
गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह जिले के सरिया अनुमंडल में मंडरामो पश्चिम पंचायत के प्रतिनिधियों द्वारा किए गए अनिश्चित कालीन धरने की। बीते 22 मार्च से सरिया अनुमंडल मुख्यालय के मुख्य द्वार पर चल रहा यह धरना SDM संतोष गुप्ता के आश्वाशन के बाद स्थगित कर दिया गया। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह स्थगन स्थायी समाधान है या फिर आने वाले दिनों में आंदोलन की चिंगारी फिर भड़क सकती है? इस ब्लॉग में हम SDM के आश्वाशन के बाद अनिश्चित कालीन धरना स्थगित होने की पूरी घटना को विस्तार से समझेंगे, पंचायत की समस्याओं पर नजर डालेंगे और ग्रामीण विकास की चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।

धरने की शुरुआत पंचायत विकास कार्यों का अवरुद्ध होना
झारखंड के गिरिडीह जिले में सरिया अनुमंडल के अंतर्गत आने वाली मंडरामो पश्चिम पंचायत के लोग लंबे समय से परेशान थे। पंचायत की मुखिया इंद्रा देवी पर सरिया थाने में हत्या का गंभीर मामला दर्ज है। इस कारण से वे पिछले छह महीनों से फरार चल रही हैं। मुखिया की अनुपस्थिति में पंचायत के सभी विकास कार्य ठप हो चुके थे।
सोचिए, गांव के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। जाति प्रमाण पत्र, आवासीय आय प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज नहीं बन पा रहे। इसके अलावा, 15वीं वित्त आयोग की राशि की कथित अवैध निकासी का आरोप भी लगाया गया है। धरना का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी लखन मेहता ने स्पष्ट कहा कि इन मुद्दों से ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ गई हैं। SDM के आश्वाशन के बाद अनिश्चित कालीन धरना स्थगित करने से पहले यह धरना 21 दिनों तक चला, जिसमें दर्जनों ग्रामीण शामिल हुए। महेंद्र मंडल, चेतलाल महतो, पंकज यादव, अनिल यादव, बेबी देवी, नागेश्वर साव, नीरज मंडल और धर्मपाल महतो जैसे लोग लगातार धरना स्थल पर डटे रहे।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि पंचायती राज व्यवस्था में मुखिया की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। जब एक व्यक्ति फरार हो जाता है, तो पूरा गांव प्रभावित होता है। विकास कार्य रुक जाते हैं, सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी समस्याएं आम हैं, लेकिन उनका समाधान तुरंत होना चाहिए।
SDM चार सूत्री मांगें ग्रामीणों की असली पीड़ा
धरनार्थियों की चार मुख्य मांगें थीं, जो पंचायत के हित में थीं। पहली और सबसे बड़ी मांग थी कि हत्यारोपी मुखिया इंद्रा देवी का वित्तीय प्रभार जब्त किया जाए। दूसरी मांग थी कि पंचायत के निर्वाचित उपमुखिया को तुरंत वित्तीय प्रभार सौंपा जाए। तीसरी मांग 15वीं वित्त की राशि की उच्च स्तरीय जांच की थी। चौथी मांग जाति और आय प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों को तत्काल जारी करने की।
लखन मेहता ने बताया कि इन मांगों के बिना पंचायत का कोई काम नहीं चल सकता। SDM के आश्वाशन के बाद अनिश्चित कालीन धरना स्थगित हुआ, लेकिन मांगें पूरी नहीं हुईं। यह चार सूत्री मांगें न सिर्फ मंडरामो पश्चिम पंचायत की समस्या को दर्शाती हैं, बल्कि पूरे झारखंड और देश के ग्रामीण इलाकों की कहानी कहती हैं। पंचायती राज अधिनियम के तहत उपमुखिया को प्रभार देने का प्रावधान है, लेकिन नौकरशाही की लालफीताशाही इसे रोक देती है।

हत्या मामले का पंचायत पर प्रभाव
मुखिया पर हत्या का केस दर्ज होने से पंचायत की साख पर बट्टा लगा है। फरार होने से विकास कार्य रुके हैं। ग्रामीणों को आवास योजना के तहत घर नहीं मिल रहे, प्रमाण पत्रों के अभाव में सरकारी लाभ से वंचित हैं। यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रही है। अगर समय रहते जांच पूरी हो और उपमुखिया को प्रभार मिले, तो पंचायत फिर पटरी पर आ सकती है।
15वीं वित्त राशि की अवैध निकासी का आरोप
15वीं वित्त आयोग की राशि पंचायतों के लिए वरदान है, जो सड़क, पानी, स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होती है। लेकिन आरोप है कि इसकी अवैध निकासी हुई। उच्च स्तरीय जांच जरूरी है ताकि भ्रष्टाचार रुके और पैसा सही जगह पहुंचे। SDM के आश्वाशन के बाद अनिश्चित कालीन धरना स्थगित होने से उम्मीद जगी है कि जांच होगी।
SDM संतोष गुप्ता का आगमन और आश्वासन
गुरुवार को धरना स्थल पर SDM संतोष गुप्ता पहुंचे। उन्होंने धरनार्थियों को सुनिश्चित किया कि मुखिया के खिलाफ हत्यारोप की जांच प्रतिवेदन उपायुक्त गिरिडीह को भेज दिया गया है। फरार होने संबंधी जांच भी भेजी गई। उपमुखिया को प्रभार देने का मामला राज्य सरकार के पास है, जिसका प्रतिवेदन भेजा गया। उन्होंने कहा, “सरकार के आदेश आने तक प्रतीक्षा करें।”
इस आश्वासन पर धरनार्थियों ने धरना 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया। लखन मेहता ने साफ कहा, “हमारा धरना समाप्त नहीं हुआ, बल्कि स्थगित है। 10 दिनों में मांगें पूरी न हुईं तो सड़क पर उतरेंगे।” SDM के आश्वाशन के बाद अनिश्चित कालीन धरना स्थगित होना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन अब जिम्मेदारी प्रशासन की है।

प्रशासन की भूमिका ग्रामीण आंदोलनों में
SDM का धरना स्थल पर पहुंचना सराहनीय है। यह दिखाता है कि स्थानीय अधिकारी जनता की आवाज सुन रहे हैं। लेकिन आश्वासन से आगे कार्रवाई जरूरी। झारखंड सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए।
ग्रामीण विकास की बड़ी चुनौतियां
यह घटना पंचायती राज में कई चुनौतियों को उजागर करती है। पहली, आपराधिक मामलों में फंसे मुखिया। दूसरी, वित्तीय प्रभार का हस्तांतरण। तीसरी, सरकारी योजनाओं का लाभ न पहुंचना। चौथी, भ्रष्टाचार। झारखंड जैसे राज्यों में पंचायतें विकास का आधार हैं, लेकिन लालफीताशाही इन्हें कमजोर कर रही।
पंचायती राज मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में 2.5 लाख से ज्यादा पंचायतें हैं। इनमें से कई मुखिया अनुपस्थिति से जूझ रही हैं। समाधान? कानून में स्पष्ट प्रावधान, त्वरित जांच और डिजिटल पारदर्शिता। आधार लिंकिंग से राशि निकासी रोकी जा सकती है। ग्रामीणों को सशक्त बनाने के लिए जागरूकता अभियान जरूरी।
झारखंड में पंचायती राज की स्थिति
झारखंड में 4,000 से ज्यादा पंचायतें हैं। गिरिडीह जैसे जिले खनन क्षेत्र होने से विकास की संभावनाएं हैं, लेकिन भ्रष्टाचार बाधा। SDM के आश्वाशन के बाद अनिश्चित कालीन धरना स्थगित जैसी घटनाएं प्रशासन को सतर्क करती हैं।

SDM 10 दिनों का इंतजार
अब सारी नजरें 10 दिनों पर हैं। अगर मांगें पूरी हुईं, तो मंडरामो पश्चिम पंचायत फिर विकास की राह पकड़ेगी। प्रमाण पत्र बनेंगे, राशि सही जगह जाएगी। लेकिन अगर नहीं, तो आंदोलन तेज होगा। समाजसेवी लखन मेहता जैसे लोग ग्रामीणों के मसीहा हैं। उनकी लड़ाई हम सबकी है।
SDM के आश्वाशन के बाद अनिश्चित कालीन धरना स्थगित होना ग्रामीणों की जीत का संकेत है, लेकिन यह आधी-अधूरी है। मंडरामो पश्चिम पंचायत के लोग बुनियादी अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। झारखंड सरकार को अब तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। पंचायती राज को मजबूत बनाना देश के विकास की कुंजी है।














