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NIT प्राचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन

On: March 30, 2026 9:27 PM
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जमशेदपुर: NIT जमशेदपुर में प्राचीन भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर 15वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी का धूमधाम से उद्घाटन हुआ। यह दो दिवसीय आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का शानदार मंच है। NIT प्राचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र ने देशभर के विद्वानों को एक मंच पर ला खड़ा किया। अगर आप भारतीय विरासत और आधुनिक तकनीक के समन्वय में रुचि रखते हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए है।

NIT उद्घाटन सत्र का भव्य शुभारंभ

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30 मार्च 2026 को डीजेएलएचसी कक्ष संख्या 212 में NIT प्राचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन दीप प्रज्वलन और माँ सरस्वती वंदना से शुरू हुआ। विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया गया। प्रो. राम विनय शर्मा, अध्यक्ष भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र और एनआईटी उप-निदेशक ने स्वागत भाषण दिया ।

सत्र में संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया NIT प्राचीन ज्ञान का पुनरुत्थान और आधुनिक विज्ञान से समन्वय। यह आयोजन सतत विकास के लिए प्रासंगिक है।

प्रमुख वक्ताओं के विचार

प्रो. राकेश सहगल (एनआईटी हमीरपुर, पूर्व निदेशक NIT श्रीनगर) ने आधुनिक शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेशन पर जोर दिया। प्रो. देवी प्रसाद मिश्रा, संस्थापक अध्यक्ष BPGVS ने NIT प्राचीन प्रौद्योगिकी की वैज्ञानिकता, समृद्धि और स्थायित्व बताया ।

प्रो. गौतम सूत्रधार, NIT निदेशक ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत पर बल दिया। डॉ. ओम प्रकाश पांडेय ने ज्ञान, विज्ञान और प्रज्ञान के संबंध रेखांकित किए। ये विचार वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए प्रेरक हैं।

संगोष्ठी के प्रमुख विषय

NIT प्राचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में पारंपरिक सिंचाई, धातुकर्म, सतत कृषि जैसे उदाहरण पेश किए गए। दो दिवसीय आयोजन में नृजातीय वनस्पति ज्ञान, पारंपरिक कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंजीनियरिंग, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान शामिल हैं ।

ये विषय प्रकृति-सम्मत और समाज-केंद्रित दृष्टिकोण पर केंद्रित। भारतीय विरासत को आधुनिक संदर्भ में पुनर्जनन का प्रयास सराहनीय।

THE NEWS FRAME

NIT के प्रमुख विषयों की सूची

  • नृजातीय वनस्पति ज्ञान
  • पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय ज्ञान
  • आयुर्वेद और वास्तुकला
  • खगोल विज्ञान की प्राचीन तकनीकें

NIT जमशेदपुर की भूमिका

भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र, NIT जमशेदपुर ने यह 15वीं संगोष्ठी आयोजित की। संस्थान NEP 2020 के तहत बहु-विषयक शिक्षा को बढ़ावा दे रहा । प्रो. गौतम सूत्रधार का नेतृत्व laudable। यह आयोजन तकनीकी शिक्षा को समृद्ध करेगा।

NIT प्राचीन भारतीय प्रौद्योगिकी के उदाहरण

भारतीय परंपरा में सतत प्रौद्योगिकियाँ जैसे:

प्रौद्योगिकीविशेषताआधुनिक प्रासंगिकता
पारंपरिक सिंचाईजल संरक्षणजल संकट समाधान
धातुकर्मदिल्ली लोहासतत धातु उत्पादन
सतत कृषिजैविक खेतीपर्यावरण संरक्षण 

ये उदाहरण NIT प्राचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का मूल हैं।

सत्र का समापन

डॉ. जितेंद्र कुमार का धन्यवाद ज्ञापन और वंदे मातरम से समापन। डॉ. मनीष कुमार झा ने संचालन किया। आयोजन सफल रहा ।

संगोष्ठी का महत्व

NIT प्राचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन के लिए समाधान देगी। युवा शोधकर्ताओं को प्रेरणा मिलेगी। NIT का यह प्रयास राष्ट्रीय गौरव बढ़ाएगा।

प्राचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी ने भारतीय विरासत को नई पहचान दी। आधुनिक विज्ञान से समन्वय सतत विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। NIT जमशेदपुर बधाई के पात्र। 

पारंपरिक सिंचाई, धातुकर्म, सतत कृषि पर चर्चा हुई। नृजातीय वनस्पति, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषय शामिल। ये प्रकृति-सम्मत दृष्टिकोण वैश्विक चुनौतियों का समाधान देंगे।

डॉ. जितेंद्र कुमार का धन्यवाद ज्ञापन और वंदे मातरम से समापन। डॉ. मनीष कुमार झा ने संचालन किया। यह आयोजन भारतीय विरासत को नई पहचान देगा

राम विनय शर्मा ने स्वागत भाषण दिया। प्रो. राकेश सहगल ने शिक्षा में भारतीय ज्ञान के समावेशन पर बल दिया। प्रो. देवी प्रसाद मिश्रा ने प्राचीन प्रौद्योगिकी की स्थायित्व बताया। NIT निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने सतत विकास के लिए समन्वय की आवश्यकता जताई। डॉ. ओम प्रकाश पांडेय ने ज्ञान-विज्ञान-प्रज्ञान के संबंध रेखांकित किए।

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