
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में Mukbadhir व्यक्तियों के अधिकारों और सम्मानजनक जीवन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन, जिला पूर्वी सिंहभूम के जिला अध्यक्ष श्री एस. एन. पाल के नेतृत्व में ईस्ट सिंहभूम एसोसिएशन ऑफ द डेफ संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर उपायुक्त महोदय से मुलाकात की और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

मंगलवार, 19 मई 2026 को दिए गए ज्ञापन में मूकबधिर व्यक्तियों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने, विशेष पहचान चिन्ह को मान्यता देने और प्रशासनिक स्तर पर उनके साथ संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
इस पहल को दिव्यांग अधिकारों और सामाजिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
झारखंड में Mukbadhir को ड्राइविंग लाइसेंस देने की उठी मांग
ज्ञापन में कहा गया कि देश के कई अन्य राज्यों में Mukbadhir व्यक्तियों को ड्राइविंग लाइसेंस प्रदान किए जा रहे हैं, लेकिन झारखंड राज्य में अब तक इस दिशा में स्पष्ट व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।
संगठन का कहना है कि मूकबधिर व्यक्ति शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ होते हैं। वे वाहन चलाने में सक्षम हैं, लेकिन केवल सुन और बोल नहीं पाते। इसके बावजूद उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिल पाना उनके अधिकारों का हनन है।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि झारखंड सरकार इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए मूकबधिर व्यक्तियों को भी वाहन चलाने की वैधानिक अनुमति प्रदान करे।
वाहनों पर विशेष प्रतीक चिन्ह लगाने की मांग
संगठन ने ज्ञापन में यह भी मांग की कि Mukbadhir व्यक्तियों के वाहनों पर एक विशेष प्रतीक चिन्ह लगाने की अनुमति दी जाए।
इस प्रतीक चिन्ह का उद्देश्य यह होगा कि आम नागरिकों के साथ-साथ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी यह समझ सकें कि संबंधित वाहन चालक मूकबधिर है। इससे सड़क पर संवाद की कठिनाइयों को कम किया जा सकेगा और अनावश्यक विवादों से बचाव होगा।
संगठन का कहना है कि इस प्रकार की व्यवस्था कई राज्यों में प्रभावी रूप से लागू है और इससे Mukbadhir व्यक्तियों को काफी सुविधा मिलती है।
वाहन जांच के दौरान होती हैं समस्याएं
ज्ञापन में बताया गया कि वाहन जांच या प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान Mukbadhir व्यक्तियों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
जब पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी आवाज देकर वाहन रोकने का संकेत देते हैं, तब मूकबधिर व्यक्ति उसे सुन नहीं पाते। ऐसी स्थिति में कई बार गलतफहमी पैदा हो जाती है और विवाद की स्थिति बन जाती है।
संगठन ने कहा कि कई मामलों में मूकबधिर व्यक्तियों के साथ दुर्व्यवहार और हाथापाई जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं, क्योंकि वे अपनी स्थिति तुरंत स्पष्ट नहीं कर पाते।
सरकारी पहचान पत्र को मान्यता देने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र (आई कार्ड) और विशेष प्रतीक चिन्ह को आधिकारिक मान्यता देने की मांग भी उठाई।
संगठन का कहना है कि यदि प्रशासनिक अधिकारियों को इस पहचान प्रणाली की जानकारी होगी, तो वे Mukbadhir व्यक्तियों की स्थिति को आसानी से समझ सकेंगे और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इससे न केवल मूकबधिर व्यक्तियों की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि समाज में उनके प्रति संवेदनशीलता भी विकसित होगी।
Mukbadhir व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा पर जोर
भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन ने कहा कि Mukbadhir व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
दिव्यांगजन भी समाज के समान अधिकार वाले नागरिक हैं और उन्हें शिक्षा, रोजगार, यातायात तथा अन्य सुविधाओं में बराबरी का अवसर मिलना चाहिए।
संगठन ने सरकार से आग्रह किया कि मूकबधिर व्यक्तियों के लिए अलग से स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानियों का सामना न करना पड़े।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे कई सामाजिक कार्यकर्ता
Mukbadhir साथियों के अधिकारों और समस्याओं के समाधान को लेकर सौंपे गए ज्ञापन में भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष श्री एस. एन. पाल के नेतृत्व में कई सामाजिक कार्यकर्ता और संगठन के सदस्य मौजूद रहे।
इस दौरान सोमनाथ पाल, संजय कुमार सिंह, लालू शर्मा, राधेश्याम यादव, दिलीप कुमार पाल एवं मकसूद प्रतिनिधिमंडल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
सभी ने एक स्वर में मूकबधिर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें सम्मानजनक जीवन देने की मांग उठाई।
दिव्यांगजनों के लिए संवेदनशील व्यवस्था की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि दिव्यांगजनों के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें व्यवहारिक स्तर पर लागू करना भी जरूरी है।
मूकबधिर व्यक्तियों के लिए सड़क सुरक्षा, वाहन संचालन और प्रशासनिक संवाद से जुड़ी विशेष व्यवस्था होने से उनकी जिंदगी अधिक आसान और सुरक्षित बन सकती है।
ऐसी पहलें समाज में समानता और मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता को भी मजबूत करती हैं।
समाज में बढ़ रही जागरूकता
पूर्वी सिंहभूम में उठी यह मांग दर्शाती है कि अब समाज में दिव्यांगजनों के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। लोग अब चाहते हैं कि मूकबधिर और अन्य दिव्यांग व्यक्तियों को भी समान अवसर और सम्मान मिले।
संगठनों द्वारा लगातार आवाज उठाने से सरकार और प्रशासन का ध्यान भी इन मुद्दों की ओर आकर्षित हो रहा है।
उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी और मूकबधिर व्यक्तियों के हित में सकारात्मक निर्णय लेगी।
पूर्वी सिंहभूम में भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन और ईस्ट सिंहभूम एसोसिएशन ऑफ द डेफ द्वारा मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन Mukbadhir व्यक्तियों के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने, विशेष प्रतीक चिन्ह को मान्यता देने और प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग समाज में समान अधिकार और सम्मान की भावना को मजबूत करती है।
यदि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक कदम उठाती है, तो इससे मूकबधिर व्यक्तियों को न केवल आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी बल्कि वे समाज की मुख्यधारा में और अधिक मजबूती से जुड़ सकेंगे।








