मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

Tatanagar रेल यात्री संघर्ष समिति ने डीआरएम के नाम संबोधित ज्ञापन एआरएम दफ्तर को सौंपा

810c92dedce0cbe5e9d700a4ea327a2e
On: April 21, 2026 4:23 PM
Follow Us:
Tatanagar
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

B 1

जमशेदपुर: Tatanagar में ट्रेनों की लगातार होने वाली लेटलतीफी और यात्री सुविधाओं की खराब स्थिति ने अब रेल यात्री संघर्ष समिति के सामने एक खुला चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। रेल यात्री संघर्ष समिति के संयोजक शिवशंकर सिंह के नेतृत्व में समिति ने चक्रधरपुर मंडल के डीआरएम (मंडल रेल प्रबंधक) को संबोधित एक ज्ञापन एआरएम दफ्तर में सौंपकर सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचने की कोशिश की है। यदि ट्रेनों की देरी और यात्री सुविधाओं की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, समिति ने आंदोलन को तीव्र करने की चेतावनी दी है

A 2

ज्ञापन किसके नाम और क्यों?

समिति के संयोजक शिवशंकर सिंह की अगुवाई में मंगलवार को एक शिष्टमंडल एआरएम दफ्तर पहुँचा और चक्रधरपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में ट्रेनों की लगातार देरी, मालगाड़ियों को प्राथमिकता और यात्री सुविधा की उपेक्षा जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।

समिति का मानना है कि जब रेलवे के पास मालगाड़ियों के चलाने के लिए पर्याप्त आधारभूत संरचना नहीं है, तो इतनी ज़्यादा मालगाड़ियों का संचालन कर यात्री ट्रेनों की गति और समय-सारणी को चौपट किया जाना न्यायसंगत नहीं है।

लेटलतीफी दूर नहीं, तो आंदोलन तेज

ज्ञापन के साथ संयोजक शिवशंकर सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि ट्रेनों की लेटलतीफी को जल्द सुधार नहीं किया गया, तो रेल यात्री संघर्ष समिति अपने आंदोलन को और तेज करेगी। इसके लिए आगामी दिनों में बड़े स्तर का हस्ताक्षर अभियान चलाने की योजना बनाई गई है, जिसमें टाटानगर, जमशेदपुर और आसपास के रेलयात्रियों से समर्थन जुटाया जाएगा।

साथ ही स्टेशन परिसर में जागरूकता अभियान चलाकर यात्रियों को इस मुद्दे से अवगत किया जाएगा ताकि जनता न सिर्फ अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाए, बल्कि रेल प्रशासन के खिलाफ एक संगठित दबाव बना सके।

Tatanagar मालगाड़ियों की प्राथमिकता यात्री की चिंता क्यों नहीं?

ज्ञापन में सवाल उठाया गया है कि बिना किसी ठोस कारण के यात्री ट्रेनों को रोककर मालगाड़ियों को आगे बढ़ाया जाना क्यों जारी है? यात्री ट्रेनों की समय‑सारणी सरकारी रिकॉर्ड में निर्धारित होती है, लेकिन मालगाड़ियों की नहीं; फिर भी व्यवस्था इसके उलट चल रही है।

इसी बात को लेकर समिति यह पूछ रही है कि आख़िर यह निर्देश किसके आदेश पर चल रहा है? यानी आम आदमी की यात्रा और समय की बजाय भारी माल के चलाने को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है?

रेल मंत्री के वादों और जमीनी हक़ीकत का अंतर

ज्ञापन में रेल मंत्री के उस बयान का भी हवाला दिया गया है, जिसमें यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताई गई है। लेकिन जमीन पर यह नीति कहीं दिखाई नहीं देती। दिन‑रात अखबारों में 1 घंटे से 6 घंटे तक ट्रेनों के लेट होने की खबरें छपती रहती हैं, जो रेलवे की कार्य‑प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती हैं।

7 अप्रैल 2026 को Tatanagar रेलवे स्टेशन पर हजारों यात्रियों ने धरना‑प्रदर्शन करके रेलवे प्रशासन को चेतवनी दी थी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो जनआक्रोश और बढ़ेगा। लेकिन आज तक हालात वही के वही बने हुए हैं – यात्री घंटों ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं और रेल सेवाएँ बुरी तरह चरमरा गई हैं।

सांसद और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका

ज्ञापन में यह भी बताया गया कि बीते दिनों जमशेदपुर के सांसद ने भी इस गंभीर समस्या को रेल मंत्री के समक्ष उठाया था और सुधार के निर्देश भी दिए गए थे। लेकिन Tatanagar चक्रधरपुर मंडल के अधिकारी इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहे, जिससे यात्री संतोष के बजाय निराशा और गुस्से में बदल रहे हैं।

इसी वजह से रेल यात्री संघर्ष समिति ने ठान लिया है कि सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक लंबी जन‑आंदोलन रणनीति बनाई जाएगी, जिसमें हस्ताक्षर अभियान, जागरूकता रैलियाँ, स्थानीय नेताओं‑सामाजिक संगठनों का समर्थन और मीडिया पर दबाव शामिल होगा।

प्रतिनिधिमंडल कौन‑कौन था?

ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में जद(यू) के महानगर अध्यक्ष अजय कुमार, सतीश सिंह, प्रदीप सिंह भोजपुरिया, मनोज ठाकुर, सन्नी परिहार, अमित मैती और सन्नी सिंह शामिल थे। इससे साफ दिखता है कि ट्रेनों की लेटलतीफी का सवाल अब सिर्फ एक‑दो संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक दल‑संगठन भी इसे गंभीरता से उठा रहे हैं।

यह बात रेल प्रशासन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आंदोलन स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और जनस्तर पर भी व्यापक रूप से आगे बढ़ सकता है।

आगे की रणनीति क्या है?

समिति की ओर से साफ कहा गया है कि अब सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि जन‑समर्थन के आधार पर रेलवे प्रशासन को दबाव डाला जाएगा। वृहत हस्ताक्षर अभियान के ज़रिए यात्रियों की आवाज को औपचारिक रूप से रेलवे और राज्य‑केंद्र सरकार के सामने रखा जाएगा।

साथ ही, स्टेशन परिसर में जागरूकता अभियान, नारे, विज़ुअल बैनर और सोशल मीडिया अभियानों के ज़रिए लोगों को ट्रेनों की लेटलतीफी के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों से रूबरू कराया जाएगा।

WhatsApp Image 2026 05 11 At 11.09.39 AM

Leave a Comment

Link copied