- Dalit teenager beaten to death, villagers caught the accused and tied him to a tree.
📍 CRIME DAIRY: गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना क्षेत्र अंतर्गत कठवारा गांव में एक दलित किशोर की पिटाई के बाद मौत हो जाने से क्षेत्र में तनाव फैल गया है। मृत किशोर की पहचान लखन रजवार के पुत्र धोनी रजवार के रूप में हुई है, जिसकी गुरुवार रात कथित रूप से गांव के ही मिथिलेश तिवारी द्वारा बर्बर पिटाई की गई थी। इलाज के दौरान धोनी की मौत हो गई।
हत्या के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूटा
शनिवार की सुबह जब आरोपी मिथिलेश तिवारी गांव से फरार होने की कोशिश कर रहा था, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने उसे धर दबोचा। कुछ देर पिटाई के बाद उसे गांव के एक पेड़ से बांध दिया गया।
इसके बाद पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई, जिस पर डुमरी एसडीपीओ सुमित कुमार, पीरटांड बीडीओ मनोज मरांडी, सीओ गिरजानंद किस्कू, मधुबन व खुखरा थाना प्रभारी और पीरटांड थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
📣 ग्रामीणों का आक्रोश: लापरवाही से मौत
- ग्रामीणों ने बताया कि पिटाई के बाद आरोपी ने न तो किशोर को अस्पताल पहुंचाया, न ही किसी से मदद ली।
- स्थानीय लोगों ने आपसी चंदा कर किशोर को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
- ग्रामीणों का आरोप है कि पीरटांड थाना को घटना की सूचना उसी रात दे दी गई थी, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
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⚖️ बोले अधिकारी?
एसडीपीओ सुमित कुमार ने कहा:
“मामले की जांच की जा रही है। आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। हत्या की प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि
“घटना की रात थाना को लिखित आवेदन नहीं दिया गया था, परंतु पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच होगी।”
मांग: न्याय और मुआवज़ा
घटनास्थल पर पहुंचे जेकेएलएम जिलाध्यक्ष रॉकी नवल ने कहा:
“यह घटना अत्यंत दुखद है। पीरटांड पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है। दोषी को सख्त सजा मिलनी चाहिए और पीड़ित परिवार को मुआवज़ा भी मिले।”
⚠️ मामले की गंभीरता
- घटना ने एक बार फिर दलित उत्पीड़न और प्रशासनिक संवेदनहीनता की बहस को जन्म दिया है।
- ग्रामीणों की एकजुटता और आक्रोश प्रशासन के लिए एक कड़ा संकेत है कि न्याय प्रक्रिया में अब देर नहीं होनी चाहिए।
धोनी रजवार की मौत केवल एक किशोर की जान नहीं गई, बल्कि यह एक पूरे गांव की सांप्रदायिक संवेदना और कानून व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न छोड़ गई है। प्रशासन पर अब यह जिम्मेदारी है कि वह न केवल दोषी को सजा दिलवाए, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की भी समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए।
✍️ रिपोर्ट: गिरिडीह संवाददाता












