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Yemenकी जेल में बंद केरल की नर्स निमिषा प्रिया मौत की सजा विवाद और इंसाफ की जंग

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On: May 26, 2026 6:09 PM
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यमन: Yemen की जेल में बंद केरल की नर्स निमिषा प्रिया का मामला पिछले कुछ वर्षों से भारत ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ उन पर अपने बिजनेस पार्टनर की हत्या का गंभीर आरोप है, तो दूसरी ओर उनके परिवार और समर्थक दावा करते हैं कि वह शोषण, धमकी और मानसिक प्रताड़ना की शिकार थीं।
अब जबकि उनकी फांसी की सजा फिलहाल टाल दी गई है, यह मामला कानूनी, मानवीय और कूटनीतिक बहस के केंद्र में आ चुका है।

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बेहतर जिंदगी की तलाश में यमन पहुंचीं निमिषा

केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली निमिषा प्रिया ने नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2008 में नौकरी के लिए यमन का रुख किया। उस समय खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नर्सें रोजगार के लिए जा रही थीं।
सना के एक सरकारी अस्पताल में उन्हें नौकरी मिली और कुछ समय बाद उनकी शादी कोच्चि निवासी टॉमी थॉमस से हुई। पति भी यमन में काम करने लगे और दोनों की एक बेटी हुई।

लेकिन यमन में बढ़ते गृहयुद्ध, आर्थिक संकट और अस्थिर हालात के बीच परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार कठिन होती गई। इसी दौरान निमिषा ने सरकारी नौकरी छोड़कर अपना निजी मेडिकल क्लिनिक खोलने का फैसला किया।

यमनी नागरिक से साझेदारी और बढ़ता विवाद

Yemen के कानून के मुताबिक विदेशी नागरिक अकेले मेडिकल क्लिनिक नहीं चला सकते। इसके लिए स्थानीय नागरिक की साझेदारी जरूरी होती है।
इसी कारण निमिषा ने यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी के साथ साझेदारी कर क्लिनिक शुरू किया।

शुरुआत में यह साझेदारी सामान्य बताई गई, लेकिन बाद में दोनों के संबंधों में तनाव बढ़ने लगा। निमिषा के परिवार और वकीलों का आरोप है कि महदी ने उनका पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया था और वह लगातार उन्हें मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था।
हालांकि महदी के परिवार ने इन सभी आरोपों को खारिज किया और कहा कि निमिषा केवल खुद को बचाने के लिए ऐसी बातें कह रही हैं।

2017 मौत जिसने सबकुछ बदल दिया

जुलाई 2017 में मामला अचानक उस समय गंभीर हो गया, जब तलाल अब्दो महदी की मौत हो गई।

Yemen की जांच एजेंसियों के अनुसार, निमिषा ने महदी को बेहोश करने के लिए इंजेक्शन या दवा की अधिक मात्रा दी थी ताकि वह उसका पासपोर्ट लेकर देश छोड़ सकें। लेकिन ओवरडोज के कारण महदी की मौत हो गई।

जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि मौत के बाद शव को छिपाने की कोशिश की गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शव के टुकड़े कर पानी की टंकी में फेंके गए। इस मामले में एक स्थानीय महिला हनान का नाम भी सामने आया।

इसके बाद निमिषा प्रिया को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर हत्या, शव छिपाने और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।

अदालत का फैसला और मौत की सजा

Yemen की अदालत में चले मुकदमे के बाद वर्ष 2020 में निमिषा प्रिया को हत्या का दोषी ठहराया गया और उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।

बाद में यमन की सर्वोच्च न्यायिक परिषद और हूती नियंत्रित न्यायिक तंत्र ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।
इसके साथ ही निमिषा की स्थिति बेहद गंभीर हो गई, क्योंकि यमन में मौत की सजा के मामलों में कानूनी राहत पाना काफी मुश्किल माना जाता है।

भारत सरकार और परिवार की कोशिशें

निमिषा प्रिया के परिवार ने भारत सरकार से मदद की अपील की।
इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने कूटनीतिक स्तर पर प्रयास शुरू किए। हालांकि भारत और यमन के बीच औपचारिक राजनयिक संपर्क सीमित हैं, क्योंकि यमन लंबे समय से गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।

भारत में सामाजिक संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और धार्मिक नेताओं ने भी निमिषा की रिहाई या सजा कम करने की मांग उठाई।

कुछ रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया कि पीड़ित परिवार को “ब्लड मनी” यानी मुआवजा देकर समझौते की कोशिश हुई, लेकिन इस पर आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई।

2025 में फांसी टली, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, निमिषा प्रिया को जुलाई 2025 में फांसी दी जानी थी।
लेकिन भारत सरकार, मध्यस्थों और अन्य पक्षों की कोशिशों के बाद इस सजा के क्रियान्वयन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।

हालांकि विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि फांसी टलने का मतलब यह नहीं है कि सजा पूरी तरह खत्म हो चुकी है। कानूनी रूप से मौत की सजा अभी भी बनी हुई है और अंतिम निर्णय यमन के अधिकारियों तथा पीड़ित परिवार के रुख पर निर्भर करेगा।

दो पक्षों में बंटा पूरा मामला

यह मामला अब दो अलग-अलग नजरियों से देखा जा रहा है।

पहला पक्ष

समर्थकों का कहना है कि निमिषा एक शोषणकारी और हिंसक परिस्थिति में फंस गई थीं। उनके अनुसार यह घटना जानबूझकर की गई हत्या नहीं, बल्कि दबाव और डर के बीच हुई त्रासदी थी।

दूसरा पक्ष

वहीं महदी के परिवार का कहना है कि यह एक सुनियोजित हत्या थी और दोषी को सजा मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि शोषण की कहानी केवल सहानुभूति हासिल करने के लिए बनाई गई।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

निमिषा प्रिया का केस केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है।
यह खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा, विदेशों में महिलाओं की स्थिति, श्रमिक अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय हस्तक्षेप जैसे बड़े सवाल भी खड़े करता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला भविष्य में भारत की विदेश नीति और प्रवासी भारतीयों से जुड़े कानूनी मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

वर्तमान स्थिति

फिलहाल निमिषा प्रिया Yemen की जेल में ही हैं।
उनकी फांसी पर अस्थायी रोक लगी हुई है, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। भारत सरकार, परिवार और सामाजिक संगठनों की कोशिशें जारी हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या उन्हें अंतिम राहत मिलेगी या यमन की अदालतों का फैसला लागू होगा।

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