जमशेदपुर: Raksha Bandhan के पावन पर्व के अवसर पर भारतीय डाक विभाग द्वारा शुरू की गई विशेष पहल एवं राखी निर्माण प्रतियोगिता को लेकर सोमवार को शिक्षा निकेतन स्कूल, टेल्को में एक महत्वपूर्ण संवाद आयोजित किया गया। इस दौरान डाक विभाग के प्रतिनिधियों ने विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती सुमिता डे से मुलाकात कर विद्यालय में रक्षाबंधन प्रतियोगिता आयोजित करने का औपचारिक अनुरोध किया।
प्राचार्या ने इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार करते हुए डाक विभाग की इस अनूठी पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अभियान बच्चों में रचनात्मकता, भाईचारे, देशभक्ति और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा।
डाक विभाग की पहल को बताया सराहनीय प्रयास
बैठक के दौरान प्राचार्या श्रीमती सुमिता डे ने कहा कि भारतीय डाक विभाग द्वारा शुरू किया गया यह अभियान केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला एक प्रेरणादायी प्रयास है।
उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में जहां त्योहारों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, वहीं इस प्रकार की पहल बच्चों को भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करेगी। उन्होंने डाक विभाग के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे समय की आवश्यकता बताया।
हाथ से बनी राखियों में छिपा होता है प्यार और अपनापन
प्राचार्या श्रीमती सुमिता डे ने कहा कि बाजार से खरीदी गई या ऑनलाइन मंगाई गई राखियों की तुलना में बच्चों द्वारा अपने हाथों से बनाई गई राखियों का महत्व कहीं अधिक होता है।
उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता का उपयोग करते हुए स्वयं राखी तैयार करते हैं, तो उसमें केवल रंग और डिजाइन ही नहीं, बल्कि उनका प्रेम, स्नेह, भावनाएं और अपनापन भी शामिल होता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी राखियां जब देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों या उन लोगों तक पहुंचती हैं जिनकी कोई बहन नहीं है, तब वह केवल एक धागा नहीं रहती, बल्कि स्नेह और सम्मान का प्रतीक बन जाती है।
राखी के माध्यम से सैनिकों तक पहुंचेगा बच्चों का स्नेह
प्राचार्या ने कहा कि देश के जवान दिन-रात सीमाओं पर रहकर हमारी सुरक्षा करते हैं। ऐसे में यदि बच्चों द्वारा अपने हाथों से बनाई गई राखियां उनके पास पहुंचती हैं तो यह उनके लिए एक भावनात्मक उपहार होगा।
उन्होंने कहा कि यह अभियान बच्चों में सैनिकों के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना को भी मजबूत करेगा। साथ ही विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं, बल्कि सुरक्षा, विश्वास और जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है विद्यालय
श्रीमती सुमिता डे ने अपने पूर्व अनुभव साझा करते हुए बताया कि शिक्षा निकेतन स्कूल हमेशा सामाजिक और पर्यावरणीय गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेता है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में विद्यालय द्वारा ‘तरु रक्षाबंधन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें बच्चों ने पेड़ों को राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था।
उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी विकसित करती हैं। विद्यालय भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों को प्राथमिकता देता रहेगा।

भारतीय संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बनेगी प्रतियोगिता
प्राचार्या ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली और तकनीक के बढ़ते प्रभाव के कारण हमारी कई पारंपरिक परंपराएं धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि डाक विभाग द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता बच्चों को भारतीय संस्कृति, त्योहारों की परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। इससे नई पीढ़ी अपने त्योहारों के वास्तविक महत्व को समझ सकेगी और परिवार एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों को भी महसूस करेगी।
विद्यालय के सभी छात्र-छात्राएं लेंगे प्रतियोगिता में भाग
विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती सुमिता डे ने डाक विभाग को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन देते हुए कहा कि शिक्षा निकेतन स्कूल के छोटे-बड़े सभी कक्षाओं के छात्र-छात्राएं इस रक्षाबंधन प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लेंगे।

उन्होंने कहा कि विद्यालय विद्यार्थियों को अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान से जोड़ने के लिए आवश्यक तैयारियां करेगा ताकि प्रतियोगिता सफल हो और बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सके।
रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं केवल कला और हस्तकला तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी, संवेदनशीलता, आत्मविश्वास और रचनात्मक सोच का भी विकास करती हैं।
राखी निर्माण जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चे भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रप्रेम और मानवीय मूल्यों को व्यवहारिक रूप से सीखते हैं। यही कारण है कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डाक विभाग की पहल से मजबूत होगा सामाजिक जुड़ाव
भारतीय डाक विभाग की यह पहल समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का कार्य कर रही है। एक ओर बच्चे अपनी कला और भावनाओं को राखी के माध्यम से व्यक्त करेंगे, वहीं दूसरी ओर सैनिकों एवं समाज के उन लोगों तक स्नेह और सम्मान का संदेश पहुंचेगा जिनके जीवन में इस त्योहार का विशेष महत्व है।
इस अभियान से बच्चों को सामाजिक सहभागिता, सेवा भावना और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के महत्व को समझने का अवसर मिलेगा।
शिक्षा निकेतन स्कूल, टेल्को द्वारा भारतीय डाक विभाग की रक्षाबंधन विशेष प्रतियोगिता को दिया गया समर्थन इस अभियान की सफलता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्राचार्या श्रीमती सुमिता डे ने हाथ से बनी राखियों के महत्व, भारतीय संस्कृति के संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। विद्यालय द्वारा सभी छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी का आश्वासन यह दर्शाता है कि यह प्रतियोगिता केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बच्चों में रचनात्मकता, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक संवेदनशीलता और सांस्कृतिक मूल्यों को विकसित करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी।












