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Collectorate में आयोजित जन शिकायत निवारण दिवस में उप विकास आयुक्त ने सुनीं नागरिकों की समस्याएं समयबद्ध कार्रवाई के दिए निर्देश

On: July 10, 2026 6:09 PM
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पूर्वी सिंहभूम: जिला प्रशासन द्वारा आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित जन शिकायत निवारण दिवस में शुक्रवार को Collectorate परिसर में बड़ी संख्या में नागरिक पहुंचे। उपायुक्त श्री राजीव रंजन के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त श्री नागेन्द्र पासवान ने स्वयं उपस्थित होकर जिले के विभिन्न प्रखंडों, पंचायतों और शहरी क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान लोगों ने अपनी व्यक्तिगत और जनहित से जुड़ी समस्याओं को आवेदन और ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष रखा।

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जन शिकायत निवारण दिवस का उद्देश्य यही है कि आम नागरिकों को अपनी समस्या लेकर इधर-उधर भटकना न पड़े और एक ही मंच पर उनकी शिकायतें संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच सकें। इसी कड़ी में समाहरणालय में आयोजित इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण मामलों को उठाया गया, जिन पर प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

दबंगों द्वारा घर पर तालाबंदी से लेकर पेंशन भुगतान तक उठे कई गंभीर मुद्दे

जन शिकायत निवारण दिवस के दौरान जिन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया, उनमें कई मामले सीधे तौर पर आम लोगों के जीवन और अधिकारों से जुड़े थे। कुछ नागरिकों ने दबंगों द्वारा घर पर तालाबंदी किए जाने की शिकायत दर्ज कराई, तो कई लोगों ने लंबित पेंशन भुगतान, वृद्धावस्था पेंशन, मानदेय भुगतान और दाखिल-खारिज से संबंधित समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा।

इसके अलावा ग्राम सभा के अधिकारों की अवहेलना, दुकान आवंटन, शौचालय निर्माण, और अन्य जनहित से जुड़े मामलों को लेकर भी आवेदन प्राप्त हुए। यह साफ दिखा कि जिले के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की समस्याएं अलग-अलग प्रकार की हैं, लेकिन उनका समाधान प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध तरीके से होना जरूरी है।

उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान ने सुनी हर शिकायत

जन शिकायत निवारण दिवस के दौरान उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान ने प्रत्येक आवेदक की समस्या को गंभीरता से सुना। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि कोई भी नागरिक बिना अपनी बात रखे वापस न जाए। लोगों द्वारा प्रस्तुत आवेदन, ज्ञापन और शिकायतों को संबंधित विभागों के अनुसार अलग-अलग दर्ज किया गया, ताकि आगे की कार्रवाई में किसी प्रकार की देरी न हो।

उप विकास आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता आम लोगों की समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल शिकायतें लेना नहीं, बल्कि उन शिकायतों का वास्तविक और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना भी है। यही कारण है कि सभी आवेदनों पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया।

संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को दिए गए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश

प्राप्त सभी मामलों पर संज्ञान लेते हुए उप विकास आयुक्त ने संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को नियमानुसार और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जन शिकायत निवारण दिवस में आने वाले लोगों की उम्मीदें प्रशासन से जुड़ी होती हैं, इसलिए शिकायतों को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।

उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि जो भी आवेदन उन्हें अग्रसारित किए जाएं, उनका गंभीरता से अध्ययन कर त्वरित निष्पादन किया जाए। साथ ही, यदि किसी मामले में जांच, स्थल निरीक्षण या अन्य विभागीय समन्वय की आवश्यकता हो, तो उसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उनका जोर इस बात पर था कि नागरिकों को राहत जल्द से जल्द मिले।

जन शिकायत निवारण दिवस का उद्देश्य: जनता को एक मंच पर समाधान

जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जन शिकायत निवारण दिवस का मुख्य उद्देश्य यह है कि आम लोगों को अपनी समस्या के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इस मंच पर नागरिक सीधे प्रशासन के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं और प्रशासनिक अधिकारी उसी समय संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए निर्देशित कर सकते हैं।

इस तरह के कार्यक्रम शासन और जनता के बीच संवाद का मजबूत माध्यम बनते हैं। इससे न केवल लोगों की शिकायतें दर्ज होती हैं, बल्कि प्रशासन को भी यह समझने में मदद मिलती है कि जमीनी स्तर पर किन-किन समस्याओं का सामना लोग कर रहे हैं। जन शिकायत निवारण दिवस लोकतांत्रिक प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने का एक प्रभावी प्रयास माना जाता है।

पेंशन और मानदेय से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान की जरूरत

जन शिकायत निवारण दिवस में जो आवेदन सामने आए, उनमें पेंशन और मानदेय से जुड़े मामलों की संख्या भी महत्वपूर्ण रही। लंबित पेंशन भुगतान, वृद्धावस्था पेंशन और मानदेय भुगतान जैसी समस्याएं सीधे तौर पर गरीब, बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं। ऐसे मामलों में देरी का मतलब है कि लाभार्थियों को उनकी जरूरी आर्थिक सहायता समय पर नहीं मिल पा रही है।

इसलिए इन मामलों पर प्रशासन का गंभीर होना बेहद आवश्यक है। उप विकास आयुक्त द्वारा ऐसे मामलों पर संबंधित अधिकारियों को निर्देश देना इस बात का संकेत है कि प्रशासन इन शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहता है। यदि इन समस्याओं का समय पर समाधान होता है, तो इसका सीधा लाभ समाज के कमजोर वर्गों को मिलेगा।

जमीन दाखिल-खारिज और आवंटन संबंधी शिकायतें भी रहीं प्रमुख

जिले में भूमि और संपत्ति से जुड़े विवाद लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण रहे हैं। जन शिकायत निवारण दिवस में दाखिल-खारिज, दुकान आवंटन, और अन्य भूमि संबंधी मामलों पर भी आवेदन प्राप्त हुए। ऐसे मामलों में अक्सर प्रक्रिया लंबी होने, रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियों या स्थानीय स्तर पर विवाद के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

प्रशासन ने इन शिकायतों को भी गंभीरता से लिया है। यदि जमीन और आवंटन संबंधी मामलों का समयबद्ध समाधान हो, तो इससे कई परिवारों और छोटे व्यवसायियों को राहत मिल सकती है। साथ ही, इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।

ग्राम सभा के अधिकारों और जनहित के मुद्दों को भी उठाया गया

जन शिकायत निवारण दिवस के दौरान ग्राम सभा के अधिकारों की अवहेलना जैसे महत्वपूर्ण विषय भी सामने आए। यह मामला केवल किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि सामुदायिक अधिकारों और स्थानीय स्वशासन से जुड़ा हुआ है। ग्राम सभा ग्रामीण प्रशासन और विकास की एक अहम इकाई है, इसलिए उसके अधिकारों की अनदेखी होना गंभीर चिंता का विषय माना जाता है।

इसके अलावा शौचालय निर्माण और अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों को भी नागरिकों ने प्रशासन के सामने रखा। यह दिखाता है कि लोग अब बुनियादी सुविधाओं और अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं और प्रशासन से जवाबदेही की अपेक्षा रखते हैं। ऐसे मामलों पर कार्रवाई से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विकास की रफ्तार को मजबूती मिल सकती है।

प्रशासन ने त्वरित और प्रभावी समाधान पर दिया जोर

उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान ने स्पष्ट कहा कि जन शिकायत निवारण दिवस में प्राप्त आवेदनों का त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे शिकायतों को गंभीरता से लें और उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा करें। केवल आवेदन प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका निष्पादन भी उतना ही जरूरी है।

प्रशासन की यह सोच आम जनता के लिए राहतभरी मानी जा रही है। यदि इस तरह के निर्देशों का जमीनी स्तर पर सही पालन होता है, तो जन शिकायत निवारण दिवस वास्तव में लोगों के लिए एक असरदार मंच साबित हो सकता है।

जनता और प्रशासन के बीच विश्वास बढ़ाने की दिशा में अहम पहल

जन शिकायत निवारण दिवस जैसे कार्यक्रम जनता और प्रशासन के बीच भरोसे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब कोई नागरिक अपनी समस्या सीधे अधिकारियों के सामने रखता है और उस पर तुरंत संज्ञान लिया जाता है, तो लोगों का विश्वास प्रशासनिक व्यवस्था पर बढ़ता है।

पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा समाहरणालय में इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन इस बात का संकेत है कि प्रशासन लोगों की समस्याओं को सुनने और उन्हें हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि शिकायतों के समाधान की गति और गुणवत्ता बनी रहती है, तो यह पहल जिले के लिए एक सकारात्मक प्रशासनिक मॉडल बन सकती है।

Collectorate , जमशेदपुर में आयोजित जन शिकायत निवारण दिवस आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की शिकायतें सुनीं और संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। दबंगों द्वारा तालाबंदी, लंबित पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, मानदेय भुगतान, दाखिल-खारिज, ग्राम सभा अधिकार, दुकान आवंटन और शौचालय निर्माण जैसे मामलों पर प्रशासन द्वारा संज्ञान लिया जाना आम लोगों के लिए राहत की बात है।

अब सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि इन शिकायतों पर जमीनी स्तर पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ कार्रवाई होती है। यदि प्रशासन अपने निर्देशों के अनुरूप काम करता है, तो जन शिकायत निवारण दिवस वास्तव में आम जनता के लिए न्याय और समाधान का मजबूत मंच बन सकता है।

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