पोटका (पूर्वी सिंहभूम, झारखंड): झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मईया सम्मान योजना अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। योजना की घोषणा से लेकर इसके प्रचार-प्रसार तक जिस तरह इसे सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया गया था, आज वही योजना लाभुकों के लिए सिरदर्द बन गई है।
पूर्व जिला पार्षद करुणामय मंडल ने योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी व्यवस्था मजबूत नहीं होने के कारण योजना असफलता के कगार पर है, और साथ ही अन्य पेंशन योजनाएं जैसे वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन भी इससे प्रभावित हो रही हैं।
क्या हैं मुख्य समस्याएं?
1. पारदर्शिता का अभाव: मंडल के अनुसार, अब तक सरकार योजना में कोई स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया नहीं दिखा सकी है।
2. असंगत भुगतान प्रणाली: किसी लाभुक को हर महीने ₹1000 की सम्मान राशि देनी थी, लेकिन कभी-कभी यह ₹2500 हो जाती है। फिर शुरू होती है “कैंची प्रक्रिया”, जिसमें बहाने बनाकर लोगों को योजना से बाहर कर दिया जाता है – “ए नहीं है, वो नहीं है” कहकर छंटनी।
3. अनियमितता और तकनीकी बहाने: कई लाभुकों को कुछ महीनों तक पैसा मिल जाता है, फिर अचानक बंद हो जाता है। डीबीटी (Direct Benefit Transfer) और नॉन-डीबीटी के नियमों में उलझाकर लाभ रोक दिए जाते हैं। ब्लॉक और जिला कार्यालयों से जवाब नहीं मिलता, सिर्फ एक ही उत्तर—“पोर्टल बंद है।”
4. शिविर की व्यवस्था में कमी: प्रखंड स्तर पर शिविर आयोजित हो रहे हैं, पर 34 पंचायतों के बदले सिर्फ 10 पंचायतों की भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। वर्तमान में जो त्रुटि सूची जारी की गई है, वह भी अधूरी और भ्रमित करने वाली लग रही है।
क्या है करुणामय मंडल की मांग?
- शिविर पंचायत स्तर तक ले जाए जाएं ताकि हर वंचित लाभुक की तकलीफ को समझा जा सके।
- हकीकत में सुधार के लिए कार्य हो, न कि केवल औपचारिकता निभाई जाए।
- स्थानीय सांसदों और विधायकों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए।
- सभी लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान किया जाए।
राजनीतिक चेतावनी
मंडल ने यह भी कहा कि अगर इस योजना की व्यवस्थाएं नहीं सुधारी गईं तो यह सत्ता पक्ष के लिए ही राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकती है।
“कहीं ऐसा न हो कि ‘मैय्या साथी’ योजना, विपक्ष के लिए ‘राजनीतिक खाद’ बन जाए,” — श्री मंडल।
योजनाओं का व्यापक प्रभाव
मुख्यमंत्री मईया सम्मान योजना की गड़बड़ी का असर केवल इसी योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि बाकी सभी पेंशन योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। वृद्ध, विधवा, दिव्यांग आदि कई ज़रूरतमंदों को उनका हक नहीं मिल पा रहा।
मुख्यमंत्री मईया सम्मान योजना का मकसद जरूरतमंद महिलाओं को सम्मान और आर्थिक सहयोग देना था, पर वर्तमान व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की गंभीर कमी है।
अगर सरकार वाकई में गरीब और ज़रूरतमंदों के लिए प्रतिबद्ध है, तो इसे कागजों से निकाल कर ज़मीनी सच्चाई के अनुसार सुधारना होगा।सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी योजना का लाभ बिना भेदभाव और बिना बाधा के सभी योग्य लोगों तक पहुंचे।









