
आगरा, 19 जून 2026। भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय की पहल पर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में प्रथम ब्रिक्स एमएसएमई फोरम और तीसरी एसएमई कार्य समूह (SMEWG) की बैठक आयोजित की जाएगी। “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” विषय पर आयोजित इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों और सहयोगी देशों के नीति निर्माता, उद्योगपति, उद्यमी और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भविष्य के लिए तैयार एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर विचार-विमर्श करेंगे।

यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनेक चुनौतियों और अवसरों के दौर से गुजर रही है। बदलती तकनीक, जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों और डिजिटल परिवर्तन के बीच छोटे और मध्यम उद्यमों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में ब्रिक्स देशों का यह मंच वैश्विक स्तर पर एमएसएमई क्षेत्र को नई दिशा देने की उम्मीद जगाता है।
20 से अधिक देशों की होगी भागीदारी
फोरम में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इन देशों के सरकारी अधिकारियों, व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच एमएसएमई क्षेत्र की चुनौतियों, संभावनाओं और सहयोग के नए अवसरों पर व्यापक चर्चा होगी। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना तथा उनके लिए एक मजबूत और टिकाऊ व्यावसायिक वातावरण विकसित करना है।
भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना एमएसएमई क्षेत्र
भारत का एमएसएमई क्षेत्र आज देश की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता है। वर्तमान में देश में 8.6 करोड़ से अधिक एमएसएमई उद्यम संचालित हो रहे हैं, जो आर्थिक विकास को गति देने के साथ-साथ करोड़ों लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।
यह क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 31.1 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है। इसके अलावा विनिर्माण उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 35.4 प्रतिशत है, जबकि भारत के कुल निर्यात में लगभग 48.58 प्रतिशत योगदान इसी क्षेत्र से आता है।
इन आंकड़ों के पीछे लाखों छोटे उद्यमियों, कारीगरों, स्टार्टअप्स और नवाचार करने वाले युवाओं की मेहनत छिपी हुई है। गांवों में हस्तशिल्प उत्पाद बनाने वाले कारीगरों से लेकर अत्याधुनिक तकनीक आधारित स्टार्टअप तक, एमएसएमई क्षेत्र भारत की आर्थिक विविधता और उद्यमशीलता का जीवंत उदाहरण बन चुका है।
प्रदर्शनी में दिखेगी भारतीय उद्यमिता की ताकत
कार्यक्रम की शुरुआत एमएसएमई क्षेत्र की उपलब्धियों और नवाचारों को प्रदर्शित करने वाली विशेष प्रदर्शनी के उद्घाटन से होगी। इस प्रदर्शनी में विभिन्न राज्यों के उद्यमी अपने उत्पादों, तकनीकों और सफल व्यवसाय मॉडल का प्रदर्शन करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शनी भारतीय उद्यमिता की क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगी। साथ ही विदेशी प्रतिनिधियों को भारत के तेजी से विकसित हो रहे एमएसएमई क्षेत्र को करीब से समझने का मौका मिलेगा।
वित्त, तकनीक और स्थिरता पर विशेष चर्चा
सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर अलग-अलग सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें एमएसएमई के लिए वित्तीय संसाधनों तक पहुंच, नई तकनीकों का उपयोग, डिजिटलीकरण और सतत विकास जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।
विशेष रूप से “एमएसएमई के लिए वित्त तक पहुंच”, “एमएसएमई के लिए प्रौद्योगिकी तक पहुंच” और “स्थिरता उन्मुख एमएसएमई का विकास” विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त और तकनीक तक आसान पहुंच छोटे उद्योगों की विकास यात्रा को तेज कर सकती है।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के दौर में तकनीकी नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे नए उपकरण एमएसएमई क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। फोरम में इस बात पर भी विचार किया जाएगा कि छोटे उद्यम इन तकनीकों का लाभ उठाकर वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति कैसे मजबूत कर सकते हैं।
सतत विकास और हरित अर्थव्यवस्था पर रहेगा फोकस
आज दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। ऐसे में ब्रिक्स एमएसएमई फोरम में हरित उद्योग, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन प्रणालियों पर भी चर्चा होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में वही उद्योग सफल होंगे जो आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को भी निभाएंगे। इसलिए एमएसएमई क्षेत्र को भी स्थिरता आधारित विकास मॉडल अपनाने की आवश्यकता है।
ब्रिक्स सहयोग को मिलेगी नई मजबूती
फोरम के माध्यम से ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। विभिन्न देशों के प्रतिनिधि अपने अनुभव, नीतिगत सफलताएं और नवाचारों के उदाहरण साझा करेंगे, जिससे सहभागी देशों को एक-दूसरे से सीखने और बेहतर रणनीतियां विकसित करने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मंच केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और संयुक्त परियोजनाओं के लिए भी रास्ते खोलेगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में एमएसएमई की बढ़ेगी भूमिका
प्रथम ब्रिक्स एमएसएमई फोरम इस बात का संकेत है कि दुनिया के प्रमुख उभरते देश छोटे और मध्यम उद्यमों को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन मान रहे हैं। वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एमएसएमई क्षेत्र रोजगार सृजन, नवाचार और समावेशी विकास का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।
आगरा में आयोजित यह सम्मेलन न केवल ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में एमएसएमई क्षेत्र की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। सम्मेलन से निकलने वाले सुझाव और साझेदारियां आने वाले वर्षों में करोड़ों उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती हैं।







































