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UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 भुवनेश्वर कानपुर और मेरठ में नए परीक्षा केंद्रों से 23,000 से अधिक अभ्यर्थियों को राहत

On: May 21, 2026 3:21 PM
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संघ लोक सेवा आयोग UPSC ने सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2026 को अधिक व्यवस्थित, सुगम और अभ्यर्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग ने इस वर्ष भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ में तीन नए परीक्षा केंद्र स्थापित किए हैं। इन केंद्रों के जुड़ने के बाद अब देशभर में प्रारंभिक परीक्षा केंद्रों की संख्या 80 से बढ़कर 83 हो गई है।

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इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि लगभग 23,000 से अधिक उम्मीदवारों ने इन नए केंद्रों का चयन किया, जिससे पुराने और अधिक भीड़भाड़ वाले परीक्षा केंद्रों पर दबाव कम हुआ है। यूपीएससी का यह कदम लाखों अभ्यर्थियों के लिए राहत लेकर आया है, क्योंकि हर वर्ष परीक्षा केंद्रों पर अत्यधिक भीड़, लंबी यात्रा और अव्यवस्थित प्रबंधन जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।

भुवनेश्वर केंद्र बनने से कटक पर कम हुआ दबाव

ओडिशा के अभ्यर्थियों के लिए यह वर्ष विशेष राहत लेकर आया है। पहले अधिकांश उम्मीदवारों को कटक केंद्र पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे वहां अत्यधिक भीड़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी। अब भुवनेश्वर में नया केंद्र स्थापित होने के बाद बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को नजदीक में परीक्षा सुविधा मिल सकी है।

यूपीएससी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भुवनेश्वर केंद्र के लिए 10,656 आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह संख्या दर्शाती है कि लंबे समय से इस क्षेत्र में एक अतिरिक्त केंद्र की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

भुवनेश्वर केंद्र के खुलने से अभ्यर्थियों को न केवल यात्रा में राहत मिली है बल्कि परीक्षा के दिन होने वाली मानसिक और शारीरिक परेशानी भी कम हुई है। इससे परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन और सुविधा दोनों में सुधार देखने को मिलेगा।

कानपुर केंद्र से लखनऊ का भार हुआ कम

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण यहां UPSC अभ्यर्थियों की संख्या भी काफी अधिक रहती है। पहले बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को लखनऊ केंद्र का चयन करना पड़ता था, जिसके कारण वहां सीटों और व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता था।

अब कानपुर में नए परीक्षा केंद्र की शुरुआत से यह स्थिति काफी हद तक नियंत्रित हुई है। आयोग के अनुसार, कानपुर केंद्र के लिए 6,938 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

कानपुर केंद्र खुलने से आसपास के जिलों जैसे उन्नाव, फतेहपुर, इटावा, कन्नौज और हमीरपुर के उम्मीदवारों को भी सीधा लाभ मिला है। पहले इन क्षेत्रों के छात्रों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन अब उन्हें नजदीकी केंद्र उपलब्ध हो गया है।

मेरठ केंद्र से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उम्मीदवारों को बड़ी राहत

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में UPSC अभ्यर्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में गाजियाबाद केंद्र पर अत्यधिक निर्भरता बनी हुई थी। इसी समस्या को देखते हुए आयोग ने मेरठ में नया परीक्षा केंद्र शुरू किया है।

मेरठ केंद्र को लेकर अभ्यर्थियों में काफी उत्साह देखा गया और यहां 5,902 आवेदन प्राप्त हुए। मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत, शामली और बुलंदशहर जैसे जिलों के उम्मीदवारों को इसका सीधा लाभ मिला है।

इस नए केंद्र से परीक्षा के दौरान यात्रा का समय कम होगा, उम्मीदवारों को आवास और परिवहन की समस्या से राहत मिलेगी और परीक्षा का अनुभव पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित होगा।

UPSC अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने क्या कहा

संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने इस पहल को अभ्यर्थियों की सुविधा से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुगम, सुलभ और प्रभावी बनाना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि नए परीक्षा केंद्र जोड़ने का मुख्य उद्देश्य भीड़भाड़ को कम करना और उम्मीदवारों को उनके निकटतम स्थान पर बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।

डॉ. अजय कुमार ने यह भी कहा कि आयोग भविष्य में भी अभ्यर्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार परीक्षा व्यवस्था में सुधार जारी रखेगा ताकि देशभर के उम्मीदवारों को समान अवसर प्राप्त हो सके।

दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए UPSC की विशेष पहल

UPSC ने इस वर्ष विशिष्ट दिव्यांगता वाले व्यक्तियों (PwBD) के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि दिव्यांग उम्मीदवारों को उनकी पसंद का परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराया जाए, भले ही किसी केंद्र की निर्धारित क्षमता पूरी हो चुकी हो।

जरूरत पड़ने पर आयोग ने अतिरिक्त क्षमता सृजित करने का भी निर्णय लिया है। इसी का परिणाम है कि केवल दिल्ली क्षेत्र में लगभग 805 दिव्यांग उम्मीदवारों को उनकी पसंद का परीक्षा केंद्र आवंटित किया गया।

यह पहल दर्शाती है कि यूपीएससी केवल परीक्षा आयोजित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समावेशी और समान अवसर आधारित व्यवस्था तैयार करने की दिशा में भी गंभीरता से कार्य कर रहा है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा-2026 में रिकॉर्ड आवेदन

इस वर्ष सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2026 के लिए आयोग को कुल 8,19,372 आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह संख्या दर्शाती है कि देशभर में सिविल सेवा के प्रति युवाओं का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है।

हर वर्ष लाखों उम्मीदवार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) और अन्य केंद्रीय सेवाओं में चयन के लिए इस प्रतिष्ठित परीक्षा में शामिल होते हैं।

इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के बीच परीक्षा का सफल संचालन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे में नए परीक्षा केंद्रों की शुरुआत आयोग की दूरदर्शिता और बेहतर प्रशासनिक तैयारी को दर्शाती है।

ड्रॉपडाउन विकल्प से भविष्य में और बढ़ेंगे परीक्षा केंद्र

UPSC ने इस बार आवेदन प्रक्रिया में एक नया ड्रॉपडाउन विकल्प भी जोड़ा है। इसके माध्यम से उम्मीदवार अपने पसंदीदा नजदीकी शहरों का चयन कर सकते हैं।

इस डेटा का उपयोग आयोग भविष्य की योजना तैयार करने में करेगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किन क्षेत्रों में अभ्यर्थियों की संख्या अधिक है और किन शहरों में नए परीक्षा केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता है।

यह कदम भविष्य में परीक्षा केंद्रों के बेहतर वितरण और अभ्यर्थियों की सुविधा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

परीक्षा केंद्रों के विस्तार से अभ्यर्थियों को मिलने वाले प्रमुख लाभ

1. यात्रा खर्च में कमी

नजदीकी परीक्षा केंद्र मिलने से उम्मीदवारों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी, जिससे उनका यात्रा खर्च कम होगा।

2. मानसिक तनाव में कमी

दूरस्थ केंद्रों तक पहुंचने की चिंता समाप्त होने से अभ्यर्थी परीक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

3. समय की बचत

निकट केंद्र होने से उम्मीदवार समय पर परीक्षा केंद्र पहुंच पाएंगे और अनावश्यक देरी से बच सकेंगे।

4. बेहतर परीक्षा प्रबंधन

भीड़ कम होने से परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाएं अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित होंगी।

5. दिव्यांग उम्मीदवारों को सुविधा

PwBD उम्मीदवारों के लिए पसंदीदा केंद्र उपलब्ध होने से समावेशी परीक्षा व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

UPSC की नई रणनीति से मजबूत होगी परीक्षा प्रणाली

UPSC द्वारा उठाए गए ये कदम केवल अस्थायी समाधान नहीं हैं, बल्कि यह देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा प्रणाली को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक मजबूत रणनीति का हिस्सा हैं।

नए परीक्षा केंद्रों की स्थापना, दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए विशेष प्रावधान, और भविष्य के केंद्रों की पहचान के लिए डेटा आधारित योजनाये सभी पहलें आयोग की प्रशासनिक क्षमता और पारदर्शिता को दर्शाती हैं।

भविष्य में और शहरों को मिल सकती है परीक्षा केंद्र की सुविधा

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यूपीएससी अन्य बड़े शहरों और तेजी से विकसित हो रहे शैक्षणिक क्षेत्रों में भी नए केंद्र स्थापित कर सकता है।

यदि ड्रॉपडाउन विकल्प से प्राप्त डेटा में किसी क्षेत्र से बड़ी संख्या में प्राथमिकताएं सामने आती हैं, तो वहां भविष्य में परीक्षा केंद्र खोले जाने की संभावना बढ़ जाएगी। इससे देशभर के उम्मीदवारों को समान अवसर और बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

UPSC द्वारा भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ में नए परीक्षा केंद्र स्थापित करने का निर्णय लाखों अभ्यर्थियों के लिए राहतभरा और सकारात्मक कदम साबित हुआ है। लगभग 23,000 उम्मीदवारों द्वारा इन केंद्रों का चयन यह साबित करता है कि लंबे समय से इन क्षेत्रों में अतिरिक्त केंद्रों की आवश्यकता थी।

इसके साथ ही दिव्यांग उम्मीदवारों को प्राथमिकता देना, आवेदन प्रक्रिया में तकनीकी सुधार करना और भविष्य की योजना के लिए डेटा आधारित दृष्टिकोण अपनाना आयोग की आधुनिक सोच को दर्शाता है।

सिविल सेवा परीक्षा जैसी विशाल और प्रतिष्ठित परीक्षा में इस प्रकार के सुधार न केवल परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करेंगे, बल्कि अभ्यर्थियों के अनुभव को भी अधिक सहज, पारदर्शी और प्रभावी बनाएंगे।

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