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Potka के रसूनचोपा गांव के मातृहीन छात्र बिशु सोरेन को मिला नया जीवन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय गोलमुरी में हुआ नामांकन

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On: May 18, 2026 3:58 PM
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झारखंड: के पूर्वी सिंहभूम जिले के Potka प्रखंड अंतर्गत रसूनचोपा गांव से एक ऐसी मानवीय और प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि समाज में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगा सकते हैं। मातृहीन छात्र बिशु सोरेन को पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल के अथक प्रयासों से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय गोलमुरी में सातवीं कक्षा में नामांकन मिल गया है। यह नामांकन केवल एक छात्र के विद्यालय में प्रवेश की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक जीवंत मिसाल बन गई है।

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मां के निधन के बाद टूट चुका था परिवार

Potka प्रखंड के रसूनचोपा गांव निवासी पृथ्वी सोरेन का जीवन वर्ष 2023 में उस समय पूरी तरह बदल गया जब उनकी पत्नी का असामयिक निधन हो गया। पत्नी की मृत्यु के बाद दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी पूरी तरह पृथ्वी सोरेन के कंधों पर आ गई। आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी और परिवार की रोजी-रोटी चलाने के लिए उन्हें जमशेदपुर जाकर ठेकेदारी मजदूरी करनी पड़ती थी।

ऐसी परिस्थिति में बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा, स्वास्थ्य और उचित परवरिश एक गंभीर चुनौती बन चुकी थी। दिनभर मजदूरी और बच्चों की चिंता ने पृथ्वी सोरेन को मानसिक रूप से भी परेशान कर दिया था। परिवार में मां की कमी बच्चों के जीवन पर गहरा असर डाल रही थी और भविष्य अंधकारमय दिखाई देने लगा था।

बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित थे पिता पृथ्वी सोरेन

पृथ्वी सोरेन अपने दोनों बच्चों के भविष्य को लेकर लगातार चिंतित रहते थे। वे चाहते थे कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें, लेकिन आर्थिक तंगी और पारिवारिक परिस्थितियां उनके सपनों के रास्ते में बड़ी बाधा बन रही थीं।

गांव में सीमित संसाधन और लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने समाज के जिम्मेदार लोगों से मदद की उम्मीद की। इसी क्रम में उन्होंने अपनी पीड़ा और समस्याओं को पोटका के पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल के सामने रखा। उन्होंने पूरी संवेदनशीलता के साथ पृथ्वी सोरेन की बात सुनी और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प लिया।

करुणा मय मंडल ने दिखाई सामाजिक जिम्मेदारी

पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल पहल शुरू की। उन्होंने छात्र बिशु सोरेन की शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किया। लगातार संपर्क, दस्तावेजी प्रक्रिया और विद्यालय प्रशासन से समन्वय के बाद अंततः बिशु सोरेन का नामांकन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय गोलमुरी में सातवीं कक्षा में सुनिश्चित कराया गया।

यह कदम न केवल एक गरीब परिवार के लिए राहत लेकर आया, बल्कि समाज में यह संदेश भी दिया कि यदि जनप्रतिनिधि और समाजसेवी संवेदनशीलता के साथ काम करें तो अनेक जरूरतमंद बच्चों का भविष्य संवर सकता है।

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय में मिलेगा बेहतर वातावरण

गोलमुरी स्थित नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय शिक्षा और अनुशासन के लिए जाना जाता है। यहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आवास, भोजन, स्वास्थ्य और बेहतर वातावरण की सुविधा मिलती है। ऐसे विद्यालय में नामांकन मिलने से अब बिशु सोरेन को नियमित शिक्षा के साथ सुरक्षित और सकारात्मक माहौल प्राप्त होगा।

आवासीय विद्यालय में रहकर छात्र अपने भविष्य को बेहतर दिशा दे पाएंगे। वहां उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक शिक्षा, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास का भी अवसर मिलेगा। यह नामांकन उनके जीवन में नई उम्मीद लेकर आया है।

नामांकन के बाद पिता ने जताया आभार

बिशु सोरेन का नामांकन पूरा होने के बाद पिता पृथ्वी सोरेन ने भावुक होकर पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल को फोन किया और उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में उन्हें जिस प्रकार सहयोग मिला, उससे उनके बच्चों का भविष्य अब सुरक्षित महसूस हो रहा है।

पृथ्वी सोरेन ने बताया कि पत्नी के निधन के बाद वे पूरी तरह टूट चुके थे और बच्चों की शिक्षा जारी रखना लगभग असंभव लग रहा था। लेकिन करुणा मय मंडल के प्रयासों ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगा दी है।

समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बना यह प्रयास

आज के समय में जब समाज में संवेदनशीलता कम होती दिखाई देती है, ऐसे में यह पहल लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। यह घटना बताती है कि समाज और प्रशासन के सहयोग से जरूरतमंद परिवारों की जिंदगी बदली जा सकती है।

करुणा मय मंडल द्वारा किया गया यह प्रयास केवल एक नामांकन नहीं बल्कि सामाजिक सरोकार की मिसाल है। यदि समाज के सक्षम लोग आगे आकर गरीब और असहाय बच्चों की मदद करें तो अनेक बच्चों का भविष्य अंधकार से निकलकर उजाले की ओर बढ़ सकता है।

गरीब और असहाय बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अनेक ऐसे बच्चे हैं जो आर्थिक तंगी, पारिवारिक समस्याओं और संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा से दूर हो जाते हैं। माता-पिता की मृत्यु या गंभीर बीमारी जैसी परिस्थितियां बच्चों के भविष्य को पूरी तरह प्रभावित कर देती हैं।

ऐसे समय में समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जोड़ें। शिक्षा ही वह माध्यम है जो किसी भी गरीब परिवार के बच्चे को आत्मनिर्भर और सफल बना सकता है।

बिशु सोरेन की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर मदद मिलने से किसी बच्चे का पूरा जीवन बदल सकता है।

Potka क्षेत्र में करुणा मय मंडल की पहल की हो रही सराहना

पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल के इस प्रयास की पोटका क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। ग्रामीणों ने इसे मानवता और सामाजिक दायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि इसी प्रकार जनता की समस्याओं को समझकर कार्य करें तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से दिखाई देगा।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि गरीब और असहाय बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देना सबसे बड़ा सामाजिक कार्य है। इससे समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ेगा और आने वाली पीढ़ी मजबूत बनेगी।

बिशु सोरेन के उज्ज्वल भविष्य की कामना

अब जब बिशु सोरेन को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिल चुका है, तो गांव और क्षेत्र के लोग उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं। सभी को उम्मीद है कि वह पढ़-लिखकर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन करेंगे।

यह कहानी केवल एक छात्र की सफलता नहीं बल्कि यह संदेश है कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि समाज साथ खड़ा हो जाए तो हर चुनौती को पार किया जा सकता है। मातृहीन छात्र बिशु सोरेन के जीवन में आई यह नई शुरुआत आने वाले समय में कई अन्य जरूरतमंद बच्चों के लिए प्रेरणा बनेगी।

Potka प्रखंड के रसूनचोपा गांव के मातृहीन छात्र बिशु सोरेन का नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय गोलमुरी में नामांकन मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की अनूठी मिसाल है। पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल के प्रयासों ने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो किसी गरीब और असहाय बच्चे के भविष्य को संवारना संभव है।

यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि जरूरतमंदों की सहायता करना केवल दान नहीं बल्कि सामाजिक कर्तव्य है। शिक्षा के माध्यम से ही समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव है और हर बच्चे को बेहतर भविष्य देने की जिम्मेदारी हम सभी की है।

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