
जमशेदपुर: Mango बांग्ला भाषी एकता मंच ने धूमधाम से आयोजित की। नेताजी सुभाष पार्क, डिमना रोड पर हुए इस कार्यक्रम ने बंगाली समाज को एकजुट किया। इस ब्लॉग में हम इस समारोह की पूरी जानकारी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आने वाले सामाजिक कार्यों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती का यह उत्सव न सिर्फ साहित्यिक विरासत को जीवंत करता है, बल्कि सामाजिक एकता का संदेश भी देता है।

रवीन्द्रनाथ टैगोर नोबेल विजेता कवि की विरासत
गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था, लेकिन बंगाली पंचांग के अनुसार बैशाख मास के 25वें दिन उनकी जयंती मनाई जाती है, जो 2026 में 9 मई को पड़ी। वे साहित्य में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले एशियाई थे। उनकी रचनाएं जैसे ‘गीतांजलि’, ‘काबुलीवाला’ और राष्ट्रगान आज भी प्रेरणा देते हैं। रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती पर बंगाली समाज उनकी मानवतावादी विचारधारा को याद करता है।
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शांति निकेतन की स्थापना कर शिक्षा क्रांति लाई। उनकी कविताएं प्रकृति, प्रेम और स्वतंत्रता पर केंद्रित हैं। जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में बंगाली समुदाय उनकी जयंती को सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाता है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।

आयोजन स्थल और मुख्य आकर्षण नेताजी सुभाष पार्क में धूम
9 मई 2026, शनिवार को Mango बांग्ला भाषी एकता मंच ने नेताजी सुभाष पार्क, डिमना रोड, मानगो, जमशेदपुर में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती का आयोजन किया। लगभग 500 लोग परिवार सहित पहुंचे। सभी अतिथियों को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ और प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया गया। झारखंड बंगाबासी समिति के सचिव राजेश राय, झारखंड बांग्ला समिति की अपर्णा गुहा, सामंत मुखर्जी जैसे गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम एस.एन. पाल की देखरेख में चला। बच्चों और कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं – नृत्य, संगीत और रवीन्द्र संगीत। सब्यसाची टीम के मधुर गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभी ने अपनी भाषा संस्कृति संरक्षण का संकल्प लिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की झलक
- नृत्य प्रस्तुतियां: पारंपरिक बंगाली नृत्य जो टैगोर की रचनाओं से प्रेरित।
- संगीत: सब्यसाची टीम के गीत, जिन्हें खूब तालियां मिलीं।
- कविता पाठ: गुरुदेव की चुनिंदा कविताएं।
ये प्रस्तुतियां बंगाली संस्कृति की जीवंतता दिखाती हैं।
संगठन की समिति समर्पित सदस्यों का योगदान
Mango बांग्ला भाषी एकता मंच की समिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया। मुख्य सदस्य:
- अध्यक्ष: प्रकाश मुखर्जी
- उपाध्यक्ष: राकेश दास
- सचिव: असित भट्टाचार्य
- कोषाध्यक्ष: अनंत कुंडू
- अन्य: विश्वजीत मंडल, संतोष पोद्दार, जीवन सिंह देव, जीसू जी, बापन घोष, विनोद दे, बुरा मंडल, राणा जाना, बबलू सरकार, पिंटू।
इनकी मेहनत से सब कुछ स्मूथ रहा। मंच सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता है।
आने वाले सामाजिक कार्यक्रम समाज सेवा का संकल्प
मंच ने भविष्य के प्लान बताए:
- मेडिकल कैंप
- नशा मुक्ति अभियान
- स्वच्छता अभियान
- स्वास्थ्य जांच शिविर
- रक्तदान शिविर
- वृक्षारोपण
ये पहल बंगाली समाज को मजबूत बनाएंगी। रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती पर लिया संकल्प अब अमल में आएगा। जमशेदपुर के Mango क्षेत्र में ये कार्यक्रम सामुदायिक विकास में योगदान देंगे।

रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती का महत्व बंगाली समाज में एकता
रवीन्द्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती ने बंगाली समाज को एक मंच दिया। झारखंड जैसे राज्य में जहां प्रवासी बंगाली रहते हैं, ऐसे आयोजन संस्कृति को जीवित रखते हैं। टैगोर के विचार जहां मन है, वहां स्वर्ग है’ – आज भी प्रासंगिक हैं। यह उत्सव न सिर्फ मनोरंजन, बल्कि शिक्षा और सेवा का प्रतीक है।
भारत भर में रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती पर स्कूल-कॉलेजों में कार्यक्रम होते हैं। जमशेदपुर में टैगोर सोसाइटी जैसे संगठन भी सक्रिय हैं। यह आयोजन उनसे अलग था, जो स्थानीय स्तर पर एकता दिखाता है
रवीन्द्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती पर Mango बांग्ला भाषी एकता मंच का आयोजन प्रेरणादायक रहा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामाजिक संकल्प ने बंगाली समाज को मजबूत किया। रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती हमें उनकी शिक्षाओं को अपनाने की याद दिलाती है। ऐसे आयोजनों से संस्कृति जीवित रहती है।














