE पोर्टल:
    “सिल्वर इकोनॉमी” को प्रोत्साहित करने हेतु स्टार्टअप्स को वरिष्ठ नागरिक देखभाल से जुड़ी सेवाएँ विकसित करने का अवसर।
  • (v) SACRED पोर्टल:
    वरिष्ठ नागरिकों को उनके अनुभव और कौशल के अनुरूप पुनः रोजगार (re-employment) का अवसर प्रदान करता है।
  • (vi) वृद्धावस्था देखभालकर्ता प्रशिक्षण:
    अब तक 36,785 देखभालकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे पेशेवर रूप से बुजुर्गों की सेवा कर सकें।

स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी पहलें

आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY)

अब 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई है।

राष्ट्रीय वृद्धजन स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम (NPHCE)

देश के सभी 713 जिलों में वृद्धजनों के लिए जेरिएट्रिक वार्ड, फिजियोथेरेपी और विशेष ओपीडी सेवाएँ संचालित हैं।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS)

बीपीएल वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों को ₹200 (60–79 वर्ष) और ₹500 (80 वर्ष से अधिक) मासिक पेंशन प्रदान की जाती है।
📊 2.21 करोड़ लाभार्थी (2025 तक)

कानूनी सुरक्षा और अधिकार

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 और इसके संशोधन विधेयक 2019 ने वृद्धजनों के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा दी है।
अब इसमें:

  • सास-ससुर और दादा-दादी को भी “माता-पिता” की परिभाषा में शामिल किया गया है।
  • भरण-पोषण की राशि की सीमा हटाई गई है।
  • हर जिले में “वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष पुलिस इकाई” और नोडल अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य है।
  • “रखरखाव” में अब स्वास्थ्य, आवास और सुरक्षा भी शामिल हैं।

प्रौद्योगिकी की भूमिका

भारत में बुजुर्गों की जीवन-शैली को आसान और सुरक्षित बनाने में प्रौद्योगिकी का बड़ा योगदान है:

  • ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म से घर बैठे डॉक्टर से परामर्श।
  • स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड से स्वास्थ्य निगरानी और इमरजेंसी अलर्ट।
  • ऑनलाइन फ़ार्मेसी और स्मार्ट होम उपकरण से सुविधा और सुरक्षा।

सामाजिक और सामुदायिक समर्थन

सामाजिक जुड़ाव वृद्धजनों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। सामुदायिक केंद्र, क्लब, धार्मिक आयोजन और स्वयंसेवी संस्थाएँ इस दिशा में सहायक हैं।

परिवार भी प्रमुख भूमिका निभाता है — परंतु प्रवासन और शहरीकरण के कारण पारंपरिक देखभाल कमजोर हुई है। सरकार ने इसे कानूनी रूप से मजबूत किया है ताकि हर वरिष्ठ नागरिक सम्मानपूर्वक जीवन जी सके।

भारत की “सिल्वर इकॉनमी” की दिशा में

भारत में वृद्धजनों से जुड़ी अर्थव्यवस्था — जिसे “सिल्वर इकॉनमी” कहा जाता है — 2024 में लगभग ₹73,000 करोड़ की थी और आने वाले वर्षों में इसके कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।
यह न केवल बुजुर्गों के लिए अवसर पैदा कर रही है, बल्कि स्वास्थ्य, देखभाल, टेक्नोलॉजी और प्रशिक्षण के क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ा रही है।

भारत यदि स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल सुविधा और सामाजिक समावेशन के बीच संतुलन बनाए रखता है, तो यह परिवर्तन न केवल चुनौती बल्कि एक नए युग की संभावनाओं का प्रतीक बन सकता है — जहाँ वृद्धजन केवल समाज के आश्रित नहीं, बल्कि उसके सशक्त योगदानकर्ता होंगे।

“भारत का भविष्य तभी सुरक्षित और संवेदनशील होगा जब उसके वरिष्ठ नागरिक सम्मान, स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ जीवन व्यतीत करेंगे। वृद्धावस्था बोझ नहीं, अनुभव की पूँजी है — इसे नीति और समाज दोनों को समान रूप से संजोना होगा।”

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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