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जदयू ने मनाया Chandrashekhar जी का शताब्दी वर्ष जयंती समारोह

On: April 17, 2026 9:23 PM
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झारखंड: जमशेदपुर में जनता दल (यूनाइटेड) ने पूर्व प्रधानमंत्री Chandrashekhar जी की शताब्दी वर्ष जयंती भव्य रूप से मनाई। विधायक सरयू राय ने उनके जीवन के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला – इंदिरा गांधी के विरोध के बावजूद चुनाव जीतना, जेल में सूर्यदेव सिंह से मिलना। ये समारोह Chandrashekhar जी शताब्दी वर्ष की शुरुआत में एक मील का पत्थर साबित हुआ। इस ब्लॉग में हम सरयू राय के भाषण, चंद्रशेखर के योगदान और राजनीतिक विरासत पर विस्तार से चर्चा करेंगे। युवा तुर्क के प्रशंसक जरूर पढ़ें।

Chandrashekhar जी का शताब्दी वर्ष जमशेदपुर समारोह का महत्व

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17 अप्रैल 1927 को जन्मे Chandrashekhar की शताब्दी वर्ष जयंती 2026-27 तक देशभर में मनाई जाएगी। जमशेदपुर के मिलानी हॉल में जदयू ने भव्य समारोह आयोजित किया। मुख्य अतिथि जमशेदपुर पश्चिम विधायक सरयू राय थे। भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। समाजसेवी शिवशंकर सिंह ने उनका सहज-सादगीपूर्ण व्यक्तित्व बताया। मंच संचालन जदयू महासचिव कुलविंदर सिंह पन्नू ने किया, धन्यवाद अध्यक्ष अजय कुमार ने दिया।

ये समारोह Chandrashekhar जी शताब्दी वर्ष का झारखंडी अध्याय था। चंद्रशेखर को युवा तुर्क कहा जाता था – बेबाक, सिद्धांतवादी। जेपी आंदोलन में जेल गए, 1990 में मात्र 4 माह प्रधानमंत्री रहे। उनका “चार माह बनाम चालीस साल” नारा कालजयी है।

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सरयू राय का भावुक संबोधन संबंधों को जीने वाले इंसान

सरयू राय ने Chandrashekhar को संबंधों को जीने वाले इंसान बताया। आलोचना को निजी नहीं लेते थे। उनके साथ सरयू के मधुर-कटु अनुभव:

  • 1980 में जनता पार्टी का बिहार प्रदेश महासचिव बनाया।
  • कन्याकुमारी से राजघाट (4600 किमी) की यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर दिया।
  • भारत यात्रा ट्रस्ट पर सरयू के विरोध को निजी नहीं लिया, स्नेह बरकरार रहा।

सरयू ने कहा, Chandrashekhar संबंध छुपाते नहीं, उजागर करते थे। सूर्यदेव सिंह जेल में गए तो मिलने चले गए – समाज की परवाह किए बिना। धार्मिक थे, लेकिन दिखावा नहीं। वीपी सिंह के विरोधी कवि रखते थे। अटल बिहारी वाजपेयी से गहरी दोस्ती – “गुरुजी” और “गुरुघंटाल”।

Chandrashekhar

Chandrashekhar जी शताब्दी वर्ष में सरयू ने बताया – इंदिरा गांधी कांग्रेस वर्किंग कमेटी चुनाव नहीं चाहती थीं, लेकिन चंद्रशेखर लड़े और जीते। आज आलाकमान ऐसा होने न दे। प्रधानमंत्री बन सोना गिरवी रख डॉलर लाए। देश आगे बढ़ा। जेपी मूवमेंट में गिरफ्तार। वीपी सिंह सरकार गिराई, खुद गठबंधन में शामिल हुए।

उनका व्यक्तित्व बेजोड़ – बलिया के किसान परिवार से दिल्ली तक। आचार्य नरेंद्र देव से प्रेरित। सांसद के रूप में पक्ष-विपक्ष दोनों सुनते।

चंद्रशेखर के प्रमुख योगदानविवरण
जेपी आंदोलनजेल यात्रा, लोकतंत्र बचाया
भारत यात्रा4600 किमी पदयात्रा, एकता का संदेश
प्रधानमंत्री काल4 माह में आर्थिक सुधार
युवा तुर्कबेबाक आलोचना, सिद्धांत राजनीति
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Chandrashekhar की विरासत आज के लिए प्रासंगिक

Chandrashekhar जी शताब्दी वर्ष राजनीति को सिद्धांतों की याद दिलाता है। सरयू बोकारो, रांची, धनबाद, पटना में कार्यक्रम करेंगे। चंद्रशेखर की खासियतें:

  • संबंधों पर आलोचना का असर न पड़ना।
  • बेबाकी – कवि से वीपी सिंह पर कविता सुनाना।
  • सादगी – दिल्ली आवास पर बलिया के सोगों के लिए भोजन।
  • साहस – जेल में मित्र मिलना।

आज की राजनीति में कम होते सिद्धांतों के बीच उनकी प्रेरणा जरूरी। जदयू ने सही संदेश दिया।

राजनीतिक यात्रा किसान से प्रधानमंत्री तक

Chandrashekhar का सफर प्रेरणादायक:

  1. बचपन: बलिया के इब्राहिमपट्टी, किसान परिवार।
  2. राजनीति: समाजवादी, युवा तुर्क।
  3. आंदोलन: जेपी के साथ जेल।
  4. पीएम: 1990, अल्पमत सरकार।
  5. विरासत: सिद्धांतनिष्ठ राजनीति।

उनके समर्थक “चार माह > 40 साल” चिल्लाते। कांग्रेस के 40 सालों से तुलना।

Chandrashekhar जी शताब्दी वर्ष जयंती समारोह ने युवा तुर्क को याद दिलाया। सरयू राय के संस्मरण प्रेरक। संबंध जीना, बेबाकी, साहस – आज की जरूरत। जदयू ने सही श्रद्धांजलि दी। चंद्रशेखर जैसा कोई न हुआ, न होगा।

सरयू राय ने कहा कि Chandrashekhar जी और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच मतभिन्नता होते हुए भी गहरी दोस्ती थी। Chandrashekhar जी अटल जी को गुरुजी कहते थे और अटल जी चंद्रशेखर को गुरुघंटाल कहते थे। दोनों लोकसभा में मुस्कुराते, ठठाकर हंसते भी देखे गए।


श्री राय ने कहा कि Chandrashekhar जी के इस शताब्दी वर्ष में वह बोकारो, रांची, धनबाद, पटना आदि में कार्यक्रम करेंगे। उनका व्यक्तित्व ऐसा रहा कि उनके समानांतर कोई हो न सका।


इसके पूर्व समाजसेवी शिवशंकर सिंह ने कहा कि Chandrashekhar जी बेहद सहज, सरल थे। दिल्ली में उनके आवास परिसर में हर किसी के लिए (खास कर बलिया से आए सोगों के लिए) भात, दाल सब्जी की व्यवस्था रहती थी। किसी को रुकना हो तो वह बिछी हुई दरी पर सो सकता था। वह बेबाक थे।


मंच संचालन जदयू के महासचिव कुलविंदर सिंह पन्नू ने जबकि धन्यवाद ज्ञापन जदयू के महानगर अध्यक्ष अजय कुमार ने किया।

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