
Kolhan विश्वविद्यालय में पी.जी. इतिहास विभाग का विदाई समारोह सम्पन्न – भावभीनी अलविदा की यादें विश्वविद्यालय, चाईबासा का वीर पोटो हो ऑडिटोरियम 28 मार्च 2026 को इतिहास‑प्रेमी दिलों की धड़कन बन गया। यहाँ पी.जी. इतिहास विभाग के सत्र 2023‑25 के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए “विदाई समारोह” का आयोजन किया गया, जिसे सत्र 2024‑26 के विद्यार्थियों ने निर्मल उत्साह और भावुकता के संगम के साथ संभाला। यह दिन न सिर्फ 피.जी. इतिहास के छात्रों के लिए यादगार रहा, बल्कि विभाग के शिक्षकों और पूरे विश्वविद्यालय परिवार के लिए भी गर्व और चिंतन का दिन साबित हुआ।

Kolhan विश्वविद्यालय मे विदाई समारोह का माहौल और आयोजन
Kolhan विदाई समारोह का आयोजन पी.जी. इतिहास विभाग के जूनियर छात्रों ने किया, जिन्होंने ना सिर्फ कार्यक्रम‑योजना, बल्कि व्यावहारिक व्यवस्थाओं तक पर ध्यान दिया। कार्यक्रम में उत्साह, उत्सुकता और भावुकता का अनूठा संगम देखने को मिला; एक ओर सीनियर‑छात्रों की आँखों में यादों का समंदर लहराता था तो दूसरी ओर जूनियरों के चेहरे पर नई उम्मीद झलकती थी।
कार्यक्रम का आरंभ विद्यार्थी‑प्रतिनिधियों के स्वागत‑भाषण से हुआ, जिसमें छात्रों ने अपने दो वर्ष के संस्थानीय जीवन के बारे में छोटे‑छोटे किस्से और प्रेरणादायक अनुभव साझा किए। इससे कार्यक्रम में ही ऐसा लगने लगा कि यह सिर्फ “विदाई” नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत की ओर बढ़ता पहला कदम है।
शिक्षकों और गणमान्यों की महत्वपूर्ण उपस्थिति
कार्यक्रम में Kolhan विश्वविद्यालय के कई गणमान्य और शिक्षक उपस्थित रहे। विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार सिंह के साथ‑साथ विभिन्न विषयों के संकाय सदस्य जैसे डॉ. विकास नंदन, प्रदीप कुमार झा, दर्शनशास्त्र विभाग की डॉ. प्रीति शर्मा, भौतिकी विभाग की डॉ. मागुनी महाकुड, भूगर्भ शास्त्र विभाग की डॉ. सुजाता मोहंती और जया जैकलीन तिर्की समेत कई शिक्षक‑शिक्षिकाएँ शामिल हुईं। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और औपचारिकता और गरिमा दी।
इसके अलावा महिला महाविद्यालय चाईबासा की डॉ. अमृता जायसवाल, टाटा कॉलेज के डॉ. विनोद कुमार लोहरा व राजेश कुमार प्रमाणिक, जगन्नाथपुर कॉलेज के डॉ. नीतिन नीरज, शोधार्थी दशमत किस्कू, तथा गैर‑शिक्षकेतर कर्मी लखन सिंह कुंटिया और लक्ष्मी गोप भी Kolhan विदाई समारोह में उपस्थित रहे। इन सभी की उपस्थिति से यह स्पष्ट होता है कि पी.जी. इतिहास विभाग का विद्यार्थी‑जीवन केवल अकेले विभाग के लोगों का नहीं, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय‑परिसर का अभिन्न हिस्सा रहा है।
Kolhan सांस्कृतिक कार्यक्रम और अनुभव‑साझा
विदाई समारोह का हर पल गर्मजोशी से भरा था। जूनियर विद्यार्थियों ने सीनियर छात्रों के सम्मान में संगीत, नृत्य और नाटकीय प्रस्तुतियाँ दीं, जिन्होंने सीनियर‑छात्रों की आँखों में चमक ला दी। ये सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक तोहफा थीं, जिन्हें देखकर उपस्थित सभी भाव‑विभोर हो उठे और सीनियर‑छात्रों ने गर्व से उनका अभिवादन किया।
सीनियर छात्रों ने अपने दो वर्ष के पी.जी. जीवन के बारे में अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे Kolhan विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक चर्चाएँ, शोध‑संभावनाएँ और छात्र‑संगठनों ने उन्हें न सिर्फ ज्ञान दिया, बल्कि व्यक्तित्व भी विकसित किया। उन्होंने शिक्षकों के प्रति आभार जताया और साथियों के साथ बंधी दोस्ती‑यादों को जीवनभर न भूलने की कसम खाई।

भावुक पल और नई शुरुआत की प्रेरणा
इस विदाई समारोह में न केवल तालियाँ और हँसी थी, बल्कि कई ऐसे पल भी आए जब सीनियर‑छात्रों की आँखों में आँसू छलक उठे और जुदाई का दर्द महसूस हुआ। हर एक ने दूसरे को निजी तौर पर शुभकामनाएँ दीं, फोन‑नंबर बदले और हाथ‑मिलाकर एक‑दूसरे को नई यात्रा के लिए प्रेरित किया। इस तरह विदाई ने “अलविदा” की बजाय “फिर मिलेंगे” का संदेश दिया।
Kolhan विश्वविद्यालय कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने सभी पूर्व‑छात्रों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं और इतिहास के छात्रों के रूप में देश व समाज के प्रति उत्तरदायित्व‑बोध बनाए रखने का आह्वान किया। इस तरह Kolhan विश्वविद्यालय के पी.जी. इतिहास विभाग का यह विदाई समारोह न सिर्फ एक साधारण पार्टी रहा, बल्कि भावनाओं, शिक्षा और समाज‑सेवा का एक जीवंत संगम बन गया।











