
दुमका: झारखंड Dumka की राजनीति में एक बार फिर आदिवासी अस्मिता और पहचान का मुद्दा गरमा गया है। राज्य सरकार द्वारा दुमका स्थित फूलो झानो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का नाम बदलकर “गवर्नमेंट हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज” किए जाने के मामले ने अब राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने इस फैसले को आदिवासी महापुरुषों के सम्मान पर हमला बताते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।

Dumka दौरे पर पहुंचे चम्पाई सोरेन ने स्थानीय मांझी बाबा, युवाओं और रैयतों के साथ अस्पताल परिसर पहुंचकर सरकार के इस फैसले का खुलकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास और महापुरुषों की पहचान को मिटाने की कोशिश किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
महापुरुषों के नाम हटाना आदिवासी समाज का अपमान
पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने कहा कि जब किसी संस्थान का नाम किसी महापुरुष के नाम पर रखा जाता है, तो उसके पीछे उद्देश्य उस महान व्यक्तित्व को सम्मान देना होता है। लेकिन यदि बिना किसी सार्वजनिक सूचना और चर्चा के उस नाम को हटा दिया जाए, तो यह साफ दर्शाता है कि सरकार की मंशा क्या है।
उन्होंने कहा कि फूलो-झानो मुर्मू आदिवासी समाज की वीरांगनाएं थीं, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके नाम पर बने मेडिकल कॉलेज का नाम बदलना केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि आदिवासी इतिहास और पहचान को कमजोर करने की कोशिश है।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि यह तथाकथित “अबुआ सरकार” न केवल सामाजिक व्यवस्था को बिगाड़ने वाले तत्वों को संरक्षण दे रही है, बल्कि आदिवासी महापुरुषों के योगदान को भी भुलाने का प्रयास कर रही है।
30 जून तक नाम नहीं बदला तो समाज खुद करेगा सुधार
चम्पाई सोरेन ने राज्य सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी 30 जून तक मेडिकल कॉलेज के नाम में फिर से फूलो झानो मुर्मू नहीं जोड़ा गया, तो आदिवासी समाज स्वयं आगे आकर इसे सुधारने का काम करेगा।
उन्होंने कहा कि हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग दुमका पहुंचेंगे और अपने महापुरुषों के सम्मान की रक्षा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आदिवासी समाज अपने इतिहास, संस्कृति और पहचान के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा।
उनका यह बयान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है।
दुमका में बढ़ा राजनीतिक माहौल भाजपा ने सरकार को घेरा
फूलो झानो मेडिकल कॉलेज का नाम बदलने के मामले को लेकर भाजपा लगातार राज्य सरकार पर हमलावर है। भाजपा नेताओं का कहना है कि झारखंड की पहचान आदिवासी संस्कृति और उनके महापुरुषों से जुड़ी हुई है। ऐसे में उनके नाम हटाना राज्य की आत्मा को कमजोर करने जैसा है।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि आदिवासी समाज केवल वोट बैंक नहीं है, बल्कि अपनी समृद्ध परंपराओं और गौरवशाली इतिहास के साथ इस राज्य की नींव है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसे फैसले ले रही है, जिससे आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हो रही हैं।
फूलो-झानो मुर्मू का इतिहास और योगदान
फूलो और झानो मुर्मू संथाल विद्रोह की वीरांगनाएं मानी जाती हैं। उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आदिवासी समाज उन्हें साहस, संघर्ष और सम्मान के प्रतीक के रूप में देखता है।
झारखंड में कई संस्थानों और योजनाओं का नाम उनके नाम पर रखा गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान और संघर्ष को याद रख सकें। ऐसे में मेडिकल कॉलेज से उनका नाम हटाए जाने पर समाज के लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल नाम का मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और सम्मान का प्रश्न है।

आदिवासी संस्कृति की रक्षा कर रही है केन्द्र सरकार
अपने संबोधन के दौरान चम्पाई सोरेन ने केन्द्र सरकार की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यूसीसी (समान नागरिक संहिता) लागू करने की प्रक्रिया में आदिवासी समाज को इससे बाहर रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह फैसला आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और विशिष्ट जीवनशैली के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हजारों वर्षों पुरानी आदिवासी संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए केन्द्र सरकार गंभीरता से काम कर रही है।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, भाषा, परंपरा और इतिहास से जुड़ी हुई है। इसलिए इन मूल्यों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।
स्थानीय लोगों और युवाओं में दिखा आक्रोश
दुमका मेडिकल कॉलेज परिसर में चम्पाई सोरेन के साथ पहुंचे स्थानीय युवाओं और रैयतों ने भी सरकार के फैसले के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। लोगों ने कहा कि सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
कई युवाओं ने कहा कि यदि महापुरुषों के नाम धीरे-धीरे हटाए जाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और नायकों को भूल जाएंगी। इसलिए इस फैसले का विरोध जरूरी है।
स्थानीय मांझी बाबा और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कहा कि आदिवासी समाज हमेशा अपने महापुरुषों के सम्मान के लिए एकजुट रहेगा।
झारखंड की राजनीति में फिर गरमाया आदिवासी अस्मिता का मुद्दा
झारखंड की राजनीति में आदिवासी पहचान और सम्मान हमेशा से महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। फूलो झानो मेडिकल कॉलेज का नाम बदलने का मामला अब इसी दिशा में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति को और अधिक प्रभावित कर सकता है। विपक्ष जहां सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं आदिवासी संगठनों ने भी इस फैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
Dumka में फूलो झानो मेडिकल कॉलेज का नाम बदलने के मामले ने झारखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने इसे आदिवासी महापुरुषों और उनकी विरासत का अपमान बताते हुए सरकार को खुली चेतावनी दी है।
उन्होंने साफ कहा है कि यदि 30 जून तक मेडिकल कॉलेज के नाम में फूलो झानो मुर्मू नहीं जोड़ा गया, तो आदिवासी समाज खुद आगे आकर इसे सुधारने का काम करेगा। अब सभी की नजरें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।








