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महाशिवरात्रि 2026: क्या है महाशिवरात्रि का इतिहास, पूजा कब और कैसे जानें विस्तार से।

On: February 15, 2026 10:54 AM
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महाशिवरात्रि स्पेशल : वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को है। यह फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाएगा, जो रविवार यानी आज को पड़ रही है।

तिथि विवरण

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चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 5:04 बजे शुरू होकर 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे समाप्त होगी। निशीथ काल पूजा का शुभ मुहूर्त 15 फरवरी रात 11:55 से 12:56 तक रहेगा। व्रत पारण 16 फरवरी सुबह 6:42 से दोपहर 3:10 तक किया जा सकता है।

चार प्रहर पूजा समय

  • पहला प्रहर: 15 फरवरी शाम 6:01 से रात 9:09 तक।
  • दूसरा प्रहर: रात 9:09 से 16 फरवरी रात 12:17 तक।
  • तीसरा प्रहर: 16 फरवरी सुबह 12:17 से 3:25 तक।
  • चौथा प्रहर: सुबह 3:25 से 6:33 तक।

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान शिव को समर्पित है। यह फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाया जाता है, जो आमतौर पर फरवरी-मार्च में पड़ता है।

महाशिवरात्रि का अर्थ

महाशिवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है ‘महान शिव की रात्रि’। यह रात्रि शिव तत्व का प्रतीक है, जो सृष्टि के संहारक और कल्याणकारी रूप को दर्शाता है। इस दिन भक्त रात्रि जागरण कर शिव की उपासना करते हैं, जो चेतना को जागृत करने का अवसर प्रदान करता है।

इतिहास और कथाएं

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव ने पार्वती से विवाह किया था। एक अन्य कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है, जब निकले विष को शिव ने पी लिया, जिससे वे नीलकंठ कहलाए। शिवलिंग के उद्भव की कथा भी इसी दिन से संबंधित है, जब ब्रह्मा-विष्णु ने शिवलिंग की पूजा की। ये कथाएं शिव के करुणा और संहार के स्वरूप को रेखांकित करती हैं।

मनाने की विधि

इस पर्व को चार प्रहरों में मनाया जाता है। भक्त उपवास रखते हैं, शिवलिंग पर दूध, दही, घृत, शहद और बेलपत्र से अभिषेक करते हैं। रात्रि जागरण में भजन, कीर्तन, ध्यान और ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र जाप होता है। मंदिरों में विशेष पूजा और रुद्राभिषेक आयोजित होते हैं।

लाभ और महत्व

महाशिवरात्रि साधना के लिए सर्वोत्तम रात्रि मानी जाती है, जो कुंडलिनी जागरण, आध्यात्मिक उन्नति और पाप नाश करती है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह रात्रि चंद्रमा के प्रभाव से प्राण शक्ति बढ़ाती है और मन को शांत करती है। व्रत और जागरण से दीर्घायु, समृद्धि और ज्ञान प्राप्ति होती है।

संदेश

यह पर्व सत्य, शांति और परोपकार का संदेश देता है। शिव तत्व हमें संघर्ष त्यागकर आत्मा से जुड़ने की प्रेरणा देता है। सभी प्राणियों में एकत्व का बोध कराते हुए यह कल्याण का मार्ग दिखाता है।

महाशिवरात्रि पर शिव पूजन की विधि

महाशिवरात्रि पर शिव पूजन की विधि सरल और शास्त्रोक्त है, जो चार प्रहरों में पूरी रात्रि में की जाती है। यह भगवान शिव को प्रसन्न करने का विशेष अवसर है।

आवश्यक सामग्री

पूजन के लिए शिवलिंग या शिव मूर्ति, जल, दूध, दही, घृत, शहद (पंचामृत), बेलपत्र, आक/कनेर के फूल, चंदन, अक्षत, काले तिल, धूप, दीप, कपूर, फल, बिल्व पत्र और नैवेद्य जैसे पकवान। कलश, थाली, आसन भी रखें। शिव को तुलसी, हल्दी या टमाटर न चढ़ाएं।

पूजन की चरणबद्ध विधि

  1. संकल्प और शुद्धिकरण: स्नान कर शुभ मुहूर्त में पूजा स्थल पर आसन बिछाएं। आचमन करें, जल छिड़ककर शुद्धि करें और संकल्प लें।
  2. पंचोपचार पूजन: गंध (चंदन), पुष्प (बेलपत्र तीन प्रहरों तक, तीन-तीन बेलपत्र), धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।
  3. अभिषेक: शिवलिंग पर जलधारा से पंचामृत, दूध आदि से अभिषेक करें। बेलपत्र उल्टे चढ़ाएं। प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग सामग्री जैसे चंदन-तिल (प्रथम), दूध-भांग (द्वितीय)।
  4. आरती और जाप: कपूर आरती उतारें। रुद्राक्ष माला से 108 बार ‘ॐ नमः शिवाय’ जपें। रात्रि जागरण रखें।

चार प्रहर पूजन

  • प्रथम प्रहर (शाम): चंदन, काले तिल, कमल पुष्प।
  • द्वितीय प्रहर (रात्रि): दूध, भांग, दही।
  • तृतीय प्रहर (मध्यरात्रि): घृत, शहद, गंगाजल।
  • चतुर्थ प्रहर (भोर): पंचामृत, बिल्व पत्र। निशीथ काल में विशेष पूजन।

नियम और सावधानियां

उपवास रखें (फलाहार या निर्जला), ब्रह्मचर्य पालन करें। पूजा के बाद ब्राह्मण भोजन और दान दें। पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करें। इससे पाप नाश और शिव कृपा प्राप्त होती है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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