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उन्नत Agriculture महोत्सव की घोषणा अब बनेगी खेतों में बदलाव की ठोस कहानी शिवराज सिंह चौहान ने तैयार किया कृषि परिवर्तन का व्यापक रोडमैप

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On: June 4, 2026 7:28 PM
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नई दिल्ली: किसानों की आय बढ़ाने Agriculture को अधिक लाभकारी बनाने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के चार महत्वपूर्ण जिलों रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास के लिए तैयार विशेष कृषि रोडमैप को लेकर नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। यह रोडमैप केवल कृषि विकास की योजना नहीं, बल्कि खेत, किसान और भविष्य की खेती को केंद्र में रखकर तैयार किया गया एक व्यापक परिवर्तनकारी अभियान माना जा रहा है।

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बैठक में मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना, केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ तथा विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य रायसेन में आयोजित उन्नत Agriculture महोत्सव के दौरान घोषित कृषि विकास योजनाओं को प्रभावी क्रियान्वयन के साथ जमीनी स्तर तक पहुंचाना था।

प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में Agriculture परिवर्तन का नया अभियान

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में देश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, वैज्ञानिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। इसी सोच के तहत मध्य प्रदेश के इन चार जिलों को कृषि विकास का आदर्श मॉडल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह केवल सरकारी योजना नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता सुधारने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने, वैज्ञानिक खेती अपनाने और विभिन्न कृषि योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन का एक व्यापक मिशन है।

शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि Agriculture क्षेत्र में वास्तविक बदलाव तभी संभव होगा जब योजनाओं का लाभ सीधे किसान के खेत तक पहुंचे और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे।

किसान की आय होगी सफलता का सबसे बड़ा पैमाना

बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस Agriculture रोडमैप की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार किसानों की शुद्ध आय होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक जिले में वर्तमान किसान आय का विस्तृत आंकलन किया जाए और आने वाले वर्षों में उसमें होने वाली वृद्धि का नियमित मूल्यांकन किया जाए।

उन्होंने कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। यह देखना अधिक महत्वपूर्ण है कि उन योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंच रहा है या नहीं। किसान की आर्थिक स्थिति में सुधार ही इस पूरी पहल की सफलता का सबसे बड़ा संकेतक होगा।

जल संकट और अल नीनो की चुनौती से निपटने की तैयारी

बैठक में जलवायु परिवर्तन और संभावित अल नीनो प्रभाव पर भी गंभीर चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भविष्य में जल संकट और मौसम संबंधी चुनौतियां कृषि क्षेत्र को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अभी से ऐसी रणनीति तैयार करनी होगी जिससे रबी और खरीफ दोनों फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा कि अल नीनो जैसी परिस्थितियों को केवल संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे कृषि क्षेत्र में नवाचार और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग का अवसर भी माना जाना चाहिए। यदि कठिन परिस्थितियों में भी किसानों की फसल और आय सुरक्षित रहती है तो वैज्ञानिक खेती के प्रति किसानों का विश्वास और मजबूत होगा।

वन टीम वन टॉस्क के सिद्धांत पर होगा काम

केंद्रीय मंत्री ने Agriculture रोडमैप के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए “वन टीम वन टॉस्क” का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर गठित समितियों को केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्पष्ट जवाबदेही के साथ परिणाम देने होंगे।

उन्होंने निर्देश दिया कि हर स्तर पर यह तय किया जाए कि कौन अधिकारी क्या काम करेगा और किस समय सीमा में उसे पूरा करेगा। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

राष्ट्रीय समिति को नीतिगत बाधाओं की पहचान, केंद्र और राज्य की योजनाओं के प्रभावी समन्वय तथा जिला स्तर तक निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विभिन्न योजनाओं का होगा समन्वित क्रियान्वयन

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रधानमंत्री Agriculture सिंचाई योजना (PMKSY), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM), राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (NMEO), मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) तथा सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) जैसी योजनाओं को अलग-अलग नहीं चलाया जाएगा।

इन सभी योजनाओं का समेकित प्रभाव सीधे किसान के खेत पर दिखाई देना चाहिए। इसके लिए विभागीय समन्वय को और मजबूत किया जाएगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) किसानों के लिए प्रदर्शन प्लॉट विकसित करेंगे। वहीं ATMA के माध्यम से किसानों तक नई तकनीकों और वैज्ञानिक जानकारी का प्रसार किया जाएगा।

जिला स्तर पर निगरानी और जवाबदेही

चारों जिलों में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में विशेष समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों में Agriculture विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है।

बैठक में मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण, सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं की प्रगति, कृषि यंत्रीकरण उपकरणों की उपलब्धता और प्रत्येक ब्लॉक में कस्टम हायरिंग सेंटर की कार्यशीलता की समीक्षा की गई।

केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से मिलना चाहिए।

फसल विविधीकरण पर विशेष जोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि Agriculture क्षेत्र की स्थिरता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने चारों जिलों के लिए विशेष कृषि मॉडल तैयार किए हैं। इसके तहत:

  • विदिशा में सोयाबीन और मक्का आधारित अंतरफसल प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • सीहोर में उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • रायसेन में धान और लहसुन आधारित कृषि प्रणाली विकसित की जाएगी।
  • देवास में मक्का, लहसुन और प्याज आधारित कृषि मॉडल को बढ़ावा मिलेगा।

इन मॉडलों के माध्यम से किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

समेकित Agriculture प्रणाली को मिलेगा बढ़ावा

केंद्रीय मंत्री ने खरीफ 2026 से प्रत्येक जिले के कम से कम एक ब्लॉक में समेकित Agriculture प्रणाली (Integrated Farming System) का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना अब पर्याप्त नहीं है। किसानों को डेयरी, मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों से भी जोड़ना होगा।

इससे किसानों के लिए आय के अनेक स्रोत विकसित होंगे और वे किसी एक फसल पर निर्भर नहीं रहेंगे।

एफपीओ और बागवानी क्षेत्र को मिलेगी नई ताकत

बैठक में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को मजबूत बनाने और बागवानी क्षेत्र के विस्तार पर भी विशेष जोर दिया गया।

निर्देश दिए गए कि चारों जिलों के एफपीओ को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए और उन्हें मूल्य संवर्धन तथा विपणन सुविधाओं से जोड़ा जाए।

इसके साथ ही MIDH योजना के तहत नर्सरी विकास, कोल्ड स्टोरेज और शीत श्रृंखला से संबंधित परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।

किसान प्रशिक्षण बनेगा सफलता की कुंजी

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी Agriculture योजना की सफलता किसानों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर निर्भर करती है। इसलिए कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका को और अधिक सक्रिय बनाया जाएगा।

उन्होंने निर्देश दिया कि भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल और केंद्रीय Agriculture अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल जैसे प्रमुख संस्थानों की विशेषज्ञता का लाभ किसानों तक पहुंचाया जाए।

प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक अग्रणी किसान तैयार करने की योजना भी बनाई गई है, जो स्थानीय स्तर पर अन्य किसानों को नई तकनीकों और आधुनिक खेती के लिए प्रेरित करेगा।

देश के लिए मॉडल बन सकता है यह कृषि रोडमैप

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कृषि रोडमैप सफलतापूर्वक लागू होता है तो यह केवल मध्य प्रदेश के चार जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य राज्यों और जिलों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।

जल संरक्षण, वैज्ञानिक खेती, फसल विविधीकरण, कृषि यंत्रीकरण, समेकित कृषि प्रणाली और किसान आय वृद्धि जैसे विषयों को एक साथ जोड़ने का यह प्रयास कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला सकता है।

रायसेन के उन्नत Agriculture महोत्सव में की गई घोषणा अब एक ठोस और क्रियान्वयन आधारित कृषि मिशन का रूप लेती दिखाई दे रही है। केंद्रीय Agriculture मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तैयार यह कृषि रोडमैप किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

यदि यह मॉडल सफल होता है तो मध्य प्रदेश के रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जिले न केवल Agriculture विकास के आदर्श केंद्र बनेंगे, बल्कि पूरे देश के लिए कृषि परिवर्तन और किसान समृद्धि का नया उदाहरण भी प्रस्तुत करेंगे।

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