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सीतापुर पत्रकार हत्याकांड: शूटरों के एनकाउंटर के बाद भी असली मास्टरमाइंड फरार, जांच पर सवाल।

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On: August 10, 2025 12:38 PM
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हत्या की घटना: 8 मार्च 2025 की दोपहर, उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के महोली इलाके में स्थित हेमपुर ओवरब्रिज पर एक सनसनीखेज वारदात हुई। स्थानीय पत्रकार राघवेंद्र बाजपेई अपनी मोटरसाइकिल से गुजर रहे थे, तभी बाइक सवार दो बदमाश अचानक उनके पास आए। बदमाशों ने नज़दीक से ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें राघवेंद्र बाजपेई को गोली लग गई।

गोली लगते ही वह सड़क किनारे गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना इतनी तेज़ी से हुई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, हमलावर मौके से फरार हो गए। शुरूआत में इस हादसे को एक सड़क दुर्घटना बताया गया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि राघवेंद्र की मौत सिर और सीने में गोली लगने से हुई है।

इसके बाद पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगालने शुरू किए। जांच में सामने आया कि वारदात में दो पेशेवर शूटर शामिल थे, जो इस हत्या को अंजाम देने के बाद इलाके से निकल गए। यह घटना न सिर्फ स्थानीय मीडिया जगत बल्कि पूरे प्रदेश में हलचल मचाने वाली बन गई।

THE NEWS FRAME

समीक्षात्मक रिपोर्ट: सीतापुर में पत्रकार राघवेंद्र बाजपेई हत्याकांड, 5 महीने बाद भी असल साजिशकर्ता कानून की पकड़ से दूर

सीतापुर हत्याकांड: जानें हत्या क्यों, कैसे, कब, किसलिए, कारण और कौन है जिम्मेदार?

विशेष बिंदु :

  • 5 महीने बाद भी साजिश की जड़ तक नहीं पहुंची पुलिस, परिवार कर रहा सीबीआई जांच की मांग
  • पहले ब्लैकमेल को बताया गया मकसद, अब पुलिस के नए बयान से उठे संदेह
  • दो शूटर मुठभेड़ में ढेर, बैग से डायरी और कागजात बरामद, कई गिरफ्तारी अभी बाकी
  • पहली गिरफ्तारी में तीन आरोपी जेल में, सवाल – क्या वे असली गुनहगार हैं?
  • 15 और 25 मुकदमों वाले कुख्यात भाई, एक-एक लाख के इनामी बदमाश थे एनकाउंटर में मारे गए
क्यों? – हत्याकांड की जड़ तक क्यों नहीं पहुंची जांच

सीतापुर के चर्चित पत्रकार राघवेंद्र बाजपेई की हत्या 8 मार्च 2025 को दिनदहाड़े महोली इलाके के हेमपुर ओवरब्रिज पर हुई। पुलिस ने शुरुआत में इसे हादसा बताया, लेकिन पोस्टमार्टम में गोली लगने की पुष्टि के बाद मामला हत्या में बदल गया। पांच महीने की जांच और दो शूटरों के एनकाउंटर के बावजूद असल सवाल वही है – अगर असली मास्टरमाइंड और फाइनेंसर अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए, तो क्या पहले गिरफ्तार तीन आरोपी निर्दोष हो सकते हैं?

कैसे? – हत्या की वारदात और पुलिस कार्रवाई

घटना का दिन: 8 मार्च 2025, बाइक सवार दो बदमाशों ने राघवेंद्र बाजपेई को गोली मारी।

पहला खुलासा: 10 अप्रैल 2025 को तत्कालीन एसपी चक्रेश मिश्रा की टीम ने बाबा शिवानंद उर्फ विकास राठौड़, निर्मल सिंह और असलम गाजी को गिरफ्तार कर दावा किया कि बाबा को एक किशोर सेवादार से संबंधों का खुलासा होने पर ब्लैकमेल किया जा रहा था, इसलिए उसने शूटरों को सुपारी दी।

एनकाउंटर: 5 महीने बाद, 119 दिन बाद, पुलिस ने सीसीटीवी और खुफिया इनपुट के आधार पर दो शूटर – राजू तिवारी उर्फ रिजवान खान और संजय तिवारी उर्फ अकील खान – को पिसावा थाना क्षेत्र में मुठभेड़ में मार गिराया।

मुठभेड़ का दावा: दोनों ने अवैध कार्बाइन और पिस्तौल से फायरिंग की, जवाबी कार्रवाई में मारे गए। बैग से डायरी और कागजात बरामद।

कब? – जांच की टाइमलाइन
  • 8 मार्च 2025: हत्या की वारदात
  • 10 अप्रैल 2025: तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और पहला खुलासा
  • अगस्त 2025: दो शूटरों का एनकाउंटर, नए सुराग मिलने का दावा
  • अब: पुलिस का कहना – असल फाइनेंसर और साजिशकर्ता की गिरफ्तारी बाकी
किसलिए? – सीतापुर हत्या का असली मकसद अब भी धुंधला

पहले खुलासे में ब्लैकमेल को हत्या का कारण बताया गया, लेकिन अब पुलिस का बयान इस पर सवाल खड़ा करता है। नए एसपी अंकुर अग्रवाल का कहना है कि फाइनेंस किसने किया और असली वजह क्या थी, यह पता चल गया है, लेकिन गिरफ्तारी अभी बाकी है। इसका मतलब, पहले दिए गए मकसद और साजिशकर्ता की कहानी अधूरी या आंशिक हो सकती है।

कारण – जांच में बदलाव और परिवार की नाराज़गी

पीड़ित परिवार अब भी सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। उनका आरोप है कि असल हत्यारे और साजिशकर्ता कानून की पकड़ से बाहर हैं। पुलिस का दावा है कि कोई भी निर्दोष जेल में नहीं रहेगा और असली मास्टरमाइंड को जल्द पकड़ा जाएगा।

कौन? – आरोपी और उनका आपराधिक बैकग्राउंड

पहली गिरफ्तारी: बाबा शिवानंद उर्फ विकास राठौड़, निर्मल सिंह, असलम गाजी

एनकाउंटर में मारे गए:

  • राजू तिवारी उर्फ रिजवान खान – 15 आपराधिक मुकदमे
  • संजय तिवारी उर्फ अकील खान – 25 आपराधिक मुकदमे

दोनों मूलत: मिश्रिख कोतवाली क्षेत्र के अटवां ग्राम के निवासी, हिंदू पिता और मुस्लिम मां से जन्म, इसलिए दो नामों से पहचान।

दोनों पर एक-एक लाख का इनाम था।

बाकी है कहानी का असली अंत, बाकी है कई सवालों के जवाब

पांच महीने बाद भी सीतापुर पत्रकार हत्याकांड में पुलिस के पास कई जवाब नहीं हैं। असली फाइनेंसर कौन है? हत्या का वास्तविक कारण क्या है? पहले गिरफ्तार लोग असली गुनहगार थे या किसी साजिश का हिस्सा? एनकाउंटर ने भले ही शूटरों को खत्म कर दिया हो, लेकिन सच्चाई की गुत्थी अब भी खुलनी बाकी है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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