
भारत: Hormuz स्ट्रेट में ईरान की IRGC ने तीन कंटेनर जहाजों पर कार्रवाई की है। दो जहाज कब्जे में ले लिए गए और तीसरा ईरानी तट के पास फंसा है। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट जा रहे एक जहाज के कारण भारत पर भी असर पड़ सकता है।

घटना का पूरा विवरण
ईरानी स्टेट टेलीविजन के अनुसार पनामा ध्वज वाला MSC Francesca और लाइबेरिया ध्वज वाला Epaminondas को हिरासत में लेकर ईरान ले जाया गया। ग्रीक ध्वज वाला Euphoria तट के पास अटका हुआ है। ईरान का कहना है कि जहाजों के पास अनुमति नहीं थी और नेविगेशन में हेराफेरी हुई थी।
UKMTO ने पुष्टि की है कि चालक दल सुरक्षित है, लेकिन क्षेत्र में सतर्कता बरती जा रही है। Epaminondas दुबई से मुंद्रा जा रहा था, इसलिए भारत का व्यापार प्रभावित हो सकता है।
भारत पर संभावित प्रभाव
मुंद्रा पोर्ट भारत का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। इससे पहले भी भारतीय जहाज पर हमले के बाद भारत ने ईरान के राजदूत को तलब किया था। यह घटना दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा सकती है। आयात-निर्यात में बाधा आएगी।
भारत तेल आयात पर निर्भर है। होर्मुज स्ट्रेट से 20% वैश्विक तेल गुजरता है।
Hormuz स्ट्रेट का रणनीतिक महत्व
यह स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां से सऊदी अरब, UAE, कुवैत का तेल खाड़ी देशों से बाहर जाता है। संकट से वैश्विक व्यापार ठप हो सकता है। भारत के लिए यह जीवन रेखा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। ऊर्जा बाजार अस्थिर हो गया है। यदि तनाव बढ़ा तो पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे। शेयर बाजार प्रभावित होगा।
पृष्ठभूमि और कारण
अमेरिका ने हाल ही ओमान की खाड़ी में ईरानी जहाज पकड़े। ईरान ने इसे जवाबी कार्रवाई बताया। ईरान अमेरिका से नाकाबंदी हटाने की मांग कर रहा है। IRGC ने चेतावनी दी है।
भारत सरकार की संभावित प्रतिक्रिया
भारत नौसेना तैनात रखेगा। विदेश मंत्रालय ईरान से संपर्क करेगा। चालक दल की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगा। कूटनीतिक स्तर पर प्रयास तेज होंगे।

तनाव कम करने के उपाय
कूटनीति जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र हस्तक्षेप करे। तेल आपूर्ति सुनिश्चित हो। भारत जैसे देश तटस्थ रहकर मध्यस्थता करें।
Hormuz स्ट्रेट में तनाव वैश्विक संकट पैदा कर सकता है। भारत सतर्क है। कूटनीति से समाधान निकले तो बेहतर। व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर नजर रखें।
ईरानी स्टेट टेलीविजन की रिपोर्ट के अनुसार पनामा ध्वज वाला MSC Francesca और लाइबेरिया ध्वज वाला Epaminondas अब ईरानी सुरक्षा बलों की हिरासत में हैं और उन्हें ईरान ले जाया जा चुका है। वहीं ग्रीक ध्वज वाला Euphoria जहाज भी निशाने पर था और वह फिलहाल ईरान के तट के समीप फंसा हुआ है। बताया जा रहा है कि इन जहाजों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
इस घटना का भारत से संबंध इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि Epaminondas जहाज दुबई से निकलकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट की ओर जा रहा था। इससे पहले भी इसी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले जहाज पर हमला हुआ था, जिसके बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के राजदूत को तलब किया था। ऐसे में यह नई घटना दोनों देशों के संबंधों में और तनाव पैदा कर सकती है।
ईरानी नौसेना ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा है कि इन जहाजों के पास आवश्यक अनुमति नहीं थी और उन्होंने नेविगेशन सिस्टम में कथित तौर पर हेराफेरी की थी, जिससे समुद्री सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हुआ। दूसरी ओर UKMTO ने भी इस घटना की पुष्टि की है और बताया है कि जहाजों के चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं, हालांकि पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
इस घटनाक्रम का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिससे ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा।
दरअसल Hormuz स्ट्रेट दुनिया का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां होने वाली हर हलचल का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महसूस किया जाता है। इस बीच ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि उस पर लगी नाकाबंदी नहीं हटाई गई तो वह बल प्रयोग करने से भी पीछे नहीं हटेगा।
गौरतलब है कि हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने ओमान की खाड़ी के पास दो ईरानी जहाजों को कब्जे में लिया था, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। जानकारों का मानना है कि ताजा घटनाक्रम उसी की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।
Hormuz स्ट्रेट में बढ़ता यह तनाव न सिर्फ मध्य-पूर्व बल्कि पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील है, क्योंकि उनका व्यापारिक हित सीधे इस मार्ग से जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में कूटनीतिक प्रयास ही तय करेंगे कि यह संकट थमता है या और गहराता है।














