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Liquor ban, बालीगुमा में जागरूकता की मिसाल- ग्रामीण पहुंचे उपायुक्त कार्यालय, ठोस कार्रवाई की मांग

On: July 9, 2025 2:31 PM
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Liquor ban: बालीगुमा में जागरूकता की मिसाल- ग्रामीण पहुंचे उपायुक्त कार्यालय

Liquor ban: बालीगुमा में जागरूकता की मिसाल- ग्रामीण पहुंचे उपायुक्त कार्यालय, ठोस कार्रवाई की मांगशराब के खिलाफ लड़ाई में बालिगुमा गाँव ने एक बड़ी और साहसी पहल की है। गाँव में चल रही अवैध शराब भट्ठियों के खिलाफ ग्रामसभा के निर्णय के बाद अब ग्रामीणों ने सीधे प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

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शराबबंदी को लेकर बालिगुमा में जागरूकता की मिसाल — ग्रामीण पहुंचे उपायुक्त कार्यालय, की ठोस कार्रवाई की मांग

गाँव बोला: अब और नहीं!

ग्रामसभा का ऐतिहासिक फैसला: अब गाँव में पूर्ण Liquor ban

29 जून 2025 को डाहेर टोला (धोरा बस्ती) में हुई ग्रामसभा में सभी ग्रामीणों ने एकजुट होकर यह तय किया कि गाँव में अब शराब नहीं बिकेगी। यह फैसला कोई सामान्य निर्णय नहीं था, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम था। गाँव के बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी ने इसमें भाग लिया और बताया कि शराब से परिवार टूटते हैं, महिलाओं की सुरक्षा पर असर पड़ता है और युवाओं का भविष्य खराब होता है।

4 दुकानदारों ने माना Liquor ban फैसला, पर 3 अब भी कर रहे हैं अवैध बिक्री

गाँव में पहले सात महुआ शराब की दुकानें थीं। गाँव की एकजुटता और जागरूकता से चार दुकानदारों ने खुद अपनी दुकानें बंद कर दीं। लेकिन तीन लोगों –

  • संजय धोरा उर्फ कान्हू धोरा
  • खुखी धोरा एवं पूर्णिमा खुटिया
  • विष्णु धोरा उर्फ हाब्लू धोरा

– ने ग्रामसभा के फैसले को नज़रअंदाज़ करते हुए अब भी चोरी-छिपे शराब बेचने का काम जारी रखा है। इससे गाँव में अशांति का माहौल बना हुआ है।

उपायुक्त से मुलाकात, ज्ञापन सौंपा

आज 8 जुलाई को ग्रामसभा के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम से मुलाकात की और एक लिखित ज्ञापन सौंपा। उनकी साफ मांग थी कि ग्रामसभा के सामूहिक फैसले का सम्मान किया जाए और जो लोग अवैध रूप से शराब बेच रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

गाँव की महिलाएं और युवा रहे आगे

इस आंदोलन में गाँव की महिलाएं और युवा सबसे आगे रहे। उन्होंने साफ कहा कि गाँव में शांति और सुरक्षा तभी संभव है जब शराब की बिक्री पूरी तरह से बंद हो।

उपस्थित ग्रामीणों में शामिल थे:
गुलू धोरा, जोनो धोरा, जुष्णा भिबार, चुमकी धोरा, चमत्कार धोरा, सुबिता धोरा, कमला धोरा, सोमबारी धिबार, सबिता धोरा, रोमी नाथ, कार्तिक धोरा, लोखिम नाथ, दीपक धोरा, लाधेन धोरा, छोटू नाथ, अनिल धोरा, दीपक रंजीत, रखाल सोरेन, चमन सिंह, सोनू सिंह आदि।

गाँवों में जागरूकता से ही होगा Liquor ban

बालिगुमा गाँव ने जो उदाहरण पेश किया है, वह दिखाता है कि अगर गाँव खुद आगे आएं और एकजुट होकर सामाजिक समस्याओं के खिलाफ खड़े हों, तो बदलाव संभव है। यह सिर्फ शराबबंदी नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ी शुरुआत है।

प्रशासनिक सहयोग और जनचेतना से बनेगा सुरक्षित समाज

अब ज़िम्मेदारी प्रशासन की है कि वह गाँव की आवाज़ को सुने और कार्रवाई करे। साथ ही, अन्य गाँवों को भी बालिगुमा से प्रेरणा लेनी चाहिए। शराब से मुक्ति सिर्फ नारा नहीं, गाँव-गाँव की जरूरत है।

यह केवल विरोध नहीं, एक नया सामाजिक आंदोलन है — बालिगुमा बोल रहा है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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