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प्रधानमंत्री मोदी से मिले रोल्स-रॉयस के सीईओ टुफान एर्गिनबिलगिक, भारत में निवेश और साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा

On: February 12, 2026 12:31 PM
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नई दिल्ली: रोल्स-रॉयस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) टुफान एर्गिनबिलगिक ने बुधवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक में भारत में कंपनी की गतिविधियों के विस्तार, उभरती तकनीकों में सहयोग और भारतीय युवाओं के साथ साझेदारी को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुलाकात का स्वागत करते हुए कहा कि भारत में रोल्स-रॉयस की बढ़ती दिलचस्पी और निवेश देश की तकनीकी प्रगति और कौशल विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

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प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज सुबह रोल्स-रॉयस के सीईओ श्री टुफान एर्गिनबिलगिक से मिलकर बहुत अच्छा लगा। हम भारत में अपनी गतिविधियों को बढ़ाने और हमारे नवीन और गतिशील युवाओं के साथ भागीदारी करने के लिए रोल्स-रॉयस के उत्साह का स्वागत करते हैं।” उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक विनिर्माण और नवाचार का प्रमुख केंद्र बन रहा है और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सहयोग से यह प्रक्रिया और तेज होगी।

तकनीक, विनिर्माण और कौशल विकास पर फोकस

सूत्रों के अनुसार, बैठक में एयरोस्पेस, रक्षा, ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। रोल्स-रॉयस लंबे समय से भारत में विमान इंजन, समुद्री प्रणालियों और ऊर्जा समाधान से जुड़े प्रोजेक्ट्स में सक्रिय है। अब कंपनी भारत में अनुसंधान एवं विकास (R&D), स्थानीय उत्पादन और कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ाने पर जोर दे रही है।

भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत विदेशी कंपनियों को स्थानीय साझेदारी, तकनीकी हस्तांतरण और रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ऐसे में रोल्स-रॉयस जैसी वैश्विक कंपनी का भारत में विस्तार देश के औद्योगिक और तकनीकी परिदृश्य के लिए अहम माना जा रहा है।

युवाओं के साथ साझेदारी पर जोर

बैठक के दौरान भारतीय युवाओं की प्रतिभा और नवाचार क्षमता पर विशेष चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवा इंजीनियर, वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। रोल्स-रॉयस यदि भारतीय संस्थानों, स्टार्ट-अप्स और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ साझेदारी बढ़ाता है, तो इससे नई तकनीकों के विकास और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

रोल्स-रॉयस के सीईओ टुफान एर्गिनबिलगिक ने भी भारत को वैश्विक स्तर पर तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा कि कंपनी भारत में दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत करना चाहती है। उन्होंने भारतीय प्रतिभा, इंजीनियरिंग क्षमता और तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की सराहना की।

रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में सहयोग की संभावना

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और रोल्स-रॉयस के बीच सहयोग का सबसे बड़ा क्षेत्र रक्षा और एयरोस्पेस हो सकता है। भारत अपने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा दे रहा है और उन्नत इंजन तकनीक, विमान प्रणालियों और समुद्री उपकरणों में वैश्विक साझेदारी तलाश रहा है। रोल्स-रॉयस का इस क्षेत्र में व्यापक अनुभव है, जो भारत की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी सहयोग प्रदान कर सकता है।

इसके अलावा, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में भी दोनों पक्षों के बीच सहयोग की संभावनाएं देखी जा रही हैं। कंपनी वैकल्पिक ईंधन, हाइब्रिड प्रणालियों और उन्नत ऊर्जा समाधान पर काम कर रही है, जो भारत के ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों के अनुरूप है।

निवेश और रोजगार के नए अवसर

भारत में गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। यदि रोल्स-रॉयस अनुसंधान केंद्र, उत्पादन इकाइयां या प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करता है, तो इससे इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ सकता है। साथ ही भारतीय कंपनियों और आपूर्ति श्रृंखला को भी लाभ मिलेगा।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक भरोसेमंद और तेजी से विकसित हो रहा बाजार है। यहां मजबूत नीतिगत ढांचा, कुशल मानव संसाधन और बढ़ता औद्योगिक आधार अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। रोल्स-रॉयस की भारत में बढ़ती रुचि इसी विश्वास को दर्शाती है।

भारत-यूके औद्योगिक संबंधों को मिलेगा बल

रोल्स-रॉयस एक ब्रिटिश बहुराष्ट्रीय कंपनी है और भारत-ब्रिटेन के औद्योगिक व तकनीकी संबंधों में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उच्चस्तरीय बैठकों से भारत को उन्नत तकनीक, कौशल विकास और निवेश के अवसर मिलते हैं, जबकि कंपनियों को एक बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार तक पहुंच मिलती है।

आगे की राह

प्रधानमंत्री मोदी और रोल्स-रॉयस के सीईओ के बीच हुई यह मुलाकात भारत में तकनीकी सहयोग, विनिर्माण और कौशल विकास के नए अध्याय की ओर संकेत करती है। आने वाले समय में यदि प्रस्तावित योजनाएं मूर्त रूप लेती हैं, तो इससे भारत के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक तकनीकी साझेदारी को नई गति मिल सकती है।

कुल मिलाकर, यह बैठक भारत के बढ़ते वैश्विक महत्व और विदेशी कंपनियों के लिए आकर्षण को दर्शाती है। भारत में निवेश और साझेदारी को लेकर रोल्स-रॉयस की सकारात्मक पहल और सरकार की स्वागतपूर्ण नीति, दोनों मिलकर आने वाले वर्षों में औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

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